28/02/2026
मेरा मत है. सहमत- असहमत आप हो सकते हैं. सुने हैं कि पवन सिंह को राज्य सभा भेजने पर विचार चल रहा है. पिछले दिनों पवन ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात भी की. पवन सिंह को भोजपुरी फिल्मों का पावर हाउस कहा जाता है. लेकिन मेरी राय में वे अश्लीलता और फूहड़ता के पावर स्टार हैं.
बिहार की सरकार जहां एक ओर अश्लील गानों को बजाने पर रोक लगाने की बात करती है. वहीं 1. सानिया मिर्जा के नथुनिया.. 2. राजा जी घरे आजा.. 3. रात दिया बुझा के.. 4. पुदीना ऐ हसीना.. जैसे गंदे गानों के बदनाम सिंगर पवन सिंह को राज्य सभा भेज पता नहीं कौन-सा संदेश देगी. पवन सिंह की निजी जिंदगी के पन्ने भी काफी ब्लैक हैं. पहली पत्नी, दूसरी पत्नी, आगे और क्या-क्या, पता नहीं.
उपेंद्र कुशवाहा की जगह पवन सिंह, यह बात समझ में नहीं आती है. उपेंद्र कुशवाहा पोलिटिकल डीएनए वाले हैं. परिवारवाद का आरोप तो बहुतों पर लगता है. लेकिन, इसे याद रखना होगा, जब वे केंद्र में मंत्री थे, तब भी बिहार में अधिक से अधिक केंद्रीय विद्यालय खुले, इसके लिए संघर्ष कर रहे थे. तय मानिए, बिहार का गौरव बिहार की शिक्षा व्यवस्था को ही दुरुस्त कर हासिल किया जा सकता है. दूसरा कोई और रास्ता नहीं है.
पवन सिंह संभ्रांत समाज के नायक कभी नहीं हो सकते. ठीक है, अनपढ़ भीड़ किसी के पीछे भी चल लेती है. पवन सिंह के कारण 2024 के लोक सभा चुनाव में एनडीए को कई क्षेत्रों में नुकसान हुआ. स्वयं पवन सिंह भी नहीं जीते. उपेंद्र कुशवाहा भी हारे. फिर विधान सभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा के बंगले पर जाकर पवन सिंह ने पैर छुए, तब जाकर सामाजिक समीकरण सुधरा.
लेकिन इसका आशय ये नहीं कि अश्लील और फूहड़ को आप राज्य सभा पहुंचा दें. पवन सिंह जाति से राजपूत हैं, पर उन्हें राजीव प्रताप रुडी, राधामोहन सिंह, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जैसे बड़े राजपूत नेता भी जात का लीडर नहीं मान सकते. फिर भी, पवन सिंह का नाम राज्य सभा के लिए आगे जाता है, तो हम मान लेंगे कि बंगाल की जनता अधिक ताकतवर है. याद है, 2024 में जब भाजपा ने आसनसोल से कैंडिडेट बनाया था, तो बंगाल ने पवन के फूहड़ गानों के बोल इतने बजाए कि उम्मीदवारी ही वापस हो गई. अब देखिए, बिहार में आखिर में होता क्या है ?
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