08/07/2026
#हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) विवाह को शून्यकरण योग्य (Voidable Marriage) घोषित कराने का प्रावधान है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब विवाह के लिए दी गई सहमति (Consent) स्वतंत्र और वास्तविक न होकर बल (Force) या कपट/धोखाधड़ी (Fraud) से प्राप्त की गई हो।
#धारा 12(1)(c) का सार⏳
यदि किसी पक्ष की सहमति—
📍बलपूर्वक (Force) प्राप्त की गई हो, या
📍विवाह अथवा दूसरे पक्ष से संबंधित किसी महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में धोखाधड़ी (Fraud) करके प्राप्त की गई हो,
तो वह पक्ष न्यायालय में विवाह को निरस्त (Annul) करने की याचिका दायर कर सकता है।
👉किन परिस्थितियों में यह धारा लागू हो सकती है❓
1.विवाह के समय दूल्हा या दुल्हन की पहचान छिपाना।
2.पहले से विवाहशुदा होने का तथ्य छिपाना।
3.गंभीर मानसिक रोग या असाध्य बीमारी छिपाना (यदि वह विवाह के निर्णय को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण तथ्य हो)।
4.नपुंसकता या संतानोत्पत्ति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना।
5.झूठे दस्तावेज़ या गलत जानकारी देकर विवाह के लिए सहमति प्राप्त करना।
6.धमकी, दबाव या जबरन विवाह कराना।
#न्यायालय कब राहत देता है❓
✍️याचिकाकर्ता को यह सिद्ध करना होता है कि—
📍उसकी सहमति बल या धोखाधड़ी से प्राप्त हुई थी।
📍बल समाप्त होने या धोखाधड़ी का पता चलने के एक वर्ष के भीतर याचिका दायर की गई।
📍सत्य का पता चलने या बल समाप्त होने के बाद उसने स्वेच्छा से वैवाहिक संबंध स्वीकार (Condonation) नहीं किया।
#इस धारा के अंतर्गत क्या राहत मिलती है❓
यदि न्यायालय संतुष्ट हो जाए कि धारा 12(1)(c) की शर्तें पूरी हैं, तो वह विवाह को शून्यकरण योग्य (Voidable) मानते हुए Annulment (विवाह निरस्तीकरण की डिक्री) पारित कर सकता है। इसका प्रभाव यह होता है कि विवाह न्यायालय की डिक्री से निरस्त माना जाता है; यह स्वतः शून्य (Void) नहीं होता।
👇नीचे उत्तर प्रदेश के परिवार न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने योग्य Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत विवाह को शून्य घोषित (Annulment) कराने हेतु एक विस्तृत प्रारूप दिया गया है। इसे अपने मामले के तथ्यों के अनुसार संशोधित करना आवश्यक होगा।
माननीय प्रधान न्यायाधीश,परिवार न्यायालय, जनपद __,
वाद सं. (न्यायालय द्वारा भरा जाएगा) सन....
श्री/श्रीमती ____,
पुत्र/पुत्री ____,
निवासी ______
......वादिनी/याची
बनाम
श्री/श्रीमती ____,
पुत्र/पुत्री ____,
निवासी ______
.......प्रतिवादी
वाद का मुलयाकन............
देय न्याय शुल्क...............
#हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत विवाह को शून्यकरण (Annulment) घोषित किए जाने हेतु याचिका
माननीय न्यायालय के समक्ष याची आदरपूर्वक निम्नलिखित निवेदन करता/करती है—
1.यह कि याची एवं प्रतिवादी हिन्दू हैं तथा उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होता है।
2. यह कि दोनों का विवाह दिनांक //20_ को हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार स्थान _____ पर संपन्न हुआ।
3.यह कि विवाह के समय प्रतिवादी/प्रतिवादी के परिजनों ने याची से _____ संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर छिपाए तथा मिथ्या प्रस्तुतीकरण कर याची की सहमति प्राप्त की।
4.यह कि यदि उक्त वास्तविक तथ्यों की जानकारी याची को पूर्व में होती, तो वह किसी भी स्थिति में उक्त विवाह के लिए सहमति प्रदान नहीं करता/करती।
5.यह कि विवाह के उपरांत दिनांक //20___ को याची को वास्तविक तथ्यों की जानकारी प्राप्त हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसकी सहमति धोखे (Fraud) एवं कपटपूर्ण प्रस्तुतीकरण से प्राप्त की गई थी।
6.यह कि उक्त तथ्य ज्ञात होने के पश्चात याची ने प्रतिवादी के साथ स्वेच्छा से पति-पत्नी के रूप में सहवास नहीं किया।
7.यह कि यह याचिका हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) तथा धारा 12(2) के प्रावधानों के अनुरूप समयावधि के भीतर प्रस्तुत की जा रही है।
8.यह कि कारण-ए-वाद (Cause of Action) दिनांक //20___ को उत्पन्न हुआ तथा उसके बाद निरंतर उत्पन्न होता रहा।
9.यह कि इस माननीय न्यायालय को इस वाद की क्षेत्राधिकार प्राप्त है क्योंकि विवाह/अंतिम सहवास/याची का निवास जनपद ___ के अधिकार क्षेत्र में है।
10.यह कि इस वाद पर नियमानुसार न्यायालय शुल्क अदा किया गया है।
#प्रार्थना/RELIEF
अतः माननीय न्यायालय से विनम्र प्रार्थना है कि—
(क) याची एवं प्रतिवादी के मध्य दिनांक //20___ को संपन्न विवाह को हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत शून्यकरण (Decree of Nullity) द्वारा निरस्त घोषित किया जाए।
(ख) प्रतिवादी के धोखाधड़ीपूर्ण आचरण के कारण याची को उचित राहत प्रदान की जाए।
(ग) वाद व्यय (Costs) याची के पक्ष में प्रदान किया जाए।
(घ) न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार कोई अन्य उचित एवं न्यायोचित आदेश पारित करे।
याची
(हस्ताक्षर)
अधिवक्ता
(हस्ताक्षर)
सत्यापन (Verification)
मैं, उपर्युक्त याची, यह सत्यापित करता/करती हूँ कि इस याचिका के अनुच्छेद 1 से 10 तक वर्णित कथन मेरे व्यक्तिगत ज्ञान एवं अभिलेखों के आधार पर सत्य एवं सही हैं तथा इनमें कोई तथ्य असत्य या जानबूझकर नहीं छिपाया गया है।
स्थान : ___
दिनांक : //20___
याची
(हस्ताक्षर) :::
Advisor