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22/09/2026

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⚖️ इलाहाबाद हाई कोर्ट में केस का स्टेटस कैसे देखें? | Allahabad High Court Case Status Online | Adv Sanjay Sir

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क्या आप इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में अपने केस का स्टेटस ऑनलाइन देखना चाहते हैं? इस वीडियो में आसान तरीके से बताया गया है कि मोबाइल से इलाहाबाद हाई कोर्ट के केस की जानकारी कैसे चेक करें।

इस वीडियो में जानें:
✅ केस नंबर से केस स्टेटस कैसे देखें
✅ CNR नंबर से केस की जानकारी कैसे प्राप्त करें
✅ केस की अगली तारीख कैसे देखें
✅ आदेश (Order/Judgment) की जानकारी कैसे देखें
✅ केस की वर्तमान स्थिति ऑनलाइन कैसे चेक करें
✅ इलाहाबाद हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर केस सर्च करने का तरीका

⚖️ कानूनी जानकारी एवं अपडेट के लिए जुड़े रहें — Adv Sanjay Sir

📞 संपर्क: 7380371030 / 9005574763

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CourtCaseStatus AllahabadHighCourtCase AdvSanjaySir HighCourt CourtCase LegalInformation LegalUpdate HindiLegalInformation

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यह वीडियो सामान्य कानूनी एवं शैक्षणिक जानकारी के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी विशेष मामले में कानूनी सलाह के लिए योग्�

21/09/2026

MP High Court Case Status कैसे देखें? | जबलपुर हाई कोर्ट प्रकरण की स्थिति ऑनलाइन चेक करें ⚖️https://mphc.gov.in/case-statusऑनलाइन केस स्टेटस देखने के चरणमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।होम पेज पर 'प्रकरणों की स्थिति' (Case Status) विकल्प पर क्लिक करें।आप निम्न विवरणों में से किसी एक का उपयोग करके खोज कर सकते हैं:केस नंबर और केस प्रकार तथा वर्षसीएनआर (CNR) नंबर (यूनिक केस कोड)पार्टी का नाम (यानी याचिकाकर्ता या प्रतिवादी का नाम)अधिवक्ता (Advocate) का नामकैप्चा कोड भरकर खोजें बटन पर क्लिक करें।अन्य उपयोगी लिंक्सआदेश और निर्णय: निर्णय / आदेश अनुभाग से आप हाल के फैसले डाउनलोड कर सकते हैं।दैनिक वाद-सूची: आज की सुनवाई के लिए कारणसूची (Causelist) देख सकते हैं।जिला अदालतें: यदि मामला जबलपुर जिला न्यायालय का है, तो जिला न्यायालय पोर्टल का उपयोग करें।यदि आप चाहें, तो मुझे अपना केस नंबर, वर्ष या पार्टी का नाम बता सकते हैं, और मैं आपको इसे खोजने का सही तरीका बता सकता हूँ।MPHCप्रकरणो की स्�

12 सितंबर 2026 (शनिवार) को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) आयोजित होने जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेव...
09/09/2026

12 सितंबर 2026 (शनिवार) को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) आयोजित होने जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 12 सितंबर 2026 की National Lok Adalat की सूचना प्रकाशित है। ⚖️ 12 सितंबर की लोक अदालत में क्या होगा?
लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति से मामलों का शीघ्र और सरल निपटारा करना है। इसमें उपयुक्त मामलों को समझौते के आधार पर निपटाया जाता है।
आम तौर पर इनमें शामिल हो सकते हैं:
🚗 मोटर वाहन/ट्रैफिक चालान से संबंधित मामले
💰 बैंक एवं वित्तीय विवाद
🏠 सिविल विवाद
🤝 समझौते योग्य आपराधिक मामले
👨‍👩‍👧 वैवाहिक/पारिवारिक विवादों के कुछ मामले
⚖️ न्यायालय में लंबित तथा कुछ Pre-Litigation मामले
हालांकि हर केस लोक अदालत में नहीं निपटाया जा सकता—मामले की प्रकृति और समझौते की कानूनी संभावना महत्वपूर्ण होती है।
📌 उत्तर प्रदेश के लिए खास बात
उत्तर प्रदेश में 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए UP State Legal Services Authority द्वारा आधिकारिक सूचना जारी की गई है।

09/09/2026
08/09/2026

धारा 41A CrPC का टाइटल:

⚖️ धारा 41A CrPC — पुलिस द्वारा उपस्थिति का नोटिस

“Notice of appearance before police officer”
अर्थात पुलिस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस।

यह धारा उन मामलों में लागू होती थी जहाँ पुलिस को गिरफ्तारी आवश्यक न लगे, तो व्यक्ति को नोटिस देकर जांच में उपस्थित होने के लिए बुलाया जाता था।

📌 महत्वपूर्ण: 1 जुलाई 2024 से CrPC की जगह BNSS, 2023 लागू है। CrPC की धारा 41A का वर्तमान समकक्ष प्रावधान BNSS की धारा 35(3) है।

08/09/2026

Adv. Aanchal Baaliyan | Advocates ke liye Goa se badi update!
Goa Assembly ne Goa Advocates Protection Bill, 2026 pass kar diya hai. 👩‍⚖️👨‍⚖️
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06/09/2026

कोर्ट में केस दर्ज करें: आप अपने वकील के जरिए सीधे कोर्ट में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धारा 156(3) के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कराने या प्राइवेट शिकायत (Private Complaint) दर्ज करने की अर्जी दे सकते हैं। पुलिस किसी भी मुजरिम या आरोपी को लाठी-डंडों से नहीं मार सकती है। भारतीय कानून के अनुसार, पुलिस के पास किसी को भी प्रताड़ित करने, मारपीट करने या थर्ड डिग्री (Third Degree) का इस्तेमाल करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पुलिस का काम आरोपी को पकड़कर अदालत (Court) के सामने पेश करना है, न कि उसे सजा देना।अगर पुलिस किसी के साथ मारपीट करती है, तो यह गैर-कानूनी है और आप इसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठा सकते हैं।कानून क्या कहता है?संविधान का अनुच्छेद 21: हर नागरिक को सम्मान से जीने का अधिकार देता है, चाहे वह मुजरिम ही क्यों न हो।डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य गाइडलाइंस: सुप्रीम कोर्ट का साफ नियम है कि गिरफ्तारी के समय पुलिस कोई मारपीट नहीं करेगी और आरोपी की हर 48 घंटे में मेडिकल जांच होग�

03/09/2026

जनता का कहना है कि IGRS पर शिकायत दर्ज तो हो जाती है, लेकिन सुनवाई के नाम पर अक्सर सिर्फ कागजी कार्रवाई रह जाती है। शिकायत के बाद बिना मौके पर सही जांच किए रिपोर्ट लगा दी जाती है, और शिकायतकर्ता अपनी समस्या लेकर फिर अधिकारियों के चक्कर लगाता रहता है। कई लोगों का आरोप है कि IGRS पर शिकायत का निस्तारण ऑनलाइन दिख जाता है, लेकिन जमीन पर समस्या जस की तस रहती है। जनता पूछ रही है—अगर पीड़ित की वास्तविक सुनवाई ही नहीं हुई, तो शिकायत का निस्तारण आखिर कैसे सही माना जाए?

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