अंशुमान दीक्षित एडवोकेट LL.M.

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अंशुमान दीक्षित एडवोकेट LL.M. Anshuman Dixit Advocate LL.M working in Orai District and session court Orai

498A में सिर्फ सामान्य आरोपों से नहीं बनेगा केससुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति के रिश्तेदारों के खिलाफ केवल सामान्य ...
26/05/2026

498A में सिर्फ सामान्य आरोपों से नहीं बनेगा केस

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति के रिश्तेदारों के खिलाफ केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है।
धारा 498A के तहत कार्यवाही तभी चलेगी जब रिश्तेदारों की विशिष्ट भूमिका और क्रूरता का इरादा साबित हो।
⚖️ Citation: 2025 INSC 1168 / 2025 SCO.LR 10(1)[
फैसला: 26 सितंबर 2025

19/05/2026
📌 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए एक आरोपी को बरी करते हुए भारतीय आपराधिक न्या...
19/05/2026

📌 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए एक आरोपी को बरी करते हुए भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में ‘Hostile Witness’ यानी विरोधी गवाह की भूमिका को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि यदि किसी होस्टाइल गवाह की गवाही रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य साक्ष्यों से मेल खाती है और विश्वसनीय प्रतीत होती है, तो उसका उपयोग अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करने और आरोपी को राहत देने के लिए भी किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस तरह ऐसे गवाहों के बयान के आधार पर दोषसिद्धि हो सकती है, उसी तरह उचित परिस्थितियों में उन्हीं बयानों के आधार पर बरी भी किया जा सकता है।

✅ इस मामले में आरोपी को IPC की धारा 302 और 323 के साथ-साथ SC/ST Act की धाराओं 3(2)(v) और 3(1)(x) के तहत उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। ट्रायल कोर्ट और बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपने ही गवाहों के विरोधाभासी बयानों के कारण पूरी तरह कमजोर पड़ गया। अदालत ने कहा कि घटना के वास्तविक स्थान को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया था और अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि घटना वास्तव में उसी तरह हुई थी जैसा दावा किया गया।

✅ कोर्ट ने यह भी गौर किया कि घटना कथित रूप से एक व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर हुई थी, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही रहती थी, फिर भी किसी स्वतंत्र गवाह को पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इतने कमजोर और टूटते हुए सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के फैसलों को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

✅ यह फैसला भविष्य के आपराधिक मामलों में Hostile Witnesses की गवाही के मूल्यांकन को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

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⚖️ महत्वपूर्ण फैसला : 🚨 सिर्फ FIR दर्ज होने से Arms License रद्द नहीं किया जा सकता📌 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले ...
30/04/2026

⚖️ महत्वपूर्ण फैसला : 🚨 सिर्फ FIR दर्ज होने से Arms License रद्द नहीं किया जा सकता

📌 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा है कि केवल FIR (प्राथमिकी) के आधार पर किसी व्यक्ति का आर्म्स लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता।

🔍 कोर्ट का स्पष्ट मत:
✔️ जब तक FIR में हथियार के दुरुपयोग (misuse) का स्पष्ट आरोप न हो
✔️ या हथियार चलाने/गलत इस्तेमाल का उल्लेख न हो
👉 तब तक प्रशासन लाइसेंस रद्द नहीं कर सकता

📖 महत्वपूर्ण बातें:
➡️ सिर्फ FIR लाइसेंस रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं है
➡️ दुरुपयोग का ठोस आरोप होना जरूरी है
➡️ प्रशासन को कानून के दायरे में रहकर कार्यवाही करनी होगी
➡️ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है

⚖️ Case: Aman Ullah vs State of UP
📅 Decision Date: 07/04/2026

💬 यह फैसला सुनिश्चित करता है कि बिना ठोस आधार के किसी के वैध अधिकारों का हनन न हो।

👨‍⚖️ अंशुमान दीक्षित एडवोकेट LL.M. Advocate
📍 इलाहाबाद High Court प्रयागराज

✨ न्याय सबके लिए, अधिकार सबका

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने CBI के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के पूर्व ACP वीके पांडे को 3 महीना कारावास की स...
29/04/2026

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने CBI के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के पूर्व ACP वीके पांडे को 3 महीना कारावास की सजा सुनाई है !!

मामला 19 अक्तूबर 2000 को पूर्व IRS अधिकारी अशोक अग्रवाल के घर पर की गई कार्रवाई से जुड़ा है। वह उस वक्त ED के उपनिदेशक थे।

कोर्ट ने माना कि दोनों अफसरों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया। घर का गेट तोड़ा, फैमिली को कमरे में बंद किया।

28/04/2026

📌📌 केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य' में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला. ये वो केस था जिसने हमें याद दिलाया कि सरकारें संविधान से ऊपर नहीं हो सकती हैं l

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) भारत के कानूनी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मामला है, जिसने "संविधान की मूल संरचना" (Basic Structure) के सिद्धांत को जन्म दिया।

♦️♦️. फैसला: 24 अप्रैल, 1973।
बेंच: 13 न्यायाधीशों की अब तक की सबसे बड़ी संवैधानिक पीठ (फैसला 7-6 के बहुमत से आया)।
सुनवाई: यह मामला लगातार 68 दिनों तक चला।

केरल के अडनीर मठ के प्रमुख स्वामी केशवानंद भारती ने केरल सरकार के भूमि सुधार कानूनों को चुनौती दी थी, जिसके तहत मठ की संपत्ति का अधिग्रहण किया जा रहा था। उन्होंने तर्क दिया कि यह धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 26) और संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है।
💢 मूल संरचना का सिद्धांत (Basic Structure Doctrine): सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि संसद के पास संविधान में संशोधन करने की शक्ति (अनुच्छेद 368 के तहत) तो है, लेकिन वह संविधान की "मूल संरचना" या "आधारभूत ढांचे" को बदल या नष्ट नहीं कर सकती।

💢 इस फैसले ने संसद ने स्पष्ट किया कि संसद द्वारा किए गए किसी भी संवैधानिक संशोधन की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता।

💢 यह फैसला आज भी भारतीय लोकतंत्र का "सुरक्षा कवच" माना जाता हैl

23/04/2026

#बारह_सावधानियाँ,,,
1-अपनी जगह ज़मीन की बाउंडरी करवा लें।
2_बार बार खसरा खतौनी चेक करते रहे।
3-थोड़ी बहुत राजनीतिक पकड़ बना ले। भले ही निमंत्रण छूट जायें। मगर रात्रि में मोटरसाइकिल से न्योता न करे।
4-डॉक्टर के सम्पर्क में रहे। साल में एक बार बॉडी चेकअप कराते रहे। पैसा बांधकर साथ में नही ले जायेंगे।
5-वायरल फीवर फैला है। डॉक्टर से मिले। खुद ही पैरासिटामोल न ढकेलते रहे। नीम,चिरायता,गिलोय बाद में पहले तुरंत आराम के लिए एलोपैथ के डॉक्टर्स से मिले।
6-तेल ही लगभग सभी बीमारियों की जड़ है। कोल्ड प्रेस्ड मस्टर्ड ऑयल का प्रयोग करें।
7-वेज/नॉनवेज के चक्कर मे न पड़े जो डॉक्टर बोले,,उसका पालन करें। अगर कट्टर सनातनी है तो प्रोटीन के लिए डेयरी प्रोडक्ट आदि का प्रयोग करे। सत्तुवा सस्ता विकल्प है।मौसमी फल लेते रहे।
8-तीन मित्र,तीन रिश्तेदार,,अड़ोसी पड़ोसी से मित्रवत संबंध रखे और घर मे दस बीस हजार की नकदी भी रखें।
9-रसूखदार लोगो से दुआ,सलाम बनाकर रखें..लेकिन उनकी बराबरी(बुंदेलखंडी में सेंग) कभी न करे।
बीबी से सभी बात शेयर न करे। गुप्त बात किसी को न बताये,,, बिना मतलब न पड़ी लकड़ी न उठाएं,,😀
10-सत्तापक्ष के लोगो से दुश्मनी मोल न ले। सोशल मीडिया पर जाति धर्म की टिप्पणी से बचे। बच्चों पर निगरानी रखे। जींवन का ख़ूब एन्जॉय करें।
11- किसी बहुत काबिल ईमानदार मेहनती वकील से अच्छे संबंध अवश्य रखें पता नही कब आप सच्चे/झूठे कोर्ट कचहरी मुकदमें बाजी में फंस जाएं..जब पूरी दुनिया काम नही आती तब वो ही काम आता है।
12- साथ ही साथ भगवत स्मरण अवश्य करते रहें। याद रखे,,,आपका बुलाबा कभी भी आ सकता है..😀😀

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां यूपी पुलिस मुख्यालय ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने और झूठी गवाही देने वालो...
23/04/2026

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां यूपी पुलिस मुख्यालय ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े पहले जारी सर्कुलर को फिलहाल वापस ले लिया है. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों पर रोक लगा दी गई है.

डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 मार्च 2026 को जारी किए गए उस सर्कुलर को निरस्त कर दिया है, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि झूठी एफआईआर पाए जाने पर शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ अनिवार्य रूप से कोर्ट में परिवाद दाखिल किया जाएगा. साथ ही, कार्रवाई न करने पर संबंधित विवेचक, थाना प्रभारी और पर्यवेक्षण अधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराने का प्रावधान रखा गया था.

नए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘उम्मे फरवा बनाम राज्य सरकार’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगाई है. कोर्ट ने अपने 9 फरवरी के आदेश में साफ कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के पैरा 45 से 48 तक की व्यवस्था अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी. इन्हीं निर्देशों के आधार पर पहले जारी सर्कुलर को लागू किया गया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उसे वापस ले लिया गया है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिलहाल झूठी एफआईआर और गवाही को लेकर पहले जैसी सख्त प्रक्रिया लागू नहीं होगी और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद तय की जाएगी.

🔥 “सिर्फ साइन किया है? फिर भी आपसुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए साफ कर दिया है कि— 👉 अगर आपने चेक पर साइन कर दिया...
21/04/2026

🔥 “सिर्फ साइन किया है? फिर भी आपसुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए साफ कर दिया है कि— 👉 अगर आपने चेक पर साइन कर दिया है, तो आप उसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, चाहे बाकी डिटेल्स (Amount/Date) किसी और ने भरी हों।

(📌 Case: Oriental Bank of Commerce vs. Prabodh Kumar Tewari)

⚖️ क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

✅ Signature = Liability एक बार Drawer (चेक देने वाला) अपने सिग्नेचर स्वीकार कर लेता है, तो यह मायने नहीं रखता कि चेक की बाकी जानकारी किसने भरी।
✅ Section 139 NI Act – Presumption कानून यह मानकर चलता है कि चेक किसी वैध देनदारी (legally enforceable debt) के लिए दिया गया है। 👉 इसे “Reverse Onus” कहा जाता है — यानी आरोपी को खुद यह साबित करना होगा कि कोई देनदारी नहीं थी।
✅ Handwriting Expert Report पर्याप्त नहीं अगर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट यह कहे कि चेक की बॉडी किसी और ने लिखी है, तो भी इससे यह साबित नहीं होता कि च

12/04/2026

⚖️ आम आदमी के लिए कोर्ट-कचहरी का बेसिक ज्ञान ⚖️

आज के समय में हर व्यक्ति को कानून और कोर्ट की थोड़ी बहुत जानकारी होना बहुत जरूरी है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कोर्ट-कचहरी में क्या-क्या होता है 👇

🔹 1. कोर्ट क्या होता है?कोर्ट वह जगह है जहाँ न्याय (Justice) दिया जाता है। यहाँ जज (Judge) दोनों पक्षों की बात सुनकर फैसला देते हैं।

🔹 2. केस (Case) क्या होता है?जब किसी विवाद (जमीन, पैसा, मारपीट, पारिवारिक मामला आदि) को न्याय के लिए कोर्ट में ले जाया जाता है, उसे केस कहते हैं।

🔹 3. केस के प्रकार👉 सिविल केस (Civil Case): जमीन, पैसा, प्रॉपर्टी, परिवार से जुड़े मामले👉 क्रिमिनल केस (Criminal Case): चोरी, मारपीट, हत्या जैसे अपराध

🔹 4. FIR क्या होती है?जब कोई अपराध होता है तो पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज होती है, उसे FIR (First Information Report) कहते हैं।

🔹 5. वकील (Advocate) का कामवकील आपका केस लड़ता है, कानून की जानकारी देता है और कोर्ट में आपकी तरफ से दलील रखता है।

🔹 6. जज (Judge) का रोलजज पूरी सुनवाई के बाद कानून के अनुसार फैसला देते हैं।

🔹 7. तारीख पर क्या होता है?हर तारीख पर केस की सुनवाई होती है—कभी बहस, कभी गवाही, कभी दस्तावेज पेश होते हैं।

🔹 8. बेल (Bail) क्या होती है?अगर किसी को गिरफ्तार किया गया है तो उसे अस्थायी रूप से रिहा करने की प्रक्रिया बेल कहलाती है।

🔹 9. गवाही (Evidence)कोर्ट में सच साबित करने के लिए गवाह और दस्तावेज पेश किए जाते हैं।

🔹 10. फैसला (Judgment)सभी सबूत और दलील सुनने के बाद जज जो अंतिम निर्णय देते हैं, उसे फैसला कहते हैं।

🔹 11. अपील (Appeal)अगर किसी को फैसले से संतोष नहीं है तो वह ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है।

📌 जरूरी सलाह:✔️ बिना जानकारी के कोई भी कागज साइन न करें✔️ सही वकील की सलाह जरूर लें✔️ कोर्ट की तारीख मिस न करें✔️ हमेशा सच बोलें

🙏 कानून की थोड़ी जानकारी आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है

—✍️ अंशुमान दीक्षित
अधिवक्ता, इलाहाबाद उच्च न्यायालय
📞 9619417198

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