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03/08/2026

मवेशी खाने पर आपत्ति क्यों

01/08/2026

अवारा पशु से हुई हादसे की होगी सरकार जिम्मेदार

17/07/2026

🎤 स्पीच: “संत की भाषा बनाम उत्तेजना की भाषा”
माननीय साथियों,
आज मैं एक बेहद संवेदनशील लेकिन जरूरी मुद्दे पर बात करना चाहता हूँ —
क्या किसी संत की भाषा ऐसी हो सकती है, जैसी इस संदेश में दिखाई दे रही है?
दोस्तों,
हमारे समाज में “संत” शब्द सिर्फ एक पद नहीं है,
यह एक आदर्श है… एक मार्गदर्शन है…
संत वह होता है —
👉 जिसकी वाणी में शांति हो,
👉 जिसके शब्दों में संयम हो,
👉 और जिसकी बातों में समाज को जोड़ने की शक्ति हो।
❓ अब सवाल उठता है…
अगर किसी संदेश में —
👉 आक्रोश हो,
👉 तंज हो,
👉 या भड़काऊ अंदाज़ हो,
तो क्या उसे संत की वाणी कहा जा सकता है?
क्या संत का काम समाज को बांटना है…
या जोड़ना है?
⚖️ संत की असली पहचान
इतिहास उठाकर देख लीजिए —
हर संत ने हमें धैर्य, सहिष्णुता और प्रेम का पाठ पढ़ाया है।
👉 उन्होंने कभी उत्तेजना नहीं फैलाई,
👉 कभी भाषा को हथियार नहीं बनाया।
🔍 गंभीर सोच का विषय
आज जरूरत है कि हम आंख बंद करके किसी भी बात को स्वीकार न करें।
👉 हमें यह समझना होगा क�

15/07/2026

🎤 स्पीच: भारतीय संविधान में नागरिकता (Article 5 से 11)

माननीय शिक्षकगण, मेरे प्रिय साथियों,
आज मैं आप सभी के सामने भारत के संविधान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय — नागरिकता (Citizenship) — पर अपने विचार प्रस्तुत करने जा रहा हूँ।

दोस्तों, किसी भी देश के लिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि उसका नागरिक कौन है। भारत में नागरिकता से जुड़े नियम संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में बताए गए हैं।

सबसे पहले बात करते हैं अनुच्छेद 5 की।
यह अनुच्छेद बताता है कि 26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ, उस समय कौन व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा। यानी यह नागरिकता की शुरुआत का आधार है।

इसके बाद आता है अनुच्छेद 6, जो उन लोगों के बारे में है जो पाकिस्तान से भारत आए थे।
यह अनुच्छेद बताता है कि कब और किन शर्तों पर वे भारतीय नागरिक बन सकते हैं।

फिर आता है अनुच्छेद 7, जो थोड़ा अलग है।
यह उन लोगों के बारे में है जो भारत से पाकिस्तान चले गए थे। ऐसे लोगों को सामान्यतः नागरिकता नहीं मिलती, लेकिन यदि वे �

14/07/2026

⚖️ कानून कहता है — नियम केवल संसद बदल सकती है!

तो फिर सवाल ये है 👇
👉 जब कानून बनाने और बदलने का अधिकार सिर्फ संसद को है,
तो चुनाव आयोग ने अपने पोर्टल पर नया डिक्लेरेशन फॉर्म खुद कैसे जोड़ दिया?

क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया है या नियमों में बदलाव की कोशिश?
क्या यह संविधान के दायरे में आता है या उससे बाहर?

📌 लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है
और ऐसे मामलों में स्पष्टता भी उतनी ही जरूरी है।

🗣️ आपकी क्या राय है?
क्या यह सही है या इसकी जांच होनी चाहिए?

LegalAwareness

14/07/2026

🚨 बड़ी कानूनी खबर – भरण-पोषण (Maintenance) पर नया स्पष्ट फैसला!

क्या पत्नी को हर हाल में पति की आय का 25% देना जरूरी है?
👉 जवाब है – नहीं!

हाल ही में ने साफ कर दिया है कि
पति की आय का 25% देना कोई फिक्स नियम नहीं है।

⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?
हर केस अलग होता है… और फैसला भी उसी हिसाब से होगा।

🎯 Maintenance तय करते समय कोर्ट इन बातों को देखती है:
✔️ पत्नी की वास्तविक जरूरतें
✔️ पति की असली आय (Real Income)
✔️ दोनों की आर्थिक स्थिति
✔️ जीवन स्तर (Standard of Living)
✔️ परिवार की जिम्मेदारियां

📌 यानी 25% सिर्फ एक guideline है,
👉 जरूरी नहीं कि हर केस में वही लागू हो।

💡 कोर्ट चाहे तो 25% से कम या ज्यादा भी तय कर सकती है –
सब कुछ depend करता है केस के facts और evidence पर।

📢 इसलिए अगर आप या आपका कोई जानने वाला Maintenance केस में है,
तो ये जानकारी बेहद जरूरी है!

⚖️ कानून को समझिए, अपने अधिकार जानिए

KnowYourRights

13/07/2026

हाल ही में चुनाव आयोग (ECI) ने Form 6 (नए वोटर रजिस्ट्रेशन) में कुछ नई शर्तें/जानकारी जोड़ दी हैं।
🔴 नई शर्त क्या जोड़ी गई है?
अब Form 6 भरते समय आवेदक को अपने माता-पिता (parents) की जानकारी भी देनी होगी
खासकर यह बताना होगा कि:
माता-पिता का नाम
उनका वोटर लिस्ट (Electoral Roll) में स्टेटस / SIR (Special Intensive Revision) से जुड़ी जानकारी
👉 पहले यह शर्त सभी पर लागू नहीं थी, लेकिन अब नए वोटर (first-time applicants) के लिए भी लागू कर दी गई है �
TheQuint +1
📌 यह बदलाव क्यों किया गया?
चुनाव आयोग का उद्देश्य है:
फर्जी या डुप्लीकेट वोटर को रोकना
वोटर लिस्ट को ज्यादा शुद्ध (accurate) बनाना
यह बदलाव Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है �
The Times of India
⚠️ आपके लिए इसका क्या मतलब है?
अगर आप नया वोटर ID बनवा रहे हैं, तो:
केवल आधार/पहचान पत्र ही नहीं
बल्कि माता-पिता की वोटर से जुड़ी जानकारी भी देनी पड़ सकती है
गलत या अधूरी जानकारी देने पर आवेदन रुक सकता है या रिजेक्ट हो सकता है
🟢 ध्यान देने वाली बात
यह नियम हर जगह एक साथ लागू हो रहा है, ले�

12/07/2026

झूठे दहेज उत्पीड़न मामले शादियां बर्बाद कर रहे हैं — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 498ए के तहत निर्दोष ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज झूठी शिकायतें शादियों को बर्बाद कर रही हैं और पतियों को अपनी पत्नियों को वापस न लेने के लिए और अड़ियल बना रही हैं।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू और जस्टिस ए.के. सीकरी की पीठ ने कहा, बिना किसी गलती के, महिला की एक झूठी शिकायत दर्ज होते ही पति के बुजुर्ग माता-पिता तक जेल भेज दिए जाते हैं, और सिर्फ पति से हिसाब बराबर करने के लिए बेवजह ससुराल वालों को घसीटना शादी के लिए भारी तबाही लेकर आता है।

कोर्ट ने एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने अपने पति के भाइयों के खिलाफ सबूत पेश करने से रोके जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा, जिन पतियों के माता-पिता झूठे 498ए मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं, वे अब पत्नी को वापस लेने से साफ इनकार कर रहे हैं, भले ह�

09/07/2026

48 घंटे में ईरान खत्म
̇ran

08/07/2026

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