29/06/2016
Income Tax updates:
*नगद बिक्री और नगद भुगतान पर अपरोक्ष रूप से पाबन्दी*✍
आयकर के संशोधित नियम 114ई के मुताबिक अगर कोई व्यापारी किसी भी ग्राहक, चाहे वह कोई व्यक्ति या अन्य कोई दूसरा व्यापारी ही क्योँ न हो, से बिक्री की एवज में अगर पूरे साल भर में 2 लाख रूपये से अधिक का भुगतान अगर नगद में प्राप्त करता है,
तो बेचने वाला व्यापारी इस तरह से प्राप्त नगद भुगतान व भुगतान करने वाले व्यक्ति से सम्बंधित सुचना पैन नम्बर सहित आयकर विभाग को मुहया करवाएगा।
क्रेता के पैन नम्बर की सत्यापन की जिम्मेदारी विक्रेता की है।
अतः उसे इस तरह के क्रेता से पैन कार्ड की छायाप्रति लेनी होगी।
क्रेता का पैन नम्बर उपलब्ध न होने पर विक्रेता को उससे फॉर्म 60/61 लेकर आयकर विभाग को प्रेषित करना होगा।
साथ ही 2 लाख रू. से ऊपर के बिल पर खरीददार का पैन नम्बर अंकित करना भी अब अनिर्वाय कर दिया गया है।
आयकर विभाग इस सुचना के आधार पर नगद भुगतान करने वाले व्यक्तियों की निगरानी करेगा और पता लगायेगा कि वे लोग अपनी आयकर की रिटर्न पेश कर रहे है कि नहीं,
और पेश कर रहे हैं तो क्या उनके द्वारा घोषित आय साल भर में उनके द्वारा किये गए नगद भुगतान को देखते हुए पर्याप्त है ?
किसी तरह की अनियमितता मिलने पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी |
यह सुचना विक्रेता द्वारा अलग से एक वार्षिक विवरणी फार्म सं. 61A के माध्यम से पेश की जायेगी
लेकिन सुचना देने का नियम उन्ही व्यापारियों पर लागु होगा जिनका आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत ऑडिट होता है |
उदाहरण के लिए 1 अप्रेल 2016 के बाद अगर कोई व्यक्ति अपना घर बनवाने के लिए भी लकड़ी खरीदता है और दो लाख रूपये से ज्यादा का नगद भुगतान करता है तो उसकी सुचना आयकर विभाग में जायेगी |
ऐसे ही अगर कोई व्यक्ति शादी के लिए कपड़ा खरीदता है और दो लाख रूपये से ज्यादा का नगद भुगतान करता है तो उसकी सुचना भी आयकर विभाग के पास जायेगी।
इसी प्रकार अगर कोई व्यापारी भी नगद में माल खरीदता है तो उसकी भी सुचना आयकर विभाग में जायेगी।
☝ नगद भुगतान करने या प्राप्त करने पर एक और जबरदस्त प्रहार आयकर अधिनियम की धारा 206C में संशोधन के द्वारा किया गया है।
1 जून 2016 से अगर कोई व्यापारी किसी व्यक्ति या अन्य किसी व्यापारी को 2 लाख रूपये से अधिक का माल (एक बिल से) बेचता है और विक्रय राशि में से एक रुपया भी नगद में प्राप्त करता है तो वह क्रेता से सम्पूर्ण विक्रय राशि का 1 % टैक्स (टी.सी.एस.) के रूप में कलेक्ट करके आयकर विभाग में जमा करवाएगा एवं इस राशि का समायोजन क्रेता को उसकी रिटर्न भरते समय मिल जायेगा |
उदाहरण के लिए अगर कोई व्यापारी किसी को 3 लाख रूपये का उधार माल (एक बिल से) बेचता है और सारा का सारा भुगतान बैंक के माध्यम से प्राप्त करता है तो उसे 1% टैक्स वसूल करने की आवश्यकता नही है |
लेकिन 3 लाख रूपये में से 100 रूपये भी नगद में प्राप्त करता है तो जिस दिन नगद भुगतान प्राप्त करता है उस दिन उसे क्रेता से पुरे 3 लाख रूपये पर 1% की दर से टी.सी.एस. यानि 3000/- रूपये वसूल करके सरकार के खाते में जमा करवाने पड़ेंगे।
इसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति किसी अस्पताल में ईलाज करवाता है और 2 लाख से अधिक का भुगतान नगद में करता है तो उसे अस्पताल की फीस के अलावा 1% टी.सी.एस. भी चुकाना होगा।
इतना ही नही विक्रेता एवं सेवा प्रदाता को यह सुचना आयकर विभाग में भिजवाने के लिए चारों तिमाही की टी.सी.एस. की रिटर्न भी भरनी पड़ेगा,
विक्रेता को वित्तीय लेन देन की वार्षिक रिटर्न भरनी होगी तथा क्रेता से 1% टैक्स वसूल करके सरकार के खाते में जमा करवाना पड़ेगा और फिर चारों तिमाहियों की टी.सी.एस. की रिटर्न भी भरनी पड़ेगी।
दूसरी तरफ क्रेता अथवा नगद भुगतान करने वाले व्यक्ति पर आयकर विभाग की नजर रहेगी और वह आयकर विभाग की गहन निगरानी में रहेगा।
इसलिए नगद भुगतान करते या लेते समय पूरी सावधानी बरतें। इस तरह से सरकार ने अपरोक्ष रूप से नगद लेन देन पर पाबंदी लगाने की कोशिश की है।