06/06/2026
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 का उद्देश्य अभियुक्त (Accused) को उसके विरुद्ध आए साक्ष्यों और परिस्थितियों के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर देना है।
धारा 313 CrPC के मुख्य बिंदु:
अदालत अभियुक्त से प्रश्न पूछती है ताकि उसके विरुद्ध आए साक्ष्यों पर उसका स्पष्टीकरण प्राप्त किया जा सके।
यह अभियुक्त का बयान होता है, शपथ (Oath) पर नहीं लिया जाता।
अभियुक्त के उत्तर को साक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अभियोजन पक्ष (Prosecution) के साक्ष्य पूरे होने के बाद और बचाव पक्ष (Defence) के साक्ष्य से पहले सामान्यतः यह बयान दर्ज किया जाता है।
यदि अभियुक्त किसी महत्वपूर्ण परिस्थिति का संतोषजनक उत्तर नहीं देता, तो न्यायालय उस पर विचार कर सकता है।
उदाहरण
यदि किसी गवाह ने कहा कि अभियुक्त घटना स्थल पर मौजूद था, तो न्यायालय धारा 313 CrPC के तहत अभियुक्त से पूछ सकता है:
"गवाह ने कहा है कि आप घटना के समय मौके पर मौजूद थे। इस बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?"
अभियुक्त अपना स्पष्टीकरण दे सकता है, जैसे कि वह उस समय किसी अन्य स्थान पर था।
नोट: CrPC, 1973 को अब Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) ने प्रतिस्थापित कर दिया है। CrPC की धारा 313 का समकक्ष प्रावधान BNSS में धारा 351 है।