চলো পাল্টাই

চলো পাল্টাই সত্যের লড়াই লড়তে হবে এবং নতুন ভারত গড়তে হবে জয় ভারত

01/04/2021

মানুষের সঙ্গে সব সময় এক সাতে চলা এবং

দিন যায় দিন আসে, সময়ের স্রোতে ভাসে।কেউ কাঁদে কেউ হাঁসে, তাতে কি যায় আসে।খুঁজে দেখো আশে পাশে, কেউ তোমায় তার জীবনের চেয়ে ব...
18/02/2021

দিন যায় দিন আসে, সময়ের স্রোতে ভাসে।
কেউ কাঁদে কেউ হাঁসে, তাতে কি যায় আসে।
খুঁজে দেখো আশে পাশে, কেউ তোমায় তার জীবনের চেয়ে বেশি ভালবাসে।

17/02/2021

আমাদের দেশে হবে, সেই মেয়ে কবে।
মিস কল না দিয়ে, ডাইরেক্ট কল দিবে।
পাঁচ জনকে মন না দিয়ে, একজনকে দিবে।
সারা জীবন একজন কে ভালবেসে যাবে।

জয় বাংলা

17/02/2021

वैज्ञानिक जीवन। আবদুল আজাদকালাম
1972 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े। अब्दुल कलाम को परियोजना महानिदेशक के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ। 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। इस प्रकार भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गये। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र (गाइडेड मिसाइल्स) को डिजाइन किया। इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसे प्रक्षेपास्त्रों को स्वदेशी तकनीक से बनाया था। कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव थे। उन्होंने रणनीतिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली का उपयोग आग्नेयास्त्रों के रूप में किया। इसी प्रकार पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण भी परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया। इस तरह भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में सफलता अर्जित की। कलाम ने भारत के विकासस्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए एक विशिष्ट सोच प्रदान की। यह भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे। 1982 में वे भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में वापस निदेशक के तौर पर आये और उन्होंने अपना सारा ध्यान “गाइडेड मिसाइल” के विकास पर केन्द्रित किया। अग्नि मिसाइल और पृथ्वी मिसाइल का सफल परीक्षण का श्रेय काफी कुछ उन्हीं को है। जुलाई 1992 में वे भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुये। उनकी देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ। राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन॰डी॰ए॰ घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई 2002 को कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे। इनका कार्याकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। अब्दुल कलाम व्यक्तिगत ज़िन्दगी में बेहद अनुशासनप्रिय थे। यह शाकाहारी थे। इन्होंने अपनी जीवनी विंग्स ऑफ़ फायर भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है। इनकी दूसरी पुस्तक ‘गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ’ आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं। यह भी ज्ञात हुआ है कि दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफ़ी माँग है और वहाँ इन्हें बहुत अधिक पसंद किया जाता है। यूं तो अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं थे लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है। इन्होंने अपनी पुस्तक इण्डिया 2020 में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते थे और इसके लिए इनके पास एक कार्य योजना भी थी। परमाणु हथियारों के क्षेत्र में यह भारत को सुपर पॉवर बनाने की बात सोचते रहे थे। वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते थे। कलाम का कहना था कि ‘सॉफ़्टवेयर’ का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभांवित हो सकें। ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा। वैसे इनके विचार शांति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं।

कैरियर

17/02/2021

উহারা প্রচার করুক হিংসা বিদ্বেষ আর নিন্দাবাদ;
আমরা বলিব সাম্য শান্তি এক আল্লাহ জিন্দাবাদ।
উহারা চাহুক সংকীর্ণতা, পায়রার খোপ, ডোবার ক্লেদ,
আমরা চাহিব উদার আকাশ, নিত্য আলোক, প্রেম অভেদ।

উহারা চাহুক দাসের জীবন, আমরা শহীদি দরজা চাই;
নিত্য মৃত্যু-ভীত ওরা, মোরা মৃত্যু কোথায় খুঁজে বেড়াই!
ওরা মরিবেনা, যুদ্ব বাধিঁলে ওরা লুকাইবে কচুবনে,
দন্তনখরহীন ওরা তবু কোলাহল করে অঙ্গনে।

ওরা নির্জীব; জিব নাড়ে তবু শুধূ স্বার্থ ও লোভবশে,
ওরা জিন, প্রেত, যজ্ঞ, উহারা লালসার পাঁকে মুখ ঘষে।
মোরা বাংলার নব যৌবন,মৃত্যুর সাথে সন্তরী,
উহাদের ভাবি মাছি পিপীলিকা, মারি না ক তাই দয়া করি।

মানুষের অনাগত কল্যাণে উহারা চির অবিশ্বাসী,
অবিশ্বাসীরাই শয়তানী-চেলা ভ্রান্ত-দ্রষ্টা ভুল-ভাষী।
ওরা বলে, হবে নাস্তিক সব মানুষ, করিবে হানাহানি।
মোরা বলি, হবে আস্তিক, হবে আল্লাহ মানুষে জানাজানি।

উহারা চাহুক অশান্তি; মোরা চাহিব ক্ষমাও প্রেম তাহার,
ভূতেরা চাহুক গোর ও শ্মশান, আমরা চাহিব গুলবাহার!
আজি পশ্চিম পৃথিবীতে তাঁর ভীষণ শাস্তি হেরি মানব
ফিরিবে ভোগের পথ ভয়ে, চাহিবে শান্তি কাম্য সব।

হুতুম প্যাচারা কহিছে কোটরে, হইবেনা আর সূর্যোদয়,
কাকে আর তাকে ঠোকরাইবেনা, হোক তার নখ চষ্ণু ক্ষয়।
বিশ্বাসী কভু বলেনা এ কথা, তারা আলো চায়, চাহে জ্যোতি;
তারা চাহে না ক এই উৎপীড়ন এই অশান্তি দূর্গতি।

তারা বলে, যদি প্রার্থনা মোরা করি তাঁর কাছে এক সাথে,
নিত্য ঈদের আনন্দ তিনি দিবেন ধুলির দুনিয়াতে।
সাত আসমান হতে তারা সাত-রঙা রামধনু আনিতে চায়,
আল্লা নিত্য মহাদানী প্রভূ, যে যাহা চায়, সে তাহা পায়।

যারা অশান্তি দুর্গতি চাহে, তারা তাই পাবে, দেখো রে ভাই,
উহারা চলুক উহাদের পথে, আমাদের পথে আমরা যাই।
ওরা চাহে রাক্ষসের রাজ্য, মেরা আল্লার রাজ্য চাই,
দ্বন্দ্ব-বিহীন আনন্দ-লীলা এই পৃথিবীতে হবে সদাই।

মোদের অভাব রবে না কিছুই, নিত্যপূর্ণ প্রভূ মোদের,
শকুন শিবার মত কাড়াকাড়ি করে শবে লয়ে-- শখ ওদের!
আল্লা রক্ষা করুন মোদেরে, ও পথে যেন না যাই কভূ,
নিত্য পরম-সুন্দর এক আল্লাহ্ আমাদের প্রভূ।

পৃথিবীতে যত মন্দ আছে তা ভালো হোক, ভালো হোক ভালো,
এই বিদ্বেষ-আঁধার দুনিয়া তাঁর প্রেমে আলো হোক, আলো।
সব মালিন্য দূর হয়ে যাক সব মানুষের মন হতে,
তাঁহার আলোক প্রতিভাত হোক এই ঘরে ঘরে পথে পথে।

দাঙ্গা বাঁধায়ে লুট করে যারা, তার লোভী, তারা গুন্ডাদল
তারা দেখিবেনা আল্লাহর পথ চিরনির্ভয় সুনির্মল।
ওরা নিশিদিন মন্দ চায়, ওরা নিশিদিন দ্বন্দ চায়,
ভূতেরা শ্রীহীন ছন্দ চায়, গলিত শবের গন্ধ চায়!

তাড়াবে এদের দেশ হতে মেরে আল্লার অনাগত সেনা,
এরাই বৈশ্য, ফসল শৈস্য লুটে খায়, এরা চির চেনা।
ওরা মাকড়সা, ওদের ঘরের ঘেরোয়াতে কভু যেয়ো না কেউ,
পর ঘরে থাকে জাল পেতে, ওরা দেখেনি প্রাণের সাগর ঢেউ।

বিশ্বাস করো এক আল্লাতে প্রতি নিঃশ্বাসে দিনে রাতে,
হবে দুলদুল - আসওয়ার পাবে আল্লার তলোয়ার হাতে।
আলস্য আর জড়তায় যারা ঘুমাইতে চাহে রাত্রিদিন,
তাহারা চাহে না চাঁদ ও সূর্য্য, তারা জড় জীব গ্লানি-মলিন।

নিত্য সজীব যৌবন যার, এস এস সেই নৌ-জোয়ান
সর্ব-ক্লৈব্য করিয়াছে দূর তোমাদেরই চির আত্বদান!
ওরা কাদা ছুড়ে বাঁধা দেবে ভাবে - ওদের অস্ত্র নিন্দাবাদ,
মোরা ফুল ছড়ে মারিব ওদের, বলিব - 'এক আল্লাহ জিন্দাবাদ'।

17/02/2021

হিন্দু-মুসলিম দুটি ভাই
ভারতের দুই আঁখি তারা
এক বাগানে দুটি তরু দেবদারু আর কদম চারা।।

যেন গঙ্গা সিন্ধু নদী
যায় গো বয়ে নিরবধি
এক হিমালয় হতে আসে, এক সাগরে হয় গো হারা।।

বুলবুল আর কোকিল পাখী
এক কাননে যায় গো ডাকি,
ভাগীরথী যমুনা বয় মায়ের চোখের যুগল ধারা।।

ঝগড়া করে ভায়ে ভায়ে
এক জননীর কোল লয়ে
মধুর যে এ কলহ ভাই পিঠোপিঠী ভায়ের পারা।।

পেটে ধরা ছেলের চেয়ে চোখে ধরারা মায়া বেশী,
অতিথী ছিল অতীতে, আজ সে সখা প্রতিবেশী।
ফুল পাতিয়ে গোলাপ বেলী
একই মায়ের বুকে খেলি,
পাগলা তা'রা আল্লা ভগবানে ভাবে ভিন্ন যারা।।

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16/02/2021

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