Rakesh K Singh

Rakesh K Singh The firm has affiliates and Tie-ups all over India. The clientele of the firm includes some of the respectable names of the corporate world.

Lawyer - Founder RKS Associate, Humanist - Founder Bharat Utthan Sangh/Maharana Pratap foundation & Co-founder/Chairman - Khaana Chahiye foundation/www.rksassociate.com www.bus.ngo www.khaanachahiye.com R K S Associate is a young, enrgetic and a fast growing full service Law Firm based at Mumbai with special expertise in Arbitration, Banking, Business, Corporate, Intellectual Property,Service & Cr

iminal Laws. The firm provides Corporate, Litigation and regulatory legal services to regional, national and international companies, emerging businesses, governmental entities, nonprofit organizations and individuals.

आज का दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने हमें आज़ादी द...
15/08/2026

आज का दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

एक अधिवक्ता के रूप में मेरा विश्वास है कि संविधान का सम्मान करना, न्याय के लिए खड़ा होना और नागरिकों के अधिकारों की आवाज़ बनना भी देश की सेवा है।

आज़ादी हमें मिली है, लेकिन इसे मजबूत बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🇮🇳

जय हिंद। वंदे मातरम्।

#स्वतंत्रतादिवस #15अगस्त #जयहिंदी #संविधान #न्याय

12/08/2026

आज की युवा पीढ़ी को सिर्फ यह कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि “ये तो Gen-Z है।”

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युवा जिस तरह व्यवस्था, सरकार और सत्ता से सवाल पूछ रहे हैं, उसके पीछे सिर्फ गुस्सा नहीं है। उसके पीछे बेहतर भविष्य की उम्मीद है। एक ऐसी व्यवस्था की उम्मीद, जिसमें उनकी आवाज सुनी जाए, फैसलों में पारदर्शिता हो और सरकारें जनता के प्रति जवाबदेह हों।

हमारे यहां भी युवा पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। वह सवाल पूछता है, अपनी बात रखता है और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है। आने वाले समय में यही युवा राजनीति की दिशा और प्राथमिकताओं को भी प्रभावित करेगा।

मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है क्या हमारी राजनीतिक व्यवस्था इस बदलती हुई युवा सोच को समझ पा रही है?

इसी मुद्दे पर India News की डिबेट में अपनी बात रखी।

आप क्या सोचते हैं? क्या आज का युवा आने वाली राजनीति को वास्तव में बदलने की क्षमता रखता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

10/08/2026

बिहार को सिर्फ जाति के चश्मे से देखना… बिहार की राजनीति को समझने की सबसे बड़ी भूल है।

टीवी पैनलिस्ट के तौर पर मैंने अपनी बात साफ तौर पर रखी। बिहार की जनता हमेशा सिर्फ जातीय समीकरणों के आधार पर फैसला नहीं करती। बिहार की राजनीति में बदलाव, बगावत और नए विकल्पों की तलाश हमेशा से रही है।

अगर बिहार की जनता सिर्फ जाति के आधार पर वोट करती, तो प्रशांत किशोर जैसे नए राजनीतिक चेहरे को विधानसभा तक पहुंचने का मौका ही क्यों मिलता?

मेरे मुताबिक, यह सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं है। यह इस बात का संकेत भी है कि बिहार का वोटर स्थापित राजनीतिक समीकरणों से इतर अपनी आवाज़ और अपने मुद्दों को जगह देने का फैसला भी कर सकता है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा…

सवाल यह है कि क्या बिहार की राजनीति में एक नई राजनीतिक आवाज़ के लिए जगह बन रही है?

06/08/2026

टीवी डिबेट में अक्सर समय सीमित होता है, लेकिन कई बार कुछ बातें बहुत स्पष्ट होती हैं।

'इंडिया न्यूज़' पर हालिया उपचुनावों पर चर्चा के दौरान मैंने अपनी राय रखी कि चुनावी नतीजों के पीछे तीन अहम संदेश दिखाई देते हैं—
🔹 NEET पेपर लीक से युवाओं की नाराजगी
🔹 UGC से जुड़े मुद्दों पर असंतोष
🔹 और बीजेपी के रवैये में बढ़ता अति-आत्मविश्वास

जनता समय-समय पर अपना संदेश देती है। सवाल यह है कि राजनीतिक दल उसे कितना सुनते और समझते हैं।

04/08/2026

'इंडिया न्यूज़' पर हाल ही में हुए उपचुनावों (बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात) के नतीजों पर एक बेहद दिलचस्प चर्चा का हिस्सा रहा। जब मैंने इन नतीजों को करीब से देखा, तो कुछ बातें बिल्कुल साफ नजर आईं, जो मैंने शो में भी साझा कीं।

जमीन पर मुख्य रूप से तीन बड़े 'अंडरकरंट' काम कर रहे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

पहला- NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों और युवाओं में भारी गुस्सा।

दूसरा- UGC से जुड़े मुद्दों पर समाज के एक खास वर्ग की नाराजगी।

और तीसरा, जो सबसे अहम है- बीजेपी के रवैये में दिखने वाला अति-आत्मविश्वास।

सबसे ज्यादा चौंकाया है बिहार ने!

अक्सर कहा जाता है कि बिहार में सिर्फ 'जाति' के नाम पर वोट पड़ते हैं, लेकिन इस बार वहां की जनता ने साबित कर दिया कि वे अब 'बदलाव और बगावत' की राजनीति को चुन रहे हैं। इसका सीधा फायदा प्रशांत किशोर को मिला है।

सोचने वाली बात यह है कि बीजेपी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश के दिग्गज नेताओं के प्रभाव वाली सीटें तक नहीं बचा पाई। सिर्फ गुजरात से उन्हें थोड़ी बहुत राहत मिली है। उप-चुनाव के परिणाम देखकर मुझे तो लगता है कि बीजेपी को कहीं ना कहीं आत्ममंथन करने की जरूरत है।

Can a government employee be denied regularisation just because of a clause in the appointment contract?The Supreme Cour...
28/07/2026

Can a government employee be denied regularisation just because of a clause in the appointment contract?

The Supreme Court has given an important answer in Bhola Nath v. State of Jharkhand & Ors.

In this case, Junior Engineers worked continuously for more than 10 years against sanctioned posts. Yet, they were denied regularisation because their contracts contained a clause stating they could never claim permanent employment.

The Supreme Court made it clear that the State cannot hide behind an unfair contractual clause to deny constitutional rights. Where there is unequal bargaining power, such clauses cannot override the guarantee of equality under Article 14 of the Constitution.

This judgment is a reminder that constitutional values will always prevail over arbitrary contractual terms.

Swipe through the infographic to understand the key facts, the Court's reasoning, and the legal principles laid down in this significant decision.

Knowledge of the law empowers every citizen.

क्या सिर्फ भांग रखने पर NDPS Act के तहत गिरफ्तारी हो सकती है?इस सवाल को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। हाल ही में झा...
20/07/2026

क्या सिर्फ भांग रखने पर NDPS Act के तहत गिरफ्तारी हो सकती है?

इस सवाल को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि जब्त पदार्थ भांग (Bhang) है, तो केवल उसके कब्ज़े के आधार पर NDPS Act के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि NDPS Act की धारा 2(iii) में गांजा (G***a) और चरस (Charas) का उल्लेख है, लेकिन भांग को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस मामले में FSL रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि जब्त पदार्थ गांजा नहीं, बल्कि भांग था। इसलिए अदालत ने आरोपी की सजा को रद्द कर दिया।

कानून की सही जानकारी कई बार गलतफहमियों और अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचा सकती है।

रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी आत्मा की परमात्मा की ओर की जाने वाली यात्रा का प्रतीक है। जब हम रथ की रस...
16/07/2026

रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी आत्मा की परमात्मा की ओर की जाने वाली यात्रा का प्रतीक है। जब हम रथ की रस्सी खींचते हैं, तो हम वास्तव में अपने अहंकार को पीछे छोड़कर महाप्रभु के चरणों में अपना पूर्ण समर्पण व्यक्त करते हैं।

इस पावन अवसर पर, मेरी यही प्रार्थना है कि भगवान जगन्नाथ हम सभी के हृदय रूपी रथ पर विराजमान हों और हमारे जीवन की दिशा तय करें। ईश्वर आप सभी को अपार शांति, आत्मिक सुख और सेवा का भाव प्रदान करें। जय जगन्नाथ! हरि बोल! 🙏

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