18/07/2026
जिला अभिभाषक संघ भोपाल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री देवेंद्र रावत जी आपको बहुत-बहुत बधाई।।।
हार-जीत से ऊपर — जीता अधिवक्ता समाज
(चुनाव का सार, हर साथी के लिए)
आज परिणाम आ गया। कोई जीता, कोई हारा — परंतु सच पूछो तो जो भी परिणाम रहा हो, जीता अधिवक्ता समाज ही है।
चुनाव का सार क्या है?
अच्छा प्रत्याशी — साफ छवि, विनम्रता, उदारता, सेवा और समर्पण। साथ में अच्छी टीम, सहयोगी और मित्र — यही किसी प्रत्याशी की असली पूंजी है।
परंतु केवल इतना पर्याप्त नहीं। साथ ही चाहिए —
चुनाव की पूरी तैयारी। राजनीतिक समीकरण समझने की दृष्टि। पीछे कुछ चाणक्य जैसे राजनीतिज्ञ। चुनाव के दौरान पूरा धैर्य। और विषम परिस्थिति में सही reaction देने की समझ।
जब ये सब मिलते हैं — तब सजता है विजय का ताज।
और एक बात — प्रतिद्वंद्वी भी मजबूत चाहिए। यदि वह न हो, तो जीत का अर्थ ही नहीं। इसलिए opposite party जितनी शानदार, जीत का परिणाम उतना ही महत्वपूर्ण — और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी बताता है।
2 vote की जीत — कलेजा बाहर लाने वाली counting — भी जीत ही है, पर कुछ तो सिखाती है: कि अब निभाना पड़ेगा।
इस चुनाव ने हर पद पर एक पाठ पढ़ाया —
महिला उपाध्यक्ष में करारी टक्कर। सचिव — मेहनत और दूरदर्शिता का परिणाम। अध्यक्ष पद — राजनीतिक समीकरण। उपाध्यक्ष (पुरुष) — सभी की स्वीकार्यता। और सह सचिव पद — विपरीत समीकरण का उदाहरण: कुछ वरिष्ठों का आशीर्वाद और कुछ senior साथियों का negative प्रचार भी जीत दिला देता है। वहीं कार्यकारिणी सदस्य — अनुनय-विनय, सभी से मिलनसार व्यवहार का जीता-जागता उदाहरण है।
और एक बात याद रहे — Message, call और हाँ, party भी vote appeal का माध्यम हो सकते हैं, पर चुनाव नहीं जिताते। चुनाव जिताते हैं — रिश्ते, विश्वास, जमीनी मेहनत और वर्षों की सेवा।
और हाँ — नये voter, पुराने voter, ये voter, वो voter, इस area का, इस hall का, इस gate का — ये सब लकीर पीटने की बातें हैं। सारे voter आपके ही हैं — यदि जीते तो।
विजयी साथियों को हार्दिक बधाई, और जो इस बार सफल नहीं हुए — उनका साहस भी अभिनंदन का पात्र है, क्योंकि लोकतंत्र में खड़ा होना ही अपने आप में जीत है।