अधिवक्ता गर्ग विजय द्विवेदी

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अधिवक्ता गर्ग विजय द्विवेदी हम वकील है जुल्म से लड़ना हमारी पहचान है ,सच की राह में चलना हमारा ईमान है!!

17/08/2026
05/08/2026

🥰Nurture is the best medicine of life 🥰 @

07/04/2026

वकील की मित्रता वह दवाई है!!
जो कभी expairy नहीं होती!!

27/01/2026

अधर्म पर मौन बनकर जो मात्र निहारे जाते हैं,

भीष्म हो, द्रोण हो या हो कर्ण सब मारे जाते हैं।
🏴🏴✖️UGC ROLL BACK✖️🏴🏴

25/01/2026

बेहद महत्वपूर्ण पोस्ट 👇

को देखकर सवर्ण समाज के कथित भाजपा नेताओं के होश उड़ गए हैं कि अब क्या करें अपने बच्चों के भविष्य को अंधेरे में देखकर फिर भी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।आज के समय में स्वर्ण नेताओं को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने का समय आ गया है।
1.देश में बैकडोर से शरिया नहीं, बल्कि “कलेक्टिव गिल्ट” का कानून लागू हो गया है।
2.कल यूजीसी ने चुपचाप Promotion of Equality in Higher Education Regulation–2026 लागू कर दिया। नाम बड़ा मासूम है, लेकिन मंशा और परिणाम बेहद खतरनाक।
3.इस कानून के तहत— SC, ST, OBC (जिसमें मुस्लिम जातियाँ भी शामिल हैं) को जन्म से पीड़ित घोषित कर दिया गया है और जनरल कास्ट को जन्म से अपराधी मान लिया गया है।
4.अब विश्वविद्यालयों में न्याय नहीं, SC, ST और ओबीसी की पहचान के आधार पर फैसला होगा।

नया कानून क्या कहता है?
1.अगर किसी SC/ST/OBC छात्र को—
जाति सूचक शब्द महसूस हो जाए
2.व्यवहार प्रतिकूल लग जाए
3.मानवीय गरिमा ठेस खा जाए
तो सामने वाला “सवर्ण” स्वतः आरोपी बन जाएगा।
4.सबूत? ज़रूरी नहीं।
5.नीयत? अप्रासंगिक।
6.सुनवाई? बाद में।

यह SC-ST एक्ट से ज्यादा खतरनाक क्यों है?
1️⃣ अब OBC भी शामिल हैं — जबकि SC-ST एक्ट में वे नहीं थे।
2️⃣ Equity Squad बनेगी — विशेष टीमें जो यूनिवर्सिटी में घूम-घूमकर देखेंगी कि कहीं “सवर्ण उत्पीड़न” तो नहीं हो रहा।
3️⃣ अपराध की परिभाषा अब असीमित है —
“प्रतिकूल व्यवहार” और “मानवीय गरिमा” जैसे लचीले शब्द जोड़कर किसी को भी फँसाया जा सकता है।

सबसे बड़ा धोखा 👇
2012 में UPA के कानून में—
झूठी शिकायत पर शिकायतकर्ता को सजा का प्रावधान था
लेकिन अब— ❌ वह प्रावधान हटा दिया गया, झूठ बोलने की पूरी छूट दे दी गई है...
यानि यह कानून नहीं, एक नंगी तलवार है — जो सिर्फ हिन्दू सवर्ण वर्ग के सिर पर लटकेगी।
दुरुपयोग कैसे होगा?
1.कोई मेधावी सवर्ण छात्र — झूठे केस में फँसाकर पढ़ाई से बाहर
2.नोट्स देने से मना किया — “अपमान”
3.फिल्म, राजनीति या इतिहास पर बहस — “गरिमा का हनन”
4.प्रोफेसर ने कम नंबर दिए — “जातिगत भेदभाव”
5.अब तर्क नहीं चलेगा, भावना चलेगी।
और भावना ही फैसला करेगी।

भविष्य की तस्वीर
1.कोई खुलेआम थूक दे, गाली दे, नारे लगाए —
2.“ब्राह्मण यूरेशिया जाओ”
3.तब भी विरोध नहीं कर पाओगे,
क्योंकि डर रहेगा — “कहीं केस न लग जाए”यह समानता नहीं है। यह न्याय नहीं है। यह संविधान की आत्मा का गला घोंटना है...
वाह!
इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ के भारत सरकार एवं संसद में बैठे कुलद्रोहियो को बहुत बहुत धन्यवाद...

इतिहास इसे सुधार नहीं, सामाजिक विभाजन का औजार कहेगा....

25/01/2026

✖️विरोध विरोध विरोध✖️
सरकार काला कानून वापस ले,
अथवा 2027 में सरकार को इसका खामजा भुगतना पड़ेगा? भारती जनता पार्टी की सरकार अपने मूल मुद्दों से जनता को भटकाने का कार्य कर रही है,
जागो जागो जागो इस मुहिम में सभी सवर्ण साथियों को एक जुट हो कर विरोध करने की जरूरत है।
🏴काला कानून वापस ले सरकार🏴🏴

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