03/07/2026
दूसरी शादी में रह रही महिला को भरण-पोषण का हक" — दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पहली शादी से औपचारिक तलाक का डिक्री न होने के बावजूद, दूसरी शादी में रह रही महिला को भरण-पोषण पाने का अधिकार मिल सकता है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 में "पत्नी" शब्द की व्याख्या सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखकर उदार तरीके से की जानी चाहिए। यह मामला एक पति की याचिका से जुड़ा है, जिसने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने पति को हर महीने तीन हजार रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था।
पति का तर्क था कि महिला कानूनी रूप से उसकी पत्नी नहीं है, क्योंकि उसने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई और पहले पति से तलाक लिए बिना ही दूसरी शादी कर ली। वहीं महिला की ओर से कहा गया कि वह अपने पहले पति के साथ सिर्फ एक महीने रही थी, उसके बाद करीब 12 साल तक कोई संपर्क नहीं था, और मौजूदा पति को शादी के समय इन सभी तथ्यों की पूरी जानकारी थी।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए पति की याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।