19/06/2026
⚖️ **पति भी कानून के संरक्षण के हकदार हैं** ⚖️
🏛️ हाल के वर्षों में भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण निर्णय पारित किए हैं, जिनमें वैवाहिक कानूनों के दुरुपयोग, झूठे आरोपों तथा अनुचित वित्तीय बोझ से पतियों के अधिकारों की रक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
📌 **महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत**
# # # 💰 भरण-पोषण (Maintenance) एवं गुजारा भत्ता (Alimony)
✅ यदि पत्नी शिक्षित, योग्य एवं आय अर्जित करने में सक्षम है, तो वह केवल भरण-पोषण प्राप्त करने के उद्देश्य से जानबूझकर बेरोजगार नहीं रह सकती।
✅ न्यायालय दोनों पक्षों से आय एवं संपत्ति का शपथपत्र (Income Affidavit) दाखिल करवाते हैं। आय छिपाने या गलत जानकारी देने पर Maintenance का दावा प्रभावित हो सकता है।
✅ भरण-पोषण का उद्देश्य वास्तविक आवश्यकता की पूर्ति है, न कि पति को मात्र "ATM" समझकर आर्थिक बोझ डालना।
# # # ⚖️ तलाक एवं मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty)
✅ पति के विरुद्ध झूठे आपराधिक मुकदमे, निराधार आरोप अथवा चरित्र हनन (Character Assassination) को न्यायालयों ने मानसिक क्रूरता माना है।
✅ यदि पति को झूठे आरोपों के आधार पर वर्षों तक मुकदमे का सामना करना पड़े और अंततः वह बरी हो जाए, तो ऐसे मामलों में तलाक का आधार बन सकता है।
# # # 🏠 घरेलू हिंसा (Domestic Violence) मामलों में न्यायालय का दृष्टिकोण
✅ न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा हेतु बनाया गया है, लेकिन इसका दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता।
✅ जहाँ आरोप निराधार, अतिरंजित या साक्ष्यहीन पाए गए हैं, वहाँ न्यायालयों ने कार्यवाही को निरस्त (Quash) भी किया है।
📖 **कानून का उद्देश्य न्याय है, न कि किसी पक्ष को अनुचित लाभ देना।**
न्यायालयों का लगातार यह दृष्टिकोण रहा है कि पति और पत्नी दोनों के अधिकारों एवं दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
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