26/08/2024
श्रीकृष्ण के कर्मयोग का संदेश हर उद्यमी के लिए प्रेरणादायक है।
"सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः॥"
श्रीकृष्ण का यह श्लोक हमें सिखाता है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत में चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन हमें इनसे घबराने की बजाय अपने कर्मपथ पर डटे रहना चाहिए। जिस तरह धुएं से ढकी हुई आग अपनी गरिमा नहीं खोती, उसी तरह प्रारंभिक दोषों के बावजूद हमारे प्रयास हमें सफलता की ओर ले जाते हैं।
आइए, इस जन्माष्टमी पर हम सभी अपने कार्यों में निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ें, और श्रीकृष्ण के इस दिव्य उपदेश को जीवन में अपनाएं।
कर्मयोग की इस अद्भुत प्रेरणा के साथ, आप सभी को जन्माष्टमी की मंगलमय शुभकामनाएं!
भवदीय : AAG global reality