Adv Kumar Sachin

Adv Kumar Sachin Practicing in Delhi/NCR

17/06/2021

एक वकील भाई बैंक में खाता खुलवाने गए । उन्हें एक फॉर्म पर जहाँ हस्ताक्षर 📝 करना था, वहां लिखा था

"नमूने के हस्ताक्षर".

महोदय ने इस पर घोर आपत्ति जताई और बैंक पर मान हानि का दावा ठोकने की भी धमकी दी।

बात समझ में आने पर बैंक ने भी उनसे माफी मांगकर अपनी गलती सुधार ली और फार्म पर लिखवाया...

"हस्ताक्षर का नमूना".

सही मतलब के लिए सिर्फ सही शब्द ही नहीं ,
क्रम भी सही होना आवश्यक है ....

वकील तो वकील होता है।
😀😀

Misuse or Abuse of Powers by Public Servant is Not A Part of their Official Duties, Therefore No Protection U/s.197 of C...
14/06/2021

Misuse or Abuse of Powers by Public Servant is Not A Part of their Official Duties, Therefore No Protection U/s.197 of CrPC Is Available

If the authority vested in a public servant is misused for doing things which are not otherwise permitted under the Law, such acts cannot claim protection of Section 197 CrPC.

Sri.S.Shivakumar Vs. The State of Karnataka, Karnataka High Court
❤️

13/06/2021

Anger just like a dance - by Sandeep Maheshwari ❤️

04/06/2021

Meditation For Spiritual Awakening - Daily Guided Meditation by Deepak ChopraMeditation can remove stress and replace it with a dose of inner peace. But it c...

12/05/2021

बुखार का पहला दिन: ये बुखार है, ठीक हो जायेगा, मुझे कोविड तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि यह बीमारी ही नहीं होती है।

बुखार का दूसरा दिन: हर बुखार कोविड थोड़े होता है, लेकिन फिर भी पैरासिटामोल खा लेता हूँ।

बुखार का तीसरा दिन: RT-PCR टेस्ट करवा के क्या होगा, सीधे CT Scan करवा लेता हूँ। (सिर्फ 2-3 दिन में CT स्कैन में कुछ खास नहीं आयेगा, तो कोविड इडियट कहेगा कि कोरोना नहीं है)

बुखार का चौथा दिन: ये बुखार तो पीछे ही पड़ गया, चलो ब्लड टेस्ट करवा लेते हैं। डॉक्टर को पैसे क्यों देना है, वो भी तो यही सब टेस्ट करवायेगा। (टेस्ट में टाईफाइड फाल्स पॉजिटिव आयेगा, क्योंकि वह क्रॉस-रिएक्टिव है)

बुखार का पांचवा दिन: मैंने पहले ही कहा था कि यह टाईफाइड है, अब डॉक्टर को ₹300 क्या देना है, कुछ एंटीबायोटिक खरीद के खा लेते हैं।

बुखार का छठा दिन: अभी, कल ही तो एंटीबायोटिक शुरू किया है, थोड़ा समय तो लगेगा।

बुखार का सातवां दिन: ये बुखार तो पिछे ही पड़ गया। एक फ्रेंड डॉक्टर है, उस से पूछते हैं। कुछ देर बाद... ये डॉक्टर सब का लैब में कमीशन होता है, देखो PCR Test के लिए बोल रहा है। उसके रिपोर्ट में भी 1-2 दिन लगेगा।

बुखार का आठवां दिन: अरे, मुझे सांस लेने में दिक्कत क्यों हो रही है? कोई अस्पताल ले चलो। (लेकिन कोविड रिपोर्ट नहीं है).

बुखार का नौवां दिन: ऑक्सीजन लेवल 90% से निचे जा रहा है, लेकिन कहीं बेड नहीं मिल रहा है। ये सरकार एकदम बेकार है।

बुखार का दसवां दिन: ऑक्सीजन लेवल 80% से निचे है, बहुत मुश्किल से एक बेड मिला है। लेकिन राहत नहीं है, ये अस्पताल एकदम बेकार है।

बुखार का ग्यारहवां दिन: वेंटिलेटर पर गये, अब परिवार वाले डॉक्टरों को दोष दे रहे हैं।

बुखार का बारहवां दिन: संक्रमण इतना बढ़ गया कि मरीज की मौत हो चुकी है, बाकी के लोग डॉक्टरों से लड़ रहे हैं।आप लोगों को कुछ नहीं आता, दो हफ्ते पहले स्वस्थ आदमी का जान ले लिया। (अस्पतालों की स्थिति भी अच्छी नहीं है, बेड की लिए इतनी मारामारी है कि वहाँ भी लापरवाही हो रही हैं)

इसी बीच, कुछ और लोग, इसी तरह की गलती करने में लगे हुये हैं।

*कृप्या.... अपनी तरफ से लापरवाही न करें। सतर्क रहें .... सुरक्षित रहें ....!!*

05/05/2021

हकीकत है। बिंद्रा साहब ने आईना दिखाने का काम किया है। सैल्यूट है ऐसे इंसान को।। ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।।

28/04/2021

"दूसरो की बुराई दूसरों को नही आपको नीचे गिराती है।"

28/04/2021

भारत में किसी पुलिस अधिकारी पर कोर्ट केस करने से पहले सरकार की अनुमति लेना क्यों आवश्यक है?

पुलिस अधिकारी पर कोर्ट केस करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से संस्वीकृति लेना आवश्यक है । ऐसा न किए जाने की अवस्था में केस सफल नहीं हो सकता व न्यायालय ऐसे अधिकारी के विरूद्ध संज्ञान नहीं ले सकता।

उक्त प्रावधान अधिकारीयों को निर्बाध रुप से कार्य करने के लिए किया गया है ताकि अधिकारी अपना कर्तव्य पालन बिना दबाव या हस्तक्षेप के स्वतंत्रता पूर्वक कर सकें परंतु ऐसा संरक्षण केवल उन मामलों में ही प्राप्त होता है जहां अधिकारी अपने कर्तव्यों का युक्तियुक्त रुप से पालन करे यदि कर्तव्य पालन में उसके द्वारा कोई कार्य अनुचित व अविधिक रुप से किया जाता है तो उसे ऐसा संरक्षण प्राप्त नहीं होता । ऐसी अवस्था में उसके विरुद्ध केस बिना पूर्व संस्विकृति witout prior sanction के भी किया जा सकता है यद्यपि इस तथ्य को सम्बंधित न्यायालय ही विचारण के दौरान निर्धारित कर सकता है कि क्या किया गया कार्य इस प्रकृति का है अथवा नहीं ।

11/03/2021
19/02/2021

अगर कोई बालिग व्यक्ति किसी कॉल गर्ल के साथ होटल रूम में आपत्तिजनक स्थिति में मिले तो क्या पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है?
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भारतीय कानून के अनुसार दो बालिग लोग होटल के कमरे में या किसी भी घर आदि में आपसी सहमति से यौन सम्बन्ध बना सकते हैं।

लेकिन इसमें धन का लेन देन करना अपराध है।

लेकिन पुरुष बदनामी से डरता है और अक्सर लड़की भी बदनामी से डरती है।

पुलिस इसी डर का फायदा उठा कर दोनों का शोषण करती है।

आपकी जानकारी के लिए: ग्राहक और कॉल गर्ल के बीच में दलाली करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
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पुलिस का कोई भी आचरण यदि कानून के खिलाफ होता है तो CRPC की धारा IPC 163 के तहत मेट्रोपोलिटन मेजिस्ट्रेट के पास दोनों बालिग अपना बयान दर्ज करा सकते है और लड़की छेड़छाड़ , गाली गलौज का भी आरोप लगा सकती है तब उस पुलिस वाले की वर्दी उतरनी तय समझो। वो दस बार नाक रगड़ने आएगा और लिखित मैं माफ़ी भी मांगेगा। ये धारा सरकारी कर्मचारी को नियम के तहत काम करने के लिए मज़बूर करती है।

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