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पटना हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी को केवल आपत्तिजनक स...
07/09/2026

पटना हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी को केवल आपत्तिजनक स्थिति में देखने मात्र से व्यभिचार (व्यभिचार/अनैतिक संबंध) सिद्ध नहीं होता। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने मधुबनी के फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पति की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक स्थिति में होना और वास्तव में शारीरिक संबंध बनाना दो अलग बातें हैं। ठोस सबूतों और शिकायतों के अभाव में केवल आरोपों के आधार पर वैवाहिक संबंधों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

◆मामले का बैकग्राउंड और पति के आरोप
विवाह और संतान: जोड़े का विवाह 2 जुलाई 2006 को हुआ था और वर्ष 2010 में उनका एक बेटा हुआ।

◆व्यभिचार का आरोप: पति ने दावा किया कि बच्चे के जन्म के बाद उनकी पत्नी ने अपने जीजा के साथ अवैध संबंध बनाए।

◆आपत्तिजनक स्थिति का दावा: अपीलकर्ता का कहना था कि उसने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देखा था।

◆पुलिस शिकायत का अभाव: कोर्ट ने पाया कि घटना के बाद पति ने न पुलिस में शिकायत की, न सनहा दर्ज कराया और न ही रिश्तेदारों को सूचित किया।

●पति के आरोपों पर पत्नी ने क्या कहा?
पति के दावों को खारिज करते हुए पत्नी ने अदालत में कहा कि उस पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और बनावटी हैं। उसने तर्क दिया कि इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना स्वयं में मानसिक क्रूरता के समान है। इसके साथ ही पत्नी ने पति पर जहर देकर मारने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया।

●सबूतों के बिना आरोप मान्य नहीं: हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत में केवल आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन्हें साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने पड़ते हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आपत्तिजनक परिस्थिति में पाए जाने और यौन संबंध स्थापित होने के बीच स्पष्ट अंतर होता है, जिसे बिना साक्ष्य स्वीकार नहीं किया जा सकता।

●पारिवारिक अदालत का रुख कायम......
हाईकोर्ट ने मधुबनी फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक स्थिति में होना और यौन संबंध बनाना दो अलग बातें हैं। अदालत ने कहा कि पति अपनी पत्नी के खिलाफ व्यभिचार और क्रूरता के आरोपों को साबित करने के लिए कोई वैधानिक या ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है, इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।

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Patna High Court
Patna

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