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Supreme Court ने Allahabad High Court के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एक नाबालिग पीड़िता के ...
19/02/2026

Supreme Court ने Allahabad High Court के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एक नाबालिग पीड़िता के स्तन पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे घसीटने की कोशिश करना, रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट की दलील से असहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप महज़ तैयारी से आगे बढ़कर हैं और इन्हें रेप की कोशिश माना जा सकता है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 के अपने आदेश में कहा था, “आरोपी पवन और आकाश पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के स्तन पकड़े और आकाश ने उसका निचले वस्त्र उतारने की कोशिश की. इस उद्देश्य से उन्होंने उसके कपड़ों का नाड़ा तोड़ा और उसे पुलिया के नीचे घसीटने की कोशिश की, लेकिन गवाहों के हस्तक्षेप के कारण वे पीड़िता को छोड़कर मौके से फरार हो गए. यह तथ्य इस निष्कर्ष के लिए पर्याप्त नहीं है कि आरोपियों ने पीड़िता के साथ रेप करने का निश्चय कर लिया था, क्योंकि इन तथ्यों के अलावा उनके खिलाफ ऐसा कोई अन्य कृत्य आरोपित नहीं है, जिससे रेप की कथित मंशा को आगे बढ़ाने की बात साबित हो.”

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया और उस पर रोक लगा दी. 10 फरवरी को अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया, हालांकि जजों के लिए कोई नई गाइडलाइंस जारी करने से इनकार किया.

High Court: होटल में पति-पत्नी की तरह रहे, तो क्या यह रेप है? हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- आपसी सहमति को आपराधिक रंग नह...
18/02/2026

High Court: होटल में पति-पत्नी की तरह रहे, तो क्या यह रेप है? हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- आपसी सहमति को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता.....
यौन अपराधों की दलीलों और सहमति के सपने पर एक अहम और नजीर कायम करने वाला फैसला हाई कोर्ट ने सुनाया है
High Court: यौन अपराधों की दलीलों और सहमति के सपने पर एक अहम और नजीर कायम करने वाला फैसला सुनाते हुए कोलकता हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी रिश्ते में बाद में कड़वाहट आ जाए या शादी मुकम्मल न हो पाए, तो मात्र इस आधार पर पूर्व में बने आपसी सहमति के शारीरिक संबंधों को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि धारा 376 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि अभियोजन यह प्रदर्शित करे कि संबंध की शुरुआत से ही आरोपी का इरादा धोखाधड़ी का था अर्थात उसने शादी का झूठा वादा केवल यौन संबंध बनाने के उद्देश्य से किया हो। यदि प्रारंभिक अवस्था में कपटपूर्ण मंशा सिद्ध नहीं होती, तो बाद में संबंध टूट जाने मात्र से सहमति का स्वरूप आपराधिक नहीं हो जाता।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, दोनों वयस्कों के बीच वर्ष 2017 से 2022 तक संबंध कायम रहा। इस दौरान वे दीघा, पार्क स्ट्रीट, खड़गपुर और गोवा जैसे स्थानों पर साथ ठहरे, होटल में रहे और पति-पत्नी की भांति जीवन व्यतीत किया। न्यायालय ने यह भी संज्ञान में लिया कि महिला गर्भवती हुईं और दोनों पक्षों की सहमति से गर्भपात कराया गया।

पीठ ने कहा कि यदि वास्तव में धोखे या जबरन उकसावे का तत्व मौजूद होता, तो पीड़िता तत्काल या समुचित समय पर शिकायत दर्ज करातीं। किन्तु रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंध कई वर्षों तक स्वेच्छा से चलता रहा। अदालत ने टिप्पणी की कि “सिर्फ इसलिए कि वादा-ए-शादी पूरा नहीं हुआ, आपसी सहमति को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।”

मामले में महिला ने वर्ष 2022 में पश्चिम मिदनापुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके पश्चात आरोपी की गिरफ्तारी हुई। हालांकि, हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और व्यवहारिक परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

यह फैसला सहमति और कपटपूर्ण प्रलोभन के बीच महीन लेकिन अहम अंतर को रेखांकित करता है।

31/01/2026

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क्या कोर्ट की मदद से भी किया जा ...भारत में संपत्ति के बंटवारे के लिए कोर्ट की प्रक्रिया लंबी और कानूनी रूप से जटिल हो स...
27/01/2026

क्या कोर्ट की मदद से भी किया जा ...भारत में संपत्ति के बंटवारे के लिए कोर्ट की प्रक्रिया लंबी और कानूनी रूप से जटिल हो सकती है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से 'पार्टीशन सूट' (Partition Suit) के अंतर्गत आती है, जिसमें वकील के माध्यम से सिविल कोर्ट में वाद दायर किया जाता है। यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें 3 से 5 साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
बंटवारा के लिए कोर्ट की प्रक्रिया के प्रमुख चरण:
कानूनी नोटिस भेजना: मुकदमा दायर करने से पहले, अन्य सभी सह-स्वामियों (Co-owners) को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजकर बंटवारे की मांग की जाती है।
सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करना (Partition Suit): यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिले, तो एक सिविल वकील के माध्यम से संबंधित जिले के सिविल कोर्ट में पार्टीशन सूट दायर किया जाता है।
आवश्यक दस्तावेज: वादी को अपनी दावेदारी साबित करने के लिए संपत्ति के कागजात जैसे कि सेल डीड (केवाला), खतियान, वंशावली (Family Tree), और अन्य साक्ष्य जमा करने होते हैं।
कोर्ट की सुनवाई: कोर्ट सभी पक्षकारों को समन भेजकर कोर्ट में बुलाती है।
प्रारंभिक डिग्री (Preliminary Decree): कोर्ट सभी सबूतों की जांच कर यह तय करती है कि किस हिस्सेदार का कितना हिस्सा बनता है।
अंतिम डिग्री (Final Decree): यदि संपत्ति को भौतिक रूप से विभाजित किया जा सकता है, तो कोर्ट एक कमिश्नर नियुक्त कर संपत्ति का बंटवारा कराती है और फाइनल डिग्री जारी कर, मालिकाना हक और कब्जा दिलाती है।

⚠️ सावधान! बिना रजिस्ट्री के हड़पी जा रही है आपकी जमीन — कागजों में मालिक बदलने का खतरनाक खेल उजागर ⚠️बिहार समेत कई राज्...
30/12/2025

⚠️ सावधान! बिना रजिस्ट्री के हड़पी जा रही है आपकी जमीन — कागजों में मालिक बदलने का खतरनाक खेल उजागर ⚠️

बिहार समेत कई राज्यों में फर्जी जमाबंदी का बड़ा रैकेट सक्रिय

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट | सीवान, बिहार

अगर आपके नाम की जमीन अचानक किसी और के नाम सरकारी रिकॉर्ड में दिखने लगे, तो चौंकिए मत — यह आज के दौर का सबसे खतरनाक भूमि घोटाला बन चुका है।
बिना किसी रजिस्ट्री, बिना बिक्री पत्र, सिर्फ मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के दम पर जमीन की जमाबंदी कटवा ली जा रही है, और असली मालिक को भनक तक नहीं लगती।

🟥 कैसे हो रही है जमीन की लूट?

सूत्रों के मुताबिक, भू-माफिया और दलाल:

पुराने खातियान या नकली कागज तैयार करते हैं

राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत कर

अवैध दाखिल-खारिज (Mutation) करवा लेते हैं

फिर सरकारी रसीद कटते ही खुद को “कानूनी मालिक” बताने लगते हैं

कई मामलों में असली मालिक को तब पता चलता है, जब:

जमीन बेचने जाते हैं

बैंक लोन के लिए आवेदन करते हैं

या जमीन पर कब्जा होने लगता है

⚖️ कानून क्या कहता है?

कानूनी भाषा में इसे कहा जाता है:
👉 फर्जी जमाबंदी (Fake Jamabandi)
👉 अवैध दाखिल-खारिज

⚠️ स्पष्ट नियम:
बिना रजिस्ट्री (Sale Deed / Gift Deed) के कोई भी जमाबंदी पूरी तरह अवैध और शून्य है।

---

🔥 अगर आपकी जमीन हड़प ली गई है तो घबराएं नहीं — ये हैं सीधे और सख्त कानूनी हथियार

✅ 1. जमाबंदी रद्द कराएं (Jamabandi Cancellation)

अपर समाहर्ता (Additional Collector) के यहां केस दर्ज कराएं

साबित करें कि विपक्षी के पास कोई वैध रजिस्ट्री नहीं है

अंचलाधिकारी (CO) को लिखित शिकायत दें

✅ 2. कब्जा हटाने के लिए कोर्ट जाएं

सिविल कोर्ट में टाइटल सूट दाखिल करें

तुरंत स्टे ऑर्डर (Temporary Injunction) लें

निर्माण, बिक्री या कब्जा पर रोक लगवाएं

✅ 3. FIR कराएं — यह सीधा अपराध है

यह सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि:

धोखाधड़ी

जालसाजी

सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर

इन धाराओं में केस बनता है:
👉 BNS 2023 (पहले IPC)
👉 दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माना दोनों संभव

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📂 जरूरी दस्तावेज क्या रखें?

पुराने असली कागजात / रजिस्ट्री

फर्जी जमाबंदी या रसीद की कॉपी

वंशावली (अगर पैतृक जमीन है)

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🚨 सबसे बड़ा सवाल: क्या आपकी जमीन सुरक्षित है?

मुजफ्फरपुर के कांटी में सरकारी बीज प्रक्षेत्र की जमीन निजी व्यक्ति के नाम करने पर बड़ी कार्रवाई। मंत्री विजय सिन्हा ने CO...
29/12/2025

मुजफ्फरपुर के कांटी में सरकारी बीज प्रक्षेत्र की जमीन निजी व्यक्ति के नाम करने पर बड़ी कार्रवाई। मंत्री विजय सिन्हा ने CO को सस्पेंड कर जांच के आदेश दिए हैं।

कानूनी नोटिस मिलने पर क्या करें अधिकार, प्रक्रिया और सावधानियाँ:-अक्सर लोग कानूनी नोटिस मिलने पर घबरा जाते हैं नोटिस मिल...
07/12/2025

कानूनी नोटिस मिलने पर क्या करें अधिकार, प्रक्रिया और सावधानियाँ:-

अक्सर लोग कानूनी नोटिस मिलने पर घबरा जाते हैं नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं कि आप दोषी हैं कानूनी नोटिस केवल सूचना देने और जवाब मांगने का माध्यम है इसे समय पर और सही तरीके से संभालना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी परेशानी न हो।

1-कानूनी नोटिस क्या है?

कानूनी नोटिस वह पत्र होता है जिसे किसी व्यक्ति, कंपनी या संगठन को भेजा जाता है इसमें बताया जाता है कि
किसी विषय पर आपके खिलाफ शिकायत या दावा है
आपसे जवाब, स्पष्टीकरण या कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है
जवाब न देने पर आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं

यह प्रारंभिक प्रक्रिया है और अदालत से पहले समाधान का मौका देती है।

2-नोटिस मिलने पर तुरंत क्या करें?

नोटिस को ध्यान से पढ़ें
उसमें बताए गए तारीख और विषय को समझें
अपनी स्थिति और दावे का विश्लेषण करें
किसी भी कदम से पहले वकील से सलाह लें

3-नोटिस का जवाब कैसे दें?

उत्तर लिखित रूप में देना बेहतर होता है
स्पष्ट रूप से अपना पक्ष बताएं
किसी भी तथ्य या दस्तावेज़ को प्रमाण के साथ जोड़ें
अपने जवाब में सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें
समय सीमा का पालन करना अत्यंत आवश्यक है

4-क्या नोटिस को नजरअंदाज किया जा सकता है?

कानूनी दृष्टि से नहीं।

नजरअंदाज करने पर नोटिस देने वाला व्यक्ति अदालत में इसे आधार बना सकता है

आगे की कानूनी कार्रवाई जैसे मुकदमा या आवेदन शुरू हो सकता है

इसलिए नोटिस को गंभीरता से लेना और समय पर जवाब देना जरूरी है

5-नोटिस मिलने पर अधिकार और सावधानियाँ

आपसे सीधे भय या धमकी नहीं दी जा सकती
जवाब देते समय हमेशा तथ्यों और दस्तावेज़ों के साथ रहें
किसी भी दस्तावेज़ को झूठा या गलत न बताएं
नोटिस मिलने के तुरंत बाद वकील से सलाह लेना सुरक्षा और सही दिशा देता है

6-नोटिस का सकारात्मक पहलू

यह विवाद को जल्दी हल करने का मौका देता है
अदालत या मुकदमे से पहले समाधान संभव बनता है
दस्तावेज और साक्ष्य तैयार रखने का अवसर मिलता है
कानूनी स्थिति और अधिकार स्पष्ट हो जाते हैं

निष्कर्ष-
कानूनी नोटिस मिलने पर घबराना या नजरअंदाज करना समस्या बढ़ा सकता है सही तरीका यह है कि पढ़ें, समझें, दस्तावेज़ तैयार करें और समय पर लिखित उत्तर दें यह प्रक्रिया आपके अधिकारों की रक्षा करती है और विवाद को जल्दी हल करने में मदद करती है।

किराएदारों को बड़ी राहत! अब रेंट पर घर लेना होगा आसान, सरकार ने बदले नियम, जानें डिपॉजिट लिमिट समेत हर डिटेल। https://su...
02/12/2025

किराएदारों को बड़ी राहत! अब रेंट पर घर लेना होगा आसान, सरकार ने बदले नियम, जानें डिपॉजिट लिमिट समेत हर डिटेल। https://surl.li/tfctpt

न्यायमूर्ति सूर्यकांत सर को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। मुझे पूर्ण विश्वास ...
24/11/2025

न्यायमूर्ति सूर्यकांत सर को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल मार्गदर्शन में न्यायपालिका सर्वसुगम और सर्वसुलभ न्याय के नए आयाम स्थापित करेगी।

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शादी मे एक दिन बचा था। लड़के ने लड़की को फोन किया "सुनो मै यह कह रहा था कि अपने पापा से बोलो ऑल्टो गाड़ी की जगह थार दे द...
22/11/2025

शादी मे एक दिन बचा था। लड़के ने लड़की को फोन किया "सुनो मै यह कह रहा था कि अपने पापा से बोलो ऑल्टो गाड़ी की जगह थार दे दे। थार होगी तो हमारे मजे हो जायेगें। दोनों घूमेंगे। " लड़की बोली " पागल हो क्या?" पापा ऑल्टो के पैसे ही मुश्किल से मैनेज कर पाए है। थार कहाँ दे पायेगें? " लड़का बोला " मै नही जानता कैसे मैनेज करेंगे मगर मुझे थार चाहिए। मेरी शादी बार बार थोड़े होगी। सरकारी नौकरी वाले हर लड़के को बढ़िया गाड़ी मिलती है। मुझे भी चाहिए" उसके बाद काफी देर तक दोनों मे बहस होती रही। अंत मे लड़की बोली " ठीक है मै बात करती हूँ। कुछ देर बाद लड़की का फोन आया कि ठीक है पापा थार देने के लिए राजी हो गए हैं।" जब लड़का बारात लेकर पहुंचा तो उसे पता चला लड़की की शादी दूसरे लड़के के साथ हो रही है। लड़का उनके घर जाकर हंगामा करने लगा तो लड़की वालों ने पुलिस बुलाली। पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई गई। और दहेज मांगने का मुकदमा लग गया। अब उधर लड़की के फेरे दूसरे लड़के से हो रहे थे। उधर सरकारी दुल्हे राजा लोकप् मे मच्छरों से लड़ते हुए सोच रहा था कि ऑल्टो ही ठीक थी। थोड़े दिन सबर कर लेता तो थार खुद के पैसों से खरीद लेता। अब तो थार के चक्कर मे सरकारी नौकरी जाने के चांस हो गए थे। क्या लड़की वालों ने सही किया?? कमेंट्स मे बताइयेगा। एक सत्य घटना पर आधारित।

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