पुरूष आयोग के गठन पर विचार

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पुरूष आयोग के गठन पर विचार महिला आयोग की तरह पुरूष आयोग का गठन हो?

28/07/2026

सेल्फ-रिस्पेक्ट गंवाने के डर से शिकायत नहीं कर पाते कई संस्थाओं के सर्वे के मुताबिक ज्यादातर पुरुष सेल्फ रिस्पेक्ट के चलते अपनी पत्नी की शिकायत नहीं कर पाते। अगर कोई हिम्मत कर पुलिस को शिकायत करता भी है, तो अक्सर पुलिस ही उसे धमका देती है। वैवाहिक जीवन में पुरुष किस तरह प्रताड़ित होते है इसका उदाहरण प्रशासनिक व्यवस्था के बड़े ओहदों पर बैठे पुरुषों के मामले में भी देखने को मिला। केस- 1 साल 2018 में कानपुर के पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) के पद पर तैनात रहे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सुरेंद्र कुमार दास की जहरीला पदार्थ खाने के कारण मौत हो गई। जांच में घरेलू कलह के कारण आत्महत्या की बात सामने आई। केस- 2 साल 2017 में बिहार के आइएएस अधिकारी मुकेश कुमार ने पत्नी से विवाद के कारण गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से कटकर अपनी जान दे दी थी। सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अपनी पत्नी और अपने मां-बाप के बीच हो रहे झगड़े से बेहद परेशान थे। घरेलू हिंसा से सुरक्षा अधिनियम पुरुष को नहीं देता सुरक्षा? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट की मानें तो महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा आत्महत्या करते हैं। इसकी एक मुख्य वजह परिवार में चल रही कलह और रिश्तों से उपजा डिप्रेशन भी है। वहीं, साल 2019 में 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' की रिसर्च के अनुसार हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में 21-49 वर्ष की उम्र के एक हजार विवाहित पुरुषों में से 52.4 फीसद ने जेंडर आधारित हिंसा का अनुभव किया। इन आकड़ों को देख लगता है कि जब संविधान लिंग, जाति और धर्म के आधार पर किसी तरह का फर्क स्वीकार नहीं करता, तो क्यों घरेलू हिंसा से सुरक्षा अधिनियम पुरुष को सुरक्षा नहीं देता? जबकि विकसित देशों में जेंडरलेस कानून वहां के पुरुषों को न केवल महिलाओं की तरह घरेलू हिंसा से प्रोटेक्शन देता है, बल्कि इस बात को भी स्वीकार करता है कि पुरुष भी प्रताड़ित होते हैं।

28/07/2026

साल 2018 में व्हेन वाइफ बीट देयर हसबैंड, नो वन वांट्स टु बिलीव इट नामक शीर्षक से प्रकाशित लेख में कैथी यंग ने कई रिसर्च का जिक्र किया। इससे ये पुष्टि हुई कि वायलेंट रिलेशनशिप में महिलाओं के एग्रेसिव होने की आशंका पुरुषों जितनी ही है। क्या कहता है डेटा वैसे तो, भारत में ऐसा कोई सरकारी आकंड़ा नहीं मिला, जिससे घरेलू हिंसा में शिकार पुरुषों का पता चल सके। लेकिन पुरुषों के अधिकारों के लिए कार्यरत कुछ संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन की ओर से टेलीफोनिक सर्वे किया गया। इस दौरान इंदौर की पौरुष संस्था और राष्ट्रीय पुरुष आयोग समन्वय समिति दिल्ली को भी पुरुष हेल्पलाइन पर कई शिकायतें मिली। इसमें पाया गया कि लॉकडाउन के दिनों में पत्नियों द्वारा अपने पतियों को प्रताड़ित करने के मामलों में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई क्योंकि कई पुरुष काम छोड़कर घर पर बैठने गए, या फिर ऑफिस बंद होने से वर्क फ्रॉम होम करने लगे। ऐसे में वे पत्नियों के रवैये से डिप्रेशन में रहने लगे।

28/07/2026

आपसी सहमति से अलग होना: अगर पति शारीरिक या अत्यधिक मानसिक उत्पीड़न का शिकार है, तो वह क्रूरता (Cruelty) के आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक की याचिका दायर कर सकता है l

28/07/2026

दहेज के झूठे मामलों से बचाव: सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों (जैसे राजेश शर्मा बनाम स्टेट ऑफ यूपी) में 498A (वर्तमान में BNS धारा 85) के दुरुपयोग पर चिंता जताई है और निर्देश दिए हैं कि निर्दोष पतियों और उनके परिवारों को अनावश्यक गिरफ्तारी व उत्पीड़न से बचाया जाए l

28/07/2026

समान सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाया था कि शारीरिक हिंसा या नुकसान के मामलों में लिंग निर्णायक नहीं हो सकता कानून के तहत पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान संरक्षण का अधिकार है अदालत ने माना था कि एक लिंग को सुरक्षा दूसरे लिंग की कीमत पर नहीं दी जा सकती l

28/07/2026

क्रूरता के आधार पर तलाक: दिल्ली हाईकोर्ट और अन्य अदालतों ने माना है कि अगर पत्नी लगातार झूठे पुलिस केस करती है, पति को अपमानित करती है, या बिना वजह परिवार से अलग रहने का दबाव बनाती है, तो इसे 'मानसिक क्रूरता' माना जाएगा (उदा. समर घोष बनाम जया घोष और के. श्रीनिवास राव बनाम डी.ए. दीपा)।

28/07/2026

महिलाओं द्वारा पुरुषों पर अत्याचार के मामले केवल 6 प्रतिशत हैं। पहले ऐसे मामले लगभग 1 प्रतिशत थे, जो अब बढ़कर 6 प्रतिशत हो गए हैं और लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

27/07/2026

झुठा आरोप

27/07/2026

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