14/09/2026
" मैं ईएच कार की इस बात पर बहुत भरोसा करती हूं कि अच्छे इतिहासकार अतीत के बारे में लिखते हुए भी वर्तमान पर नज़र बनाए रखते हैं. वर्तमान पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता. लेकिन इतिहासकार की ज़िम्मेदारी यह है कि वह अपने तर्क को अतीत के प्रमाणों पर टिकाए रखे और यह स्पष्ट कर सके कि वह अतीत की व्याख्या एक ख़ास तरीके से क्यों कर रहा है.
आज यह तर्क दिया जाता है कि अशोक और अकबर जैसे व्यक्तित्व एक ख़ास विचारधारा के प्रतीक बन गए, जबकि इतिहास में दूसरे चुनाव भी संभव थे. क्या यह चयन भी कहीं न कहीं उस नेहरूवादी दृष्टिकोण से तय हुआ था, जो उस समय प्रभावी था?"
इतिहासकार रोमिला थापर का संस्मरण, जस्ट बीइंग, सीगल बुक्स से प्रकाशित हुआ है. इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, लंदन में पढ़ाई, जेएनयू में अध्यापन, यात्राओं और एक जन बुद्धिजीवी के रूप में अपने अनुभवों को समेटा है. इस इंटरव्यू में कारवां के कार्यकारी संपादक हरतोष सिंह बल ने उनसे उनकी किताब, इतिहास के प्रति उनके नज़रिए और समकालीन भारत में इतिहास-लेखन की चुनौतियों और अवसरों पर बातचीत की है. पढ़ें यह साक्षात्कार, लिंक कमेंट बॉक्स में.