08/08/2026
"अक्षर ज्ञान भले नहीं, पर जीवन का वेद पढ़ा है,
माँ! तेरे ही संघर्षों से, मेरा यह वजूद गढ़ा है।"
आज से लगभग तेईस वर्ष पूर्व, जब अचानक पिता जी का साया हमारे सिर से उठ गया था, तब नियति ने हमारे सामने एक अथाह अंधकार ला खड़ा किया था। लेकिन उस घोर निराशा और शून्यता के बीच, मेरी माँ ने स्वयं को एक दीपक की भाँति जलाकर हमारा पथ आलोकित किया। समाज के चुभते हुए तानों, अनगिनत अभावों और जीवन के हर झंझावात को उन्होंने अपने आँचल में समेट लिया, ताकि हम चारों भाई-बहनों के सपनों पर कोई आँच न आ सके।
मेरी माँ किताबी रूप से बहुत अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं। उन्हें दुनिया की इस जटिल शिक्षा व्यवस्था और इसके तौर-तरीकों का कोई विशेष भान नहीं है। किंतु, एक माँ के भीतर न जाने वह कौन-सी ईश्वरीय शक्ति, कौन-सा ब्रह्मांडीय ज्ञान छिपा होता है, जो बिना किसी डिग्री के भी अपने बच्चों का भविष्य सँवारने की अचूक दिशा जानता है! बिना अक्षरों का विशेष ज्ञान लिए भी, उन्होंने हमें उच्च शिक्षा की ओर मोड़ा और एक बेहतर इंसान व सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए हमें उस सांचे में ढाला, जो शायद दुनिया का कोई बड़ा विश्वविद्यालय भी नहीं कर पाता।
माँ के उसी अथक परिश्रम, अनकहे बलिदान और मौन तपस्या का ही यह सुखद परिणाम है कि आज हम चारों भाई-बहन एक अच्छे मुकाम पर हैं और अपने-अपने जीवन में सफलता के पथ पर निरंतर अग्रसर हैं।
आज जब मैं देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान, 'भारतीय जनसंचार संस्थान' (IIMC) में 'हिंदी पत्रकारिता' के छात्र के रूप में दाखिला ले चुका हूँ, तो मुझे स्पष्ट आभास होता है कि मेरी इस उड़ान के पीछे मेरी माँ के पैरों के वो छाले हैं, जो उन्होंने कभी किसी को दिखने ही नहीं दिए।
अपनी इस सबसे बड़ी सफलता को, अपने इस मुकाम को, मैं पूरे गर्व और अश्रुपूरित श्रद्धा के साथ अपनी उसी भोली, जुझारू और दुनिया की सबसे संघर्षशील माँ के चरणों में समर्पित करता हूँ। यह मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके 23 वर्षों के उस तप की सफलता है जिसमें उन्होंने अपनी हर खुशी की आहुति दी है।
माँ, आपके इस ऋण को तो मैं कई जन्मों में भी नहीं चुका सकता, लेकिन मेरी यह सफलता आपके उसी पवित्र संघर्ष का एक छोटा-सा प्रतिफल है।
I love you maa🥰❤️
i miss you alot
आपका पुत्र -पिन्टु सोनी