Adv Ravita Hooda Dahiya

Adv Ravita Hooda Dahiya Advocate | Criminal, Posco & Civil Litigation, Matrimonial Specialist

“प्राइवेसी का हक ⚖️ — फोन पासवर्ड बताने को मजबूर करना ‘घरेलू हिंसा’: हाई कोर्ट!”
18/04/2026

“प्राइवेसी का हक ⚖️ — फोन पासवर्ड बताने को मजबूर करना ‘घरेलू हिंसा’: हाई कोर्ट!”





Adv Ravita Hooda Dahiya
18/04/2026

Adv Ravita Hooda Dahiya

Adv Ravita Hooda Dahiya      ⚖️ POCSO मामलों को रद्द (Quash) करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तय किए अहम सिद्धांतDelhi High Co...
18/04/2026

Adv Ravita Hooda Dahiya

⚖️ POCSO मामलों को रद्द (Quash) करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तय किए अहम सिद्धांत

Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि किन परिस्थितियों में POCSO Act के तहत दर्ज मामलों को रद्द (quash) किया जा सकता है—खासकर उन मामलों में जहां संबंध सहमति (consensual) और बाद में विवाह या आपसी समझौते में बदल गया हो।

📌 क्या था मामला?
अदालत के सामने ऐसे कई मामले आए, जहां—
• लड़का-लड़की के बीच संबंध सहमति से था
• बाद में दोनों ने शादी कर ली या साथ रहने लगे
• पीड़िता (victim) ने किसी प्रकार के शोषण या ज़बरदस्ती से इनकार किया

ऐसे मामलों में अदालत ने यह तय करने के लिए गाइडलाइन/प्रिंसिपल्स तय किए कि FIR को जारी रखा जाए या रद्द किया जाए।

⚖️ हाईकोर्ट द्वारा तय मुख्य सिद्धांत (Principles):

🔹 1. वास्तविक शोषण (Exploitation) होना ज़रूरी है
यदि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हो कि संबंध सहमति से था और किसी प्रकार का दबाव या शोषण नहीं था, तो मामला जारी रखना उचित नहीं।

🔹 2. पीड़िता का स्पष्ट बयान महत्वपूर्ण
यदि पीड़िता खुद कहती है कि—
👉 उसे कोई नुकसान नहीं हुआ
👉 संबंध उसकी इच्छा से था
तो अदालत इस पहलू को गंभीरता से देखेगी।

🔹 3. ‘Revictimisation’ से बचाव
अगर मुकदमा चलाने से पीड़िता को और मानसिक/सामाजिक नुकसान (revictimisation) होता है, तो केस रद्द किया जा सकता है।

🔹 4. विवाह या स्थायी संबंध एक महत्वपूर्ण फैक्टर
यदि दोनों पक्ष अब शादीशुदा हैं या स्थायी रिश्ते में हैं, तो अदालत इस सामाजिक वास्तविकता को भी ध्यान में रखती है।

🔹 5. कानून का उद्देश्य – सुरक्षा, न कि दंड हर हाल में
कोर्ट ने दोहराया कि POCSO का मकसद बच्चों को यौन शोषण से बचाना है, न कि हर सहमति वाले रिश्ते को अपराध बना देना।

🔹 6. तथ्यों का गहराई से परीक्षण जरूरी
हर केस अपने तथ्यों पर निर्भर करेगा—कोर्ट बिना जांच के सिर्फ समझौते के आधार पर केस खत्म नहीं करेगी।

⚠️ महत्वपूर्ण सीमा (Limitations):
👉 POCSO में 18 वर्ष से कम उम्र की “सहमति” कानूनी रूप से मान्य नहीं होती
👉 कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि हर “near-majority” या किशोर प्रेम संबंध को स्वतः वैध नहीं माना जा सकता

📢 अदालत का संतुलित दृष्टिकोण:
👉 जहां शोषण है → सख्त कार्रवाई
👉 जहां वास्तविक प्रेम संबंध और कोई नुकसान नहीं → न्यायिक विवेक से राहत

🧾 कानूनी संदेश:
क्रिमिनल लॉ का उद्देश्य वास्तविक अपराधों को दंडित करना है, न कि सहमति आधारित संबंधों को जबरन अपराध में बदलना।

📚 Case Title: X v. State (NCT of Delhi) & Anr. (POCSO Quashing Principles Case)

Adv Ravita Hooda Dahiya            💰 अगर केस झूठा साबित हो जाए, तो फंसाने वाले को सज़ा और आपको मिलेगा 'मुआवजा' अक्सर लोग...
16/04/2026

Adv Ravita Hooda Dahiya



💰 अगर केस झूठा साबित हो जाए, तो फंसाने वाले को सज़ा और आपको मिलेगा 'मुआवजा' अक्सर लोग सोचते हैं कि झूठे केस से बरी (Acquit) हो जाना ही जीत है। नहीं!

जिसने आपकी जिंदगी के अनमोल साल बर्बाद किए, उसे सज़ा दिलवाना असली न्याय है।
कानूनी टिप: जब कोर्ट आपको बाइज़्ज़त बरी कर दे, तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ 'BNS Section 217' (झूठा आरोप लगाकर फंसाना) के तहत क्रिमिनल केस दर्ज करवा सकते हैं, जिसमें उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है।
साथ ही, सिविल कोर्ट में 'मानहानि' (Defamatio) और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) का मुकदमा दायर करके आप अपनी प्रतिष्ठा के नुकसान के लिए भारी मुआवजा भी वसूल सकते हैं!


Legal Awareness | Indian Laws

⚠️ Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। इसे कानूनी सलाह न मानें। हर केस के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले विशेषज्ञ वकील से सलाह लें।

Adv Ravita Hooda Dahiya
16/04/2026

Adv Ravita Hooda Dahiya

Address

District & Session Court Sonipat
Sonipat
131001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Adv Ravita Hooda Dahiya posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share