13/09/2026
नए जमाने के नए लुक में 'विघ्नहर्ता'; भक्त कर रहे हैं ढोल-नगाड़ों से स्वागत।
संवाददाता, पिंटू सोनी, नई दिल्ली।
राजधानी में जहां एक तरफ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के चलते सड़कों से लेकर आम जन-जीवन धीमा पड़ गया है, इसके बावजूद गणेश उत्सव की तैयारियां उत्साह के साथ हो रही हैं। सरोजिनी नगर में सड़क किनारे फुटपाथ पर गणपति की मूर्तियों को अंतिम आकार दिया जा रहा है। कहीं कारीगर रंग-बिरंगे वस्त्रों से नए लुक में मूर्ति को सजा रहे हैं तो कहीं चेहरे की भाव-भंगिमा को श्रद्धापूर्वक गढ़ा जा रहा है।
वहीं भक्तों की पसंद इस बार थोड़ी अलग नजर आ रही है। विघ्नहर्ता की नई थीम पर बनी मूर्तियों की मांग (डिमांड) हो रही है। भक्त, गणपति के नए लुक के लिए गूगल फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं। 'सिद्धि विनायक' की मूर्ति, विराजमान मुद्राओं वाली और बाल गणेश की मूर्तियों की मांग इस बार बढ़ गई है। हर साल दिल्ली में गणपति की लगभग 80 प्रतिशत मूर्तियां कोलकाता, चेन्नई और महाराष्ट्र जैसे अलग-अलग राज्यों से मंगाई जाती हैं, जिन्हें अंतिम रूप दिल्ली में आए कारीगर देते हैं।
गणेश उत्सव से 15 दिन पहले से ही कारीगर मूर्तियां गढ़ना शुरू कर देते हैं। मौसम की परवाह किए बिना दिन-रात मूर्तियां तैयार कर रहे हैं, ताकि भक्तों की मांग समय पर पूरी की जा सके। अलग-अलग आकार एवं थीम आधारित मूर्तियों के मूल्य भी भिन्न हैं। पांच से सात फीट की मूर्ति 20 से 25 हजार रुपये में उपलब्ध है।
हालांकि, इस बार बाजार हल्का है और दुकानदारों को मूर्ति बेचने में थोड़ी मुश्किल हो रही है। इसका मुख्य कारण भारत मंडपम में चल रहा 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन' है, जिसके कारण अवैध रूप से फुटपाथ पर लगी दुकानों को दिल्ली पुलिस ने हटाने के आदेश दिए हैं। और जहां मूर्ति बेचने की अनुमति है, वहां पिछले साल की भांति भारी मात्रा में आने वाले खरीदार भक्तों की संख्या में कमी आई है। जिसके कारण कारीगरों के मन में डर है कि मेहनत से बनाई गई मूर्तियों की बिक्री नहीं हुई तो काफी नुकसान होगा।