Ruby Gupta Advocate

Ruby Gupta Advocate Ruby Gupta
Advocate,
High Court & Civil Court, Lucknow, U.P.

17/09/2025

*ई-चालानों में बड़ी राहत, 2017 से 2021 तक के गैर-कर चालान होंगे खत्म*

*परिवहन विभाग ने 2017 से 2021 तक के गैर-कर चालानों को समाप्त करने का लिया निर्णय*

*अब इन चालानों को पोर्टल पर “Disposed – Abated”या “Closed – Time-Bar” की श्रेणी में दिखाया जाएगा*

*इन चालानों से जुड़े फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और एचएसआरपी जैसे अवरोध भी स्वतः हट जाएंगे*

*पूरी प्रक्रिया 30 दिनों में होगी पूरी, वाहन स्वामी पोर्टल पर जाकर अपनी चालान स्थिति देख सकेंगे*

*30 लाख से ज्यादा मामलों का होगा निस्तारण, अब खत्म होगी पेंडेंसी*

*लखनऊ, 16 सितंबर।* उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने जनता को बड़ी राहत दी है। विभाग ने 2017 से 2021 तक के गैर-कर ई-चालानों को समाप्त करने का फैसला लिया है। अब इन चालानों को पोर्टल पर “Disposed – Abated” (यदि मामला कोर्ट में लंबित था) और “Closed – Time-Bar” (यदि कार्यालय में लंबित था और समय-सीमा निकल चुकी है) की श्रेणी में दिखाया जाएगा। साथ ही इन चालानों से जुड़े फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) जैसे अवरोध भी स्वतः हट जाएंगे। हालांकि, टैक्स से जुड़े चालान इस राहत के दायरे से बाहर रहेंगे।

*एक महीने में पूरा होगा काम*
विभाग के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया 30 दिनों में पूरी कर दी जाएगी। इसके बाद वाहन स्वामी पोर्टल पर जाकर अपनी चालान स्थिति देख सकेंगे। कोर्ट में लंबित प्रकरण “Disposed – Abated” और ऑफिस लेवल पर समय-सीमा निकल चुके प्रकरण “Closed – Time-Bar (Non-Tax)” के रूप में दर्ज होंगे। विभाग ने साफ किया है कि यह केवल क्लोजर है यानि न तो किसी को रिफंड मिलेगा और न ही पुराने चालान दोबारा खोले जाएंगे।

*30 लाख से ज्यादा ई-चालान प्रभावित*
आंकड़ों के मुताबिक 2017 से 2021 के बीच 30.52 लाख ई-चालान बने थे। इनमें से 17.59 लाख का निस्तारण पहले ही हो चुका है, जबकि 12.93 लाख चालान लंबित थे। लंबित चालानों में 10.84 लाख कोर्ट में और 1.29 लाख ऑफिस लेवल पर पेंडिंग थे। अब इन सभी का डिजिटल निस्तारण समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। फ्रंट-एंड पर सभी अवरोध हटेंगे, जबकि बैक-एंड पर पूरा रिकॉर्ड और ऑडिट ट्रेल सुरक्षित रहेगा।

*जनता को क्या करना है?*
▪️यदि आपका चालान 2017–2021 का है और पोर्टल पर अभी भी लंबित या कोई ब्लॉक दिखा रहा है, तो एक महीने बाद ई-चालान/परिवहन पोर्टल पर जाकर स्थिति जांचें।

▪️अगर मामला कोर्ट में पेंडिंग था, तो “Disposed – Abated” दिखेगा और सभी अवरोध हट जाएंगे।

▪️अगर चालान कोर्ट भेजा ही नहीं गया था और समय-सीमा निकल चुकी है, तो “Closed – Time-Bar (Non-Tax)” दिखेगा और उससे जुड़े ब्लॉक हट जाएंगे।

▪️टैक्स वाले मामलों में यह राहत लागू नहीं होगी और वे केवल टैक्स कानून के तहत ही निस्तारित होंगे।

▪️मदद के लिए हेल्पलाइन 149 या नजदीकी RTO/ARTO से संपर्क किया जा सकता है।

*क्यों ज़रूरी था यह फैसला?*
इस फैसले के तहत केवल उन्हीं चालानों को माफ (abated) किया जाएगा जो 31 दिसंबर 2021 तक कोर्ट में लंबित थे। वहीं, जो चालान कभी कोर्ट नहीं भेजे गए और अब समय-सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें भी प्रशासनिक रूप से बंद किया जाएगा। टैक्स से जुड़े चालान, गंभीर अपराध, दुर्घटना या IPC से जुड़े मामले इस राहत से बाहर रहेंगे। यह निर्णय कानून का पालन सुनिश्चित करने, जनता को अनावश्यक चालानों और ब्लॉकों से राहत देने, सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लिया गया है।

*समय-सीमा और निगरानी*
30 दिनों के भीतर सभी पेंडिंग चालानों का पोर्टल पर निपटारा दिखेगा। इसके लिए हर हफ्ते एक डैशबोर्ड पर प्रगति रिपोर्ट डाली जाएगी। एनआईसी पोर्टल में जरूरी बदलाव कर रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहे। टैक्स से जुड़ी देनदारियां, पहले से जमा जुर्माना और कोर्ट आदेश यथावत रहेंगे।

*परिवहन आयुक्त का बयान*
परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा कि यह निर्णय कानूनन सही, जन-हितैषी और पारदर्शी प्रशासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को सुगमता, सुरक्षा और सम्मानजनक सेवा अनुभव मिले। सभी अधिकारी और कर्मचारी तय समय-सीमा में शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें।

Keywords:
E-challan Settlement, Court-Pending Abatement, Office-Pending Closure, UP Act 4/2023, Transport Department, Uttar Pradesh, High Court Orders, Tax Recovery Excluded, BSS 514

Hashtags:

Progress belongs to every Indian and Honourable Prime Minister shows this through his work.From new roads in Bastar to P...
17/09/2025

Progress belongs to every Indian and Honourable Prime Minister shows this through his work.

From new roads in Bastar to PM-SHRI schools, from Ayushman Bharat to Ujjwala, his leadership is changing lives in Chhattisgarh.

In my article for New Indian Express, I share how Modi Ji’s vision of growth and confidence is shaping India and our state.



Narendra Modi PMO India The New Indian Express

17/09/2025
हज और उमराह के लिए पुराने सभी वस्त्र त्यागने होते है और बिना सिला हुआ 2 श्वेत वस्त्र धारण करना होता एक ऊपर एक नीचे (पुरु...
17/09/2025

हज और उमराह के लिए पुराने सभी वस्त्र त्यागने होते है और बिना सिला हुआ 2 श्वेत वस्त्र धारण करना होता एक ऊपर एक नीचे (पुरुषों के लिए) इसके अलावा और कुछ भी धारण नहीं कर सकते....

इसके बावजूद भी हज और उमराह करने वाले लोग कमर में या कांधे पर लटकाया जाने वाला एक बैग ज़रूर रख लेते हैं, कुछ आवश्यक सामग्री हेतु..... जिसमें सबसे अवश्य सामग्री यह भारतीय पासपोर्ट होता है.....

जिसे हज़रत बल दरगाह कांड के कट्टरपंथियों ने मूर्ति कहा, वो सभी कट्टरपंथी जो हज उमरा करने जा चुके है या जाने वाले हैं.....

सबने काबे का तवाफ यानि प्रदक्षिणा इस मूर्ति को अपने पास रख कर ही की है और करेंगे....

पता है इस मूर्ति के बिना सऊदी अरब में रोमिंग नहीं हो सकती.... इसीलिए सदा इसको अपने पास रखते है....

मक्का, मदीना हर जगह, जो भी अराकान करते हैं इस मूर्ति के साथ करते हैं..... इस मूर्ति के बिना मक्का में प्रवेश नहीं मिलेगा.....

तुमने प्रवेश कर भी लिया तो सलमान भाई जेल में डाल देंगे या पैक एंड बैक हो जाओगे, ब्लैकलिस्ट हो जाओगे....

इसी मूर्ति की बदौलत हज कर सकते हो और इस मूर्ति को पाने इससे भी बड़ी एक मूर्ति की ज़रूरत होती है, गांधी बाबा की मूर्ति.... उसमें तो अशोक चिन्ह के साथ गांधी बाबा की मूर्ति भी होती....

पर ये वाली मूर्ति ना तुम जलाते हो ना तोड़ते हो ना फाड़ते हो....

वाह रे दो #गलों,
े_गद्दारी_बंद_करो

जन्मदिन की बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाएँl
18/07/2025

जन्मदिन की बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाएँl

16/07/2025

हाई कोर्ट में नकाब से चेहरा ढककर आई मुस्लिम महिला वकील, जज ने हटाने को कहा तो बोली- ये मेरा मौलिक अधिकार: जानिए फिर क्या हुआ, क्या कहते हैं नियम

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने बहस के दौरान चेहरा दिखाने से इनकार करने वाली महिला वकील सैयद ऐनैन कादरी की बात नहीं सुनी।
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने हिजाब पहनी एक महिला वकील की बात सुनने से इनकार कर दिया।
महिला वकील ने अपना चेहरा ढक रखा था। जब जज ने महिला वकील से अपना चेहरा दिखाने को कहा तो उस महिला वकील ने चेहरा दिखाने से इनकार कर दिया। जज ने कहा कि कोई भी महिला वकील अपना चेहरा ढक कर अदालत में बहस नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति मोक्ष खजुरिया काज़मी और न्यायमूर्ति राहुल भारती की ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि महिला वकीलों को अपना चेहरा ढककर अदालत में उपस्थित होने की अनुमति नहीं है। इसके बाद खंडपीठ ने महिला वकील की बातें सुनने से इनकार कर दिया और इस केस में अगली तारीख दे दी।

दरअसल, यह मामला 27 नवंबर का है। उस दिन ‘मोहम्मद यासीन खान बनाम नाज़िया इकबाल’ से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई हो रही थी। इसी दौरान एक महिला हाई कोर्ट में पेश हुई। उसने खुद को सैयद ऐनैन कादरी नाम की एक वकील बताया और कोर्ट को कहा कि इस मामले को रद्द करने से जुड़ी याचिका में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रही है।

वह कोर्ट में वकील की पोशाक में आई, लेकिन उसने अपना चेहरा ढक रखा था। उस समय मामले की सुनवाई जस्टिस राहुल भारती कर रहे थे। जब न्यायाधीश राहुल भारती ने उस महिला वकील से अपना चेहरा दिखाने का अनुरोध किया तो उसने इनकार कर दिया। महिला वकील ने जोर देकर कहा कि चेहरा ढककर आना उनका मौलिक अधिकार है। इसलिए कोर्ट उससे नकाब हटाने के लिए नहीं कह सकता।

इसके बाद जज राहुल भारती ने 27 नवंबर के अपने आदेश में कहा, “यह न्यायालय याचिकाकर्ताओं के वकील के रूप में खुद को अधिवक्ता सुश्री सैयद ऐनैन कादरी बताने वाली महिला की उपस्थिति पर विचार नहीं करता, क्योंकि कोर्ट के पास एक व्यक्ति और एक पेशेवर के रूप में उनकी वास्तविक पहचान की पुष्टि करने का कोई आधार/अवसर नहीं है।” कोर्ट ने मामले को 5 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।”
इसके बाद कोर्ट ने न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से पूछा कि क्या ऐसा कोई नियम है, जो महिला अधिवक्ताओं को अपना चेहरा ढककर पेश होने या अपना नहीं चेहरा ढकने के न्यायालय के अनुरोध को अस्वीकार करने का अधिकार देता है। इसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने 5 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट की जाँच करने के बाद न्यायमूर्ति मोक्ष खजूरिया काजमी ने 13 दिसंबर को कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा निर्धारित नियमों में ऐसे किसी अधिकार का उल्लेख नहीं है। बीसीआई नियमों के अध्याय IV (भाग VI) की धारा 49(1) (जीजी) के तहत महिला अधिवक्ताओं के लिए ड्रेस कोड का विवरण दिया गया है।

Address

High Court Lucknow
Lucknow
226001

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm
Sunday 9am - 8pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ruby Gupta Advocate posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Ruby Gupta Advocate:

Share