08/07/2026
#अंधे_कानून_और_मक्कार_लोग
देश का कानून और कानून व न्याय व्यवस्था अत्यंत दयनीय हैं..आज सबसे ज्यादा महिला कानून व SCST एक्ट का दुरुपयोग होता है..तमाम निर्दोष बेचारे पहले झूठे FIR/परिवाद में जेल झेलते हैं और उसके बाद भ्रष्ट पोलिस,थाना और फिर कोर्ट, कचहरी का तिलिस्म झेलते हुए सालों साल कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहते है ऊपर से झूठे मुकदमें में सजा भी हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं..
देखिए कैसे एक पुजारी से एक कथित शोषित वंचित अपना दुपट्टा खोलकर लिपट रही है...!!
उनकी धोती भी खोलने की कोशिश कर रही है , ताकि इनको फंसाकर जमीन कब्जा कर सके...!!
भाई वीडियो बना रहा है ... !!
विचार कीजिए क्या ये शोषित है ... ???
सीकर के गणेड़ी गांव की वायरल घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर किसी पुरुष द्वारा किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार होता है, तो समाज और कानून सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। यह होना भी चाहिए।
लेकिन यदि कोई व्यक्ति—चाहे वह महिला हो या पुरुष—जानबूझकर किसी निर्दोष को फँसाने की साज़िश रचता है, झूठा आरोप लगाता है या किसी की प्रतिष्ठा नष्ट करने की कोशिश करता है, तो क्या उसके खिलाफ भी उतनी ही सख्त कार्रवाई होगी?
क्या कानून उन लोगों के खिलाफ भी समान कठोरता दिखाएगा जिन्होंने:
👉 किसी निर्दोष व्यक्ति या संत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की।
👉 अपने लिंग का अनुचित लाभ उठाकर किसी को फँसाने का प्रयास किया।
👉 कानून का दुरुपयोग करके निर्दोष लोगों को परेशान किया।
👉 निजी स्वार्थ के लिए किसी का मानसिक, सामाजिक या शारीरिक उत्पीड़न किया।
अगर वास्तव में “बेटा-बेटी एक समान” और “कानून सबके लिए समान” है, तो कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ भी निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए—चाहे वे महिला हों या पुरुष।
न्याय का अर्थ किसी एक पक्ष का साथ देना नहीं, बल्कि सत्य और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय करना है