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08/06/2026
⚖️ लोन चुका दिया फिर भी कागजात रोके? अब नहीं चलेगी मनमानी! 🚫📄
08/06/2026

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शायद इसी वजह से भारत में अभी भी बहुत से कानूनी मामलों अपराधियों व कंट्टरपंथियो की धमकी व दबाब वोट बैंक तुष्टिकरण राजनीति...
08/06/2026

शायद इसी वजह से भारत में अभी भी बहुत से कानूनी मामलों अपराधियों व कंट्टरपंथियो की धमकी व दबाब वोट बैंक तुष्टिकरण राजनीति के कारण न्यायालय में पेंडिंग हैं स्टे ऑर्डर है सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का व अधीनस्थ न्यायालय का ।
जब जजों को ही सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होगी तो वो निष्पक्ष रूप से बिना किसी दबाव व अन्य धमकी के भय के सही व ईमानदारी से न्याय कैसे कर पाएंगे कैसे सही निर्णय सुना सकेंगे ।
⚖️ फैसला सुनाने की कीमत? पूर्व जज को धमकी, बेटी पर हमले से मचा हड़कंप! 😳

केंद्र सरकार को सभी न्यायाधीश व उनके परिजनों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए तथा अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना चाहिए ।

सावधान इंडिया
सावधान भारत

08/06/2026

RC transfer important मोटर साइकिल बेचने के बाद RC ट्रांसफर न करना बहुत जोखिम भरा हो सकता है।यदि वाहन बेच दिया गया है लेक...
06/06/2026

RC transfer important

मोटर साइकिल बेचने के बाद RC ट्रांसफर न करना बहुत जोखिम भरा हो सकता है।
यदि वाहन बेच दिया गया है लेकिन RC अभी भी पुराने मालिक के नाम पर है, तो कानून की नजर में वाहन का जिम्मेदार व्यक्ति वही माना जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप:
ट्रैफिक चालान पुराने मालिक के नाम पर आ सकते हैं।
वाहन से दुर्घटना होने पर कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
वाहन का उपयोग किसी अपराध में होने पर पुलिस जांच में पुराने मालिक को बुलाया जा सकता है।
बीमा (Insurance) संबंधी दावों में विवाद उत्पन्न हो सकता है।
टैक्स, पेनल्टी और अन्य देनदारियों की जिम्मेदारी भी पुराने मालिक पर आ सकती है।
क्या करें?
वाहन बेचने के तुरंत बाद RC ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कराएं।
बिक्री रसीद (Sale Letter) और आवश्यक फॉर्म सुरक्षित रखें।
वाहन हस्तांतरण की सूचना संबंधित RTO को दें।
खरीदार द्वारा RC ट्रांसफर होने तक दस्तावेजों का रिकॉर्ड अपने पास रखें।
संदेश:
"गाड़ी बेच देना ही पर्याप्त नहीं है, RC ट्रांसफर कराना भी उतना ही जरूरी है। अन्यथा भविष्य में कानूनी और आर्थिक दोनों प्रकार की समस्याएं हो सकती

126 CrPC
06/06/2026

126 CrPC

06/06/2026

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 का उद्देश्य अभियुक्त (Accused) को उसके विरुद्ध आए साक्ष्यों और परिस्थितियों के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर देना है।
धारा 313 CrPC के मुख्य बिंदु:
अदालत अभियुक्त से प्रश्न पूछती है ताकि उसके विरुद्ध आए साक्ष्यों पर उसका स्पष्टीकरण प्राप्त किया जा सके।
यह अभियुक्त का बयान होता है, शपथ (Oath) पर नहीं लिया जाता।
अभियुक्त के उत्तर को साक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अभियोजन पक्ष (Prosecution) के साक्ष्य पूरे होने के बाद और बचाव पक्ष (Defence) के साक्ष्य से पहले सामान्यतः यह बयान दर्ज किया जाता है।
यदि अभियुक्त किसी महत्वपूर्ण परिस्थिति का संतोषजनक उत्तर नहीं देता, तो न्यायालय उस पर विचार कर सकता है।
उदाहरण
यदि किसी गवाह ने कहा कि अभियुक्त घटना स्थल पर मौजूद था, तो न्यायालय धारा 313 CrPC के तहत अभियुक्त से पूछ सकता है:
"गवाह ने कहा है कि आप घटना के समय मौके पर मौजूद थे। इस बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?"
अभियुक्त अपना स्पष्टीकरण दे सकता है, जैसे कि वह उस समय किसी अन्य स्थान पर था।
नोट: CrPC, 1973 को अब Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) ने प्रतिस्थापित कर दिया है। CrPC की धारा 313 का समकक्ष प्रावधान BNSS में धारा 351 है।

NBWक्या होता है?Non-Bailable Warrant (गैर-जमानती वारंट) अदालत द्वारा जारी किया गया ऐसा गिरफ्तारी वारंट होता है, जिसमें प...
05/06/2026

NBWक्या होता है?
Non-Bailable Warrant (गैर-जमानती वारंट) अदालत द्वारा जारी किया गया ऐसा गिरफ्तारी वारंट होता है, जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करके सीधे अदालत के सामने पेश करती है। इस वारंट के जारी होने के बाद व्यक्ति को पुलिस स्टेशन से सामान्य रूप से जमानत नहीं मिलती; जमानत के लिए अदालत से आवेदन करना पड़ता है।
NBW कब जारी किया जाता है?
जब आरोपी बार-बार अदालत में उपस्थित नहीं होता।
जब समन (Summons) और जमानती वारंट (Bailable Warrant) के बावजूद आरोपी अदालत में नहीं आता।
जब अदालत को लगता है कि आरोपी फरार हो सकता है।
गंभीर अपराधों के मामलों में।
NBW जारी होने के बाद क्या करें?
संबंधित अदालत में उपस्थित हों।
वारंट रद्द (Cancellation/Recall) करने के लिए आवेदन दें।
अनुपस्थिति का उचित कारण बताएं।
आवश्यकता होने पर जमानत आवेदन दाखिल करें।
उदाहरण
यदि किसी आपराधिक मामले में आरोपी को कई बार समन भेजे गए हों और वह जानबूझकर अदालत में उपस्थित न हो, तो अदालत उसके विरुद्ध Non-Bailable Warrant जारी कर सकती है।
BNS/BNSS के तहत भी अदालत के पास आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करने की शक्ति है।

05/06/2026

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