28/05/2026
पूरी व्यवस्था ही सड़ चुकी है।
जब भी कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत बढ़ती है, जनता पर दोहरी मार पड़ती है — पेट्रोल-डीज़ल महंगे, फिर हर चीज़ महंगी।
लेकिन सबसे बड़ा कटाक्ष यह है कि तेल महंगा होने पर सरकारों की टैक्स से कमाई भी बढ़ जाती है, क्योंकि टैक्स प्रतिशत के हिसाब से लिया जाता है।
यानी जनता महंगाई से पिसती रहे और सरकारें राजस्व बढ़ने पर खुश होती रहें।
यह कैसी असंवेदनशील सरकारें और कैसी व्यवस्था है?
राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार, दोनों आम आदमी की तकलीफ़ समझने में विफल दिखती हैं।
आज जनता की आय नहीं बढ़ रही, लेकिन टैक्स, महंगाई और बोझ लगातार बढ़ रहे हैं।
सच्चाई यह है कि अब सिर्फ सरकार बदलने से काम नहीं चलेगा।
पूरी व्यवस्था बदलने की ज़रूरत है —
ऐसी व्यवस्था जहाँ जनता सिर्फ टैक्स देने की मशीन न हो,
जहाँ सरकारें जनता के दर्द को समझें,
और जहाँ व्यवस्था जनता के लिए काम करे, सत्ता के लिए नहीं।
अब समय आ गया है कि लोग सवाल पूछें और बदलाव की माँग करें।