27/04/2026
विकास भवन या 'प्यास' का रेगिस्तान? रायबरेली के अधिकारियों की संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार!
आज जनपद रायबरेली के उस 'विकास भवन' की पड़ताल की जहाँ से पूरे जिले की किस्मत लिखी जाती है। विडंबना देखिए, जिस भवन में जिले के विकास का खाका तैयार होता है, वहाँ आने वाली गरीब और मजबूर जनता के लिए एक घूँट ठंडे पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
अधिकारी अपने एयर कंडीशन (AC) कमरों में बैठकर फाइलों पर विकास की मुहर लगा रहे हैं, जबकि बाहर 45 डिग्री की चिलचिलाती धूप में जनता पानी के लिए भटक रही है। चाणक्य नीति कहती है कि जहाँ प्रजा दुखी हो, वह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक सकती। यह रिपोर्ट प्रशासन की उसी लापरवाही और 'लूट तंत्र' के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी है।
क्या रायबरेली का प्रशासन इतना लाचार है कि एक सार्वजनिक प्याऊ नहीं लगवा सकता? या फिर कमीशन के खेल में जनता की प्यास को नजरअंदाज किया जा रहा है?
प्रशासन से हमारे सीधे सवाल:
विकास भवन में सार्वजनिक पेयजल की व्यवस्था शून्य