Radha Krishnan Upadhyay राधाकृष्णन् उपाध्याय

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01/01/2026

𝑊𝑖𝑠ℎ 𝑦𝑜𝑢 & 𝑌𝑜𝑢𝑟 𝑓𝑎𝑚𝑖𝑙𝑦 𝑣𝑒𝑟𝑦 𝐻𝑎𝑝𝑝𝑦 𝑁𝑒𝑤 𝑌𝑒𝑎𝑟 2026🎉
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।
════ ⋆ 🙏⋆ ════
𝑅𝑎𝑑ℎ𝑎 𝐾𝑟𝑖𝑠ℎ𝑛𝑎𝑛 𝑈𝑝𝑎𝑑ℎ𝑦𝑎𝑦
(𝘼𝙙𝙫𝙤𝙘𝙖𝙩𝙚)

ग़ज़ल के वास्ते लफ़्ज़ों का एक मिज़ान (तराजू) रखते हैं,सुलगते दिल में हम तहज़ीब का लोबान रखते हैं।हमारे नर्म लहज़े का जम...
14/12/2025

ग़ज़ल के वास्ते लफ़्ज़ों का एक मिज़ान (तराजू) रखते हैं,
सुलगते दिल में हम तहज़ीब का लोबान रखते हैं।
हमारे नर्म लहज़े का जमाना अब भी कायल हैं,
हम अहले लखनऊ हैं हम अलग पहचान रखते हैं।

हाथ काट कर रख दूंगा ये नाम समझ आ जाए तोकितनी दिक्कत होगी पता हैराम समझ आ जाए तोराम राम तो कह लोगे परराम सा दुख भी सहना ह...
05/01/2024

हाथ काट कर रख दूंगा
ये नाम समझ आ जाए तो
कितनी दिक्कत होगी पता है
राम समझ आ जाए तो

राम राम तो कह लोगे पर
राम सा दुख भी सहना होगा
पहली चुनौती ये होगी के
मर्यादा में रहना होगा

और मर्यादा में रहना मतलब कुछ खास नहीं कर जाना है..
बस..
बस त्याग को गले लगाना है और
अहंकार जलाना है

अब अपने रामलला के खातिर इतना ना कर पाओगे
अरे शबरी का जूठा खाओगे तो पुरुषोत्तम कहलाओगे

काम क्रोध के भीतर रहकर तुमको शीतल बनाना होगा
बुद्ध भी जिसकी छांव में बैठे वैसा पीपल बनाना होगा
बनना होगा ये सब कुछ और वो भी शून्य में रहकर प्यारे
तब ही तुमको पता चलेगा..
थे कितने अद्भुत राम हमारे

सोच रहे हो कौन हूं मै,?
चलो.. बता ही देता हूं
तुमने ही तो नाम दिया था
मैं..
पागल कहलाता हूं
नया नया हूं यहां पे तो ना पहले किसी को देखा है
वैसे तो हूं त्रेता से.. मुझे कृ..
किसने कलयुग भेजा है

भई बात वहां तक फैल गई है
की यहां कुछ तो मंगल होने को है
के भरत से भारत हुए राज में
सुना है राम जी आने को हैं

बड़े भाग्यशाली हो तुम सब
नहीं, वहां पे सब यहीं कहते है
के हम तो रामराज में रहते थे..
पर इन सब में राम रहते है

यानी..
तुम सब में राम का अंश छुपा है.?
नहीं मतलब वो..
तुम में आते है रहने?

सच है या फिर गलत खबर?
गर सच ही है तो क्या कहने

तो सब को राम पता ही होगा
घर के बड़ों ने बताया होगा..

तो बताओ..
बताओ फिर कि क्या है राम
बताओ फिर कि क्या है राम..
बताओ...

अरे पता है तुमको क्या है राम..?
या बस हाथ धनुष तर्कश में बाण..
या बन में जिन्होंने किया गुजारा
या फिर कैसे रावण मारा
लक्ष्मण जिनको कहते भैया
जिनकी पत्नी सीता मैया
फिर ये तो हो गई वो ही कहानी
एक था राजा एक थी रानी
क्या सच में तुमको राम पता है
या वो भी आकर हम बताएं?

बड़े दिनों से हूं यहां पर..
सबकुछ देख रहा हूं कबसे
प्रभु से मिलने आया था मै..
उन्हें छोड़ कर मिला हूं सब से
एक बात कहूं गर बुरा ना मानो
नहीं तुम तुरंत ही क्रोधित हो जाते हो
पूरी बात तो सुनते भी नहीं..
सीधे घर पर आ जाते हो



ये तुम लोगों के..
नाम जपो में..
पहले सा आराम नहीं

ये तुम लोगों के.. नाम जपो में..पहले सा आराम नहीं
इस जबरदस्ती के जय श्री राम में सब कुछ है..
बस राम नहीं!

ये राजनीति का दाया बायां जितना मर्ज़ी खेलो तुम
( दाया बायां.. अरे दाया बायां..?
ये तुम्हारी वर्तमान प्रादेशिक भाषा में क्या कहते है उसे..?
हां..
वो..
लेफ्ट एंड राइट)

ये राजनीति का दाया बायां जितना मर्ज़ी खेलो तुम
चेतावनी को लेकिन मेरी अपने जहन में डालो तुम
निजी स्वार्थ के खातिर गर कोई राम नाम को गाता हो
तो खबरदार गर जुर्रत की..
और मेरे राम को बांटा तो

भारत भू का कवि हूं मैं..
तभी निडर हो कहता हूं
राम है मेरी हर रचना में
मै बजरंग में रहता हूं
भारत की नीव है कविताएं
और सत्य हमारी बातों में
तभी कलम हमारी तीखी और..
साहित्य..
हमारे हाथों में!

तो सोच समझ कर राम कहो तुम
ये बस आतिश का नारा नहीं
जब तक राम हृदय में नहीं..
तुम ने राम पुकारा नहीं

राम- कृष्ण की प्रतिभा पर पहले भी खड़े सवाल हुए
ये लंका और ये कुरुक्षेत्र..
यूं ही नहीं थे लाल हुए

अरे प्रसन्न हंसना भी है और पल पल रोना भी है राम
सब कुछ पाना भी है और सब पा कर खोना भी है राम
ब्रम्हा जी के कुल से होकर जो जंगल में सोए हो
जो अपनी जीत का हर्ष छोड़ रावण की मौत पे रोए हो
शिव जी जिनकी सेवा खातिर मारूत रूप में आ जाए
शेषनाग खुद लक्ष्मण बनकर जिनके रक्षक हो जाए
और तुम लोभ क्रोध अहंकार छल कपट
सीने से लगा कर सो जाओगे?
तो कैसे भक्त बनोगे उनके?
कैसे राम समझ पाओगे?
अघोर क्या है पता नहीं और शिव जी का वरदान चाहिए
ब्रम्हचर्य का इल्म नहीं.. इन्हे भक्त स्वरूप हनुमान चाहिए
भगवा क्या है क्या ही पता लहराना सब को होता है
पर भगवा क्या है वो जाने
जो भगवा ओढ़ के सोता है

राम से मिलना..
राम से मिलना..
राम से मिलना है ना तुमको..?
निश्चित मंदिर जाना होगा!
पर उस से पहले भीतर जा संग अपने राम को लाना होगा

जय सिया राम
और हां..
अवधपुरी का उत्सव है
कोई कसर नहीं..
सब खूब मनाना
मेरे प्रभु है आने वाले
रथ को उनके
खूब सजाना
वो..
द्वापर में कोई राह तके है
मुझे उनको लेने जाना है
चलिए तो फिर मिलते है,
हमें भी अयोध्या आना है.

सरनागत कहुँ जे तजहिं निज अनहित अनुमानि।ते नर पावँर पापमय तिन्हहि बिलोकत हानि॥बड़े भाई को जन्मदिन की कोशिश: शुभकामनाएं।
03/12/2023

सरनागत कहुँ जे तजहिं निज अनहित अनुमानि।
ते नर पावँर पापमय तिन्हहि बिलोकत हानि॥
बड़े भाई को जन्मदिन की कोशिश: शुभकामनाएं।

03/08/2023

हम ने बुरा भला ही सही काम तो किया
तुम को तो ए'तिराज़ ही करने का शौक़ था

ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नोपरशुराम: प्रचोदयात्।।आपको सपरिवार श्री परशुराम जयंती की अनंत शुभकामनाएं 🙏🏻
22/04/2023

ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नोपरशुराम: प्रचोदयात्।।
आपको सपरिवार श्री परशुराम जयंती की अनंत शुभकामनाएं 🙏🏻

25/01/2023
🪔 शुभ दीपावली🪔पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।आप सभी को सपरिवार पावन पर्व...
24/10/2022

🪔 शुभ दीपावली🪔
पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।
आप सभी को सपरिवार पावन पर्व 🪔 दीपावली🪔 की अनंत शुभकामनाएं।
🙏🏻
राधाकृष्णन् उपाध्याय (एडवोकेट)
📱+91-9918344440

आप सभी को सपरिवार श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत शुभकामनाएं 🙏🏻
18/08/2022

आप सभी को सपरिवार श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत शुभकामनाएं 🙏🏻

30/07/2022

लखनऊ बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को अनंत शुभकामनाएं एवं निर्विवाद चुनाव सम्पन्न कराने के लिए एल्डर कमेटी एवं चुनाव अधिकारियों को साधुवाद।

एकमात्र पक्षी जो एक बाज को चोंच मारने की हिम्मत करता है, वह है- रेवेन । यह बाज की पीठ पर बैठता है और उसकी गर्दन पर अपनी ...
28/07/2021

एकमात्र पक्षी जो एक बाज को चोंच मारने की हिम्मत करता है, वह है- रेवेन । यह बाज की पीठ पर बैठता है और उसकी गर्दन पर अपनी चोंच से काटता है। हालांकि बाज जवाब नहीं देता और न ही रैवेन से लड़ता है। बाज रेवेन के साथ लड़ने में वक्त और ताक़त बर्बाद नहीं करता है। बाज सिर्फ अपने पंख खोलता है और आसमान में ऊँची उड़ान भरने लगता है। उड़ान जितनी ऊँची होती जाती है, रेवेन को सांस लेने के लिए उतनी ही परेशानी होती है और अंत में ऑक्सीजन की कमी के कारण रैवेन गिर जाता है। इसीलिए कभी-कभी सभी लड़ाइयों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं होती है। लोगों के तर्कों , फालतू के सवालों,या उनकी आलोचनाओं के जवाब देने की कोई ज़रूरत नहीं है, बस अपना स्टैंडर्ड ऊपर उठाएं, वो अपने आप ही गिर जाएंगे।

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