Manav Seva Kotkhai V/S Crime

Manav Seva Kotkhai V/S Crime All necessary services . Free & selfless, 24 hours. Expert in: human right, women problems, legal

All services are free and selfless.All kinds of emergency services are available for 24 hours.primary help provided by only a phone call.This sansthan is regd.for more than 40 cells.for more details visit http://www.manavsevasansthan.com

11/09/2023

साहिब, बस कसूर सिर्फ इतना था, वह बेजुबान आवारा था, बेसहारा था, अच्छी नसल का होता तो 40 लाख की गाड़ी में घूमता, ऊंची कोठी के प्रांगण में मलमल के बिस्तर पर सोता, कुदरत ने ही जब मजाक करते हुए बेजुबान और बेसहारा कर दिया तो इस में पृथ्वी की सब से सर्वश्रेष्ठ मानव जाति का क्या कसूर, ठेका थोड़े ही ले रखा आसपास के सभी बेसहारा प्राणियों के संरक्षण का,
++++++++++++
पोस्टमार्टम द्वारा निर्मला धर्माइक, अध्यक्षा, मानव सेवा कोटखाई,
+++++++++++
दिनांक 5 सितंबर 2023 को सायं के वक्त मानव सेवा कोटखाई के हेल्पलाइन नंबर पर देहली से माननीय सांसद मेनका गांधी की संस्था पीएफए की ओर से सहयोगात्मक रूप में एक सूचना दर्ज होती हैं जिसमे कहा जाता है कि देव भूमि हिमाचल के जिला बिलासपुर के बरमाणा में एक तेज गति का वाहन एक बेसहारा कुत्ते को कुचल देता है, किसी बाहरी राज्य के पर्यटक ने कुत्ते के जिस्म से निकलती रूह की विचलित और भावुक होने वाली वीडियो पीएफए के हेल्पलाइन पर फॉरवर्ड कर दी, वहां से सहयोग के लिए सूचना मानव सेवा कोटखाई के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर्ता की पहचान सहित दर्ज हो गई, शिकायत कर्ता की पहचान सार्वजनिक न करने का शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया, मानव सेवा कोटखाई ने किसी बेजुबान की जान बचाने के लिए सहयोग के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस कंट्रोल रूम शिमला को लिखित सूचना फॉरवर्ड करते हुए सहयोग मांगा गया, हिमाचल प्रदेश कंट्रोल रूम शिमला ने भी मानव सेवा कोटखाई की शिकायत को शिकायत नंबर 292235 दर्ज करते हुए जिला बिलासपुर के संबंधित थाना बरमाना को सहयोग करने के निर्देश दिए, बरमाणा पुलिस मानव सेवा कोटखाई के कार्यालय से संपर्क साधते हुए, अविलंब सहयोग करते हुए आधी रात को घायल कुत्ते का घटना स्थल पर ही प्राथमिक उपचार कर दिया, जिसके लिए मानव सेवा कोटखाई द्वारा बरमाना पुलिस का आभार, किंतु बरमाणा पुलिस से एक चूक हो गई, उन्होंने उपचार के बाद कुत्ते को घटना स्थल पर ही छोड़ दिया,
2. रात खुलने पर दिनांक 6 सितंबर 2023 को संस्थान ने घायल कुत्ते को घटना स्थल से रेस्क्यू करने हेतु संबंधित क्षेत्र के प्रधान महोदय से फोन कॉल के माध्यम से सहयोग मांगा कि कि घायल कुत्ते को घटना स्थल से हटा कर किसी सुरक्षित स्थान पर रखे, ताकि धूप और बारिश से बच जाए, संबंधित क्षेत्र की प्रधान महोदय एक महिला है, जब संस्थान ने संबंधित क्षेत्र की महिला प्रधान से फोन कॉल के माध्यम से सहयोग मांगा तो उन्होंने केवल एनजीओ का नाम सुनते ही फोन काट दिया,
3. इसके बाद संस्थान ने तुरंत थाना बरमाना से पुनः संपर्क साधा तो आग्रह पर थाना बरमाना ने प्रधान साहिबा के पति का नंबर दिया, किंतु प्रधान महोदय भी कहां फोन उठाने वाले थे, मानव सेवा कोटखाई द्वारा थाना बरमाना से पुनः सहयोग मांगते हुए किसी अन्य पंचायत प्रतिनिधि का फोन नंबर मांगा, थाना बरमाना द्वारा दो नंबर प्रदान किए गए, पहला नंबर उप प्रधान महोदय का था, जिसके प्रोफाइल पिक पर प्रेस ( मीडिया) का लोगो था, साफ था उप प्रधान महोदय एक पत्रकार होने का प्रभाव दिखाते हुए अपना नाम बताने से इंकार करते हुए कहा कि इस संदर्भ में प्रधान से संपर्क करे, और फोन काट दिया, अब बारी संबंधित क्षेत्र के वार्ड मेंबर की थी, उन्होंने भी कहा कि मेने सूचना प्रधान महोदय को दे दी है, मैं कुछ नही कर सकता,
4. अब संस्थान ने दोबारा बरमाना पुलिस से संपर्क साधा, कहा कि अब हमे एसडीएम महोदय का नंबर उपलब्ध करवाए, पुलिस से इसी बीच महिला प्रधान से संपर्क साधा, और तुरंत महिला प्रधान का कॉल आ गया, इसी बीच प्रधान महोदया से संस्थान सारा विवरण सांझा कर ही रहा था कि प्रधान पत्नी के हाथ से पति ने फोन छिनते हुए संस्थान से कहा कि इस नंबर पर दोबारा कॉल नही आना चाहिए जब तक कि मैं कॉल वापिस न करू, साफ था, प्रधान महोदया का पति अपनी पत्नी की शक्तियों का उपयोग कर संस्थान को डरा धमका रहा था, कहा कि हम घटना स्थल पर है, कुत्ता रात को ही बीबी उपचार के बाद कही भाग गया है, जब कुत्ता मिलेगा तो आपको सूचित कर दिया जाएगा,
5. इस के बाद संस्थान ने बरमाना पुलिस को लिखित ऑनलाइन आवेदन किया, कहा कि घटना स्थल की वीडियो ग्राफी के साथ जीडी एंट्री दर्ज करते हुए पुष्टि करे कि घायल कुता घटना स्थल पर है या नही, बरमाणआ पुलिस ने भी तुरंत सहयोग करते हुए घटना स्थल की वीडियो ग्राफी करते हुए सायं के वक्त पुष्टि की, कि घायल कुता अभी सांय के वक्त भी घटना स्थल पर हैं,
6. अब रात खुलने के बाद तीसरे दिन संस्थान ने संबंधित क्षेत्र के उप प्रधान से संपर्क किया, कहा कि अपने घायल कुत्ते को घटना स्थल से रेस्क्यू करने के लिए क्या उपाय किए, उप प्रधान ने फिर कहा कि कुत्ता घटना स्थल पर नही है, किसी कार्य से मैं पूरे दिन घटना स्थल पर था, मुझे घायल कुत्ता कही नजर नही आया, उप प्रधान महोदय ने आगे कहा कि कल रात मेने बरमाना पुलिस से भी बात की हैं उहोंने भी कहा कि कल रात मेरी पुलिस से बात हुई उन्होंने भी कहा कि कुत्ता घटना स्थल पर नही है उपचार के बाद कुत्ता कही भाग गया था,, उप प्रधान महोदय ने हर विषम परिस्थितियों में 24 घंटे, समाज का हर असाधारण कार्य करने वाली संस्था को हल्के में ले लिया, उप प्रधान महोदय को यह पता नही था कि पुलिस ने दोबारा वीडियो ग्राफी के साथ संस्थान के कार्यालय को दोबारा पुष्टि कर ली कि कुत्ता दूसरी रात भी घटना स्थल पर सड़क के किनारे ही है, वीडियो में साफ दिख रहा था कि कुत्ता जिंदगी की अखरी जंग लड़ रहा हैं, साफ था उप प्रधान महोदय, एक पंचायत प्रतिनिधि का कर्तव्य निभाने से पहले पत्रकार होने का ऐसे एहसास दिला रहे थे जेसे किसी कलेक्टर के उच्चतम पद पर हो , जेसे जो उहोंने कह दिया, वह पत्थर की लकीर, मानो पुलिस प्रशासन पत्रकार की कलम के इशारे पर कार्य करती हो,
7. जब बरमाणा में संस्थान को पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग नही मिला तो, संस्थान ने सब से पहले बरमाना के कई एनजीओ प्रतिनिधियों, डॉग प्रेमियों, समाज सेवियों, स्थानियों दुकानदारों से फोन पर संपर्क किया, विशेष कर उन संस्थाओं से जिन्होंने करोना संकट में (पब्लिक दान पर) गरीब सहयोग करने का लगातार ढिंढोरा पिटा था, किंतु कोई भी घायल कुत्ते को घटना स्थल से किसी सुरक्षित जगह पर रखने और उपचार करना तो दूर की बात किसी घायल बेजुबान के मुंह में पानी की दोया बूंद डालने को त्यार नही था,
8. अब संस्थान के लिए एक चुनौती थी, संस्थान चाहता तो उसी वक्त हिमाचल सचिवालय की हेल्पलाइन का उपयोग करता, एक ही रात में घायल कुत्ते को रेस्क्यू करवाता, अब संस्थान दो दिन ओर शांत हो गया, संस्थान बरामाना क्षेत्र के सरकारी तथा गैर सरकारी तंत्र को परखना चाहता था, कि क्या किसी में कोई भावना बची हैं या नही ?
9. पूरे सात दिन में किसी का दिल नही पसीजा, केवल पशु चिकित्सा केंद्र ने केवल एक बार उपचार कर पल्ला झाड़ दिया कि अगर कुत्ते को इंजेक्शन भी लगाना तो कोई हाथ नहीं लगता, सब दूर से तमाशा देखते,हम अकेले कुछ नही कर सकते,
10. इतिहास गवाह हैं, बलिदान क्रांति लाता है, सस्थान भी इसी थ्योरी पर ही कार्य कर रहा था, अगर कुत्ते की जान चली गई तो संस्थान बरमाणा के उन सभी दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा जिस से भविष्य में सुधार हो, पृथ्वी का कोई भी प्राणी तडप तडप कर मरने को मजबूर न हों, सात दिन बीत गए, बरमाणा में मेला था, साहिब मेला था तो घायल कुत्ता मेले के इर्द गिर्द क्षेत्र ) परिसर में तीव्र दुर्गंध का कारण बनता, इस लिए घायल कुत्ते को किसी ने सड़क से बाहर झाड़ी में फेंक दिया, तस्वीर मानव सेवा कोटखाई के हेल्पलाइन में दर्ज हो गई,अब संस्थान ने अविलंब संबंधित क्षेत्र के एसडीएम महोदय से लिखित ऑनलाइन संपर्क किया, एसडीएम कार्यालय तुरंत हरकत में आया, संबंधित पंचायत, संबंधित पशु चिकित्सा केंद्र को घटना स्थल पर सहयोग करने के निर्देश दिए गए, अब एक समस्या और खड़ी हो गई, बरमाना से बेसहारा, बेजुबान ट्रामा सेंटर केवल 15 किलोमीटर दूर है, अगर टैक्सी का उपयोग भी किया जाए तो शायद 500 रुपए ही लगेगे, अब बरमाणा का कोई भी बुद्धिजीवी घायल कुत्ते को केवल 15 किलोमीटर दूर छोड़ने को तैयार नही, अब इस से पहले गंभीर समस्या और पशु चिकित्सा केंद्र की टीम घटना स्थल पर, कुता एक गहरी बड़ी झाड़ी में फेंका गया कि दो चार के बस की तो बात ही नही कि कुत्ते को बाहर खींचा जाए, अब पूरे दिन की कढ़ी मेहनत, जिसमे पशु उपचार कर्मियों का सहयोग भी सब से ऊपर, कुत्ते को झाड़ी से बाहर निकाला गया, फिर खुले आसमान के नीचे है, पर किसी के पास 15 किलोमीटर दूर ट्रामा सेंटर तक छोड़ने का कोई विकल्प नही, जेसे किसी को कारगिल की पहाड़ी पर करनी है, जेसे कभी भी जान जा सकती हैं, जेसे कश्मीर से कन्या कुमारी का लम्बा सफर, जो समय और पेट्रोल खर्च के अभाव में कभी पूरा नहीं किया जा सकता, अगर सफर कही सौ दो सौ किलोमीटर से ज्यादा होता तो पहले संबंधित क्षेत्र के उन निवासियों को हार्ट अटैक आता जो इस घटना के पात्र है, जो इस घटना को रोज अपनी आंखों से देख रहे है,
11. अब मानव सेवा कोटखाई की तरफ से हिमाचल सचिवालय को तिथि, क्रम, के अनुसार पूरे प्रकरण की शिकायत दर्ज की जायेगी और दोषियों पर निलंबन की कार्यवाही की मांग की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई बेसहारा जीव मरते वक्त दो बूंद पानी पीने के लिए न तरसे,
=============
देव भूमि हिमाचल की जिला शिमला की पूरी तरह आदर्शवादी, पूरी तरह गैर राजनीतिक संस्था मानव सेवा कोटखाई सभी विभागों का सम्मान करती हैं, किंतु
यह कमेंट उन लोगो के लिए हैं जो इस पूरे प्रकरण पर सात दिन से नजरे बंद किए हुुए है, जिन्होंने शर्मसार करने वाली मानवता की सारी हदें पार कर ली,
++++++++++++
हमसे जुड़ने के लिए, व्हाट्सएप हेल्पलाइन 94184 67733 अप अपने क्षेत्र की आपात, अपराध या गरीब से संबंधित कोई भी समस्या बताए, पुलिस प्रशासन के साथ समस्या का समाधान करने के लिए प्रयासरत रह कर जन कार्य को सहयोग दे, अगर अप एक्टिव है, महिला वर्ग से है तो अवश्य संस्थान को ज्वाइन करे,
जय हिंद,
***********
उत्कृष्ठ प्रतिभा के लिए, हिमाचल सरकार, प्रशासन, हिमाचल विशेषकर हिमाचल सरकार द्वारा दर्जनों बार रिवार्ड दे कर सम्मानित संस्था मानव सेवा कोटखाई,

 े_अपराध_का_पीछा, हम करते हैं अप्रिय घटनाओं का पोस्टमार्टम, हम करते हैं खबरों की मुरम्मत @ मानव सेवा कोटखाई :****†******...
31/08/2023

े_अपराध_का_पीछा, हम करते हैं अप्रिय घटनाओं का पोस्टमार्टम, हम करते हैं खबरों की मुरम्मत @ मानव सेवा कोटखाई :
****†*******
आजकल सोशल मीडिया में एक पोस्ट कॉपी पेस्ट करते हुए तेजी से वायरल हो रही हैं, " मैं फेसबुक और मेटा को निजी फोटो वायरल करने की अनुमति नही देता", इस पोस्ट के माध्यम से फेसबुक और फेसबुक के वर्जन मेटा को एक कानूनी नोटिस एवम चेतावनी के रूप में वायरल किया जा रहा हैं, अब प्रश्न यह उठता कि "फेसबुक और मेटा" आप से कब आपकी आज्ञा के लिए आपकी खुशामद कर रहे है जब कि तथ्य इस के विपरीत यह कि आपको मेटा ज्वाइन करने के लिए कई बार एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है, मेटा केवल निरंतर सक्रिय सदस्य को ही अपनी सदस्यता देता हैं, 50 प्रतिशत ऐसे आवेदन है जिसे मेटा उसकी सदस्यता के लिए स्वीकार ही नही कर रहा हैं, गुगल सर्च पर इस प्रश्न की लगातार बाढ़ सी आ गई कि " हम मेटा ज्वाइन करने के लिए क्या करे?" फेसबुक मेटा ज्वाइन करने का ऑप्शन ही नही दे रहा ?? वास्तव में मेटा फेसबुक का एक विश्वसनीय व्यवसायिक प्लेटफार्म हैं, जब अप अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से मेटा को ज्वाइन करते तो आपका अकाउंट पेज में परिवर्तित हो जाता हैं उस अवस्था में आपके पेज पर मेटा का अधिकार हो जाता हैं, बाहरी देशों में मेटा लम्बे समय से सेवारत है किंतु भारत में मेटा कुछ वक्त पहले ही लॉन्च हुआ है, साफ है मेटा में विदेशी सदस्य ज्यादा हैं, मेटा एक व्यवसायिक प्लेटफार्म है,अगर अप व्यवसायिक रूप से सक्रिय रहना चाहते तो आपको मेटा को अपनी सही पहचान के रूप में पेन नंबर और अपना बैंक अकाउंट या यूपीआई नंबर सांझा करना होता है, मेटा में हेकरस की भी बाढ़ सी आ गई हैं, साफ है अगर आप धोखे से मेटा के यूजर्स की कोई भी पोस्ट का लिंक ओपन करते तो आपका बैंक खाता पल भर में कभी भी खाली हो सकता है, क्योंकि गृहणियों के लिए या बेरोजगार लोगो के लिए मेटा घर बैठे कमाई का अच्छा साधन हैं, किंतु दूसरी ओर आपका बैंक खाता हेकरस द्वारा कभी भी खाली हो सकता,
फिर अब प्रश्न बार बार यही उठता कि " मैं मेटा को अपनी निजी फोटो सार्वजनिक करने की अनुमति नही देता" अरे "मेटा" आपसे कब आपकी अनुमति मांग रहा है?, मेटा ज्वाइन करने के लिए आपको कई बार कई महीनो का इंतजार करना पढ़ता, आपको फेसबुक पर सक्रिय रहना पढ़ता, अप सक्रिय नही तो आपको फेसबुक मेटा ज्वाइन करने का ऑप्शन ही नही देता, यहां पर अब यही प्रश्न ? आप मेटा की खुशामद कर रहे हो या फिर मेटा आपकी ?
अगर अप एफबी में जरा भी सक्रिय हुए तो मेटा आपकी सेवा बंद कर देगा, आपको मेटा बाहर कर देगा, आपका पेज पुनः अकाउंट में प्रवर्तित हो जाएगा, आपको मेटा पुनः ज्वाइन करने के लिए कई महीनो एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा जब तक अप सक्रिय नही हो जाते,
#सभी_घटनाओं_की_पुष्टि_के_लिए_मानव_सेवा_कोटखाई_ने_फेसबुक_को_मेटा_ज्वाइन_करने_की_रिक्वेस्ट_भेजी, करीब एक महीने बाद फेसबुक ने संस्थान की रिक्वेस्ट को स्वीकार कर दिया और फेसबुक अकाउंट पेज में परिवर्तित कर दिया, संस्थान ने कुछ वक्त तक मेटा में अस्क्रीयता दिखाई, क्योंकि मेटा के कुछ यूजर्स ने संस्थान की सक्रियता को देखते हुए संस्थान को लाभ के उद्देश्य से कुछ स्टार भेजते भेजे, स्टार को रुपयों के रूप में बैंक खाते में परिवर्तित करने के लिए मेटा ने संस्थान से बैंक अकाउंट या यूपीआई नंबर मांगा, संस्थान अस्जमस ने था कि अपने बैंक खाता से संबंधित जानकारी शेयर करे या नही ? संस्थान की सक्रियता को देखते हुए मेटा ने संस्थान को बाहर कर दिया, फेसबुक ने पुनः ज्वाइन करने के लिए "डैश बोर्ड ऑप्शन" ही बंद कर दिया, जब आपके पास मेटा ज्वाइन करने का ऑप्शन ही नही आएगा तो केसे ज्वाइन करोगे, इस के बाद संस्थान ने "गुगल" का निरंतर सहारा लिया, भाई "मेटा" "डैश बोर्ड" के रूप में ज्वाइन करने का ऑप्शन तो खोलो किंतु "मेटा" भाई नही एक बहन के रूप में एक ऐसी रूठने वाली औरत निकली जो जरा सी चूक पर रूठ कर मायके चली जाती हैं, अगर अप मेटा के क्रेक्टर की छानबीन भी करोगे तो भी रूठ कर मायके चली जायेगी अतार्थ कहने का भाव कि अगर आप बार बार डैशबोर्ड के माध्यम से अपने पेज को अकाउंट में और फिर अकाउंट को पेज में परिवर्तित करते रहे तो मेटा आपको छोड़ देगी, आपकी प्रोग्रेस हिस्ट्री भी नष्ट हो जाएगी, मेटा को मनाने के लिए बस एक ही ऑप्शन था, वह ऑप्शन था उसकी मां फेसबुक, क्योंकि मेटा फेसबुक का ही वर्जन है, मेटा तक पुनः पहुंचने के लिए बस एक ही ऑप्शन था, वह था उसका बाप गुगल, गुगल का बस एक ही कहना था,लगातार सक्रिय रहिए, लगातार सक्रियता के कारण ही मेटा का मन आपकी तरह स्वयं ही आ जायेगा जब मेटा को लगे कि अप सक्रिय हैं, अप सुधर चुके हैं, वह मायके से स्वयं ही पुनः लोट आयेगी, आयेगी तभी ही जब उसकी मां फेसबुक *डैश बोर्ड* के रूप में दरवाजा खोलेगी, संस्थान की लगातार सक्रियता के कारण लगातार चार महीने की निरंतर कोशिश के बाद फेसबुक ने डैशबर्ड के रूप में दरवाजा खोला और "मेटा" मायके से वापिस लौट आई, मानव सेवा कोटखाई का अकाउंट पुनः पेज में परिवर्तित हो गया,
मेटा फेसबुक का एक विश्वसनीय वर्जन है किंतु इस प्लेटफार्म में हेकारस का खतरा भी बहुत है, वह हैं आपकी जरा सी भी चूक, "स्टार" हासिल करने के लिए अपने मेटा के यूजर्स का जरा सा भी कही गलत लिंक ओपन कर दिया तो आपका बैंक खाता कभी भी खाली हो सकता हैं, जेसे उदाहरण के रूप में : अगर आपकी मौत सुनिश्चित है तो जरूरी नही आपका कत्ल दहशतगर्द की गलियों में हो, कत्ल आपका आपके घर के अंदर भी हो सकता, वैसे ही जरूरी नही आपका बैंक खाता मेटा ज्वाइन करने से खाली हो जाए, आपका बैंक खाता फेसबुक में सक्रिय हैकर्स यू ही भी खाली कर सकते, इस लिए जागरूकता अप के हाथों में हैं, मेटा के यूजर्स का कोई भी लिंक ओपन करने से पहले सक्रियता बरते, केवल "जागरूकता ही सुरक्षा है" मेटा घर बैठे धन अर्जित करने का अच्छा साधन है ,
े_मुख्य_प्रश्न_पर_वापिस_लौट_ते_है, " मैं फेसबुक और मेटा को कानूनी नोटिस जारी करते हुए अपनी निजी तस्वीरे सांझा करने की आज्ञा नही देता हूं, अरे भाई आपसे फेसबुक कब आज्ञा मांग रहा है ?? आपको तो मेटा ज्वाइन करने के लिए अपने हाथो की उंगलियां अपने मोबाइल के कीपैड पर कई महीनो घिसनी पढ़ेगी, तभी आपको मेटा ज्वाइन करने की इजाजत देगा, फिर हम बिना किसी विश्लेषण के हर किसी भी पोस्ट को कॉपी कर पेस्ट कर देते है जो हमारी सोचने समझने की क्षमता को दर्शाता हैं, जब भी कोई पोस्ट को शेयर करे, काफी मंथन के बाद ही शेयर करे, समाज के एक जागरूक नागरिक बने और समाज निर्माण में अपनी अहम भूमिका सुनिश्चित करे,
सम्मान सहित,
अध्यक्षा, निर्मला धरमेइक, राष्ट्रीय स्तरीय वर्किंग संस्थान मानव सेवा कोटखाई
****************
( आपात और अपराध के संदर्भ में पूरे हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश पुलिस के साथ 24 घंटे की तीव्र की ऑनलाइन सेवाए उपलब्ध, केवल फोन कॉल या मेसेज के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करे, कार्यालय व्हाट्स ऐप हेल्पलाइन 94184 67733,
ज्वाइन व्हाट्सएप ग्रुप मानव सेवा कोटखाई 94184 67733 )
जन हित में जारी
***************

 #हमें_करते_है_अपराध_का_पोस्टमार्टम :पोस्टमार्टम द्वारा निर्मला धरमेइक, चेयरपर्सन, मानव सेवा कोटखाई,+++++++++++++++++पूर...
25/07/2023

#हमें_करते_है_अपराध_का_पोस्टमार्टम :
पोस्टमार्टम द्वारा निर्मला धरमेइक, चेयरपर्सन, मानव सेवा कोटखाई,
+++++++++++++++++
पूर्व की तरह वर्तमान की फिर असाधारण चुनौती, आखिर बागवान कब आर्थिक शोषण से बाहर आएगा ?? वर्तमान में बागवान के हितों के लिए हिमाचल की वर्तमान सरकार (बागवानी मंत्रालय ने) सेब की फसल को किलो के हिसाब से बेचने का निर्णय ले लिया जो फैसला स्वागत योग्य, किंतु इस फैसले को लागू करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करने के तत्पश्चात भी गाड़ी पटरी पर नही आयेगी, इस का मुख्य कारण हैं कि सेब को किलो के हिसाब से बेचने के लिए सेब विक्रय केंद्रों का आधुनिक न होना, सभी जानते है कि सेब विक्रय केंद्रों में सेब को अनलोड कर रखने तत्पश्चात तोलने के लिए शेड की सुविधा नही होगी, सेब को कहां अनलोड करेगे, किस तरह तोलेगे? सेव सीजन में भारी बरसात भी होती हैं दूसरा खतरा कार्टन को क्षतिग्रस्त होने का, फिर अगली मुश्किल ट्रेफिक जाम लगने की, साफ है अनेक विषम परिस्थितियों के कारण सेब किलो में बेचना असंभव है जब तक सेब मंडियां आधुनिक तकनीक से लेंस नही हो जाती, अगर मन लिया इन सब मंडियों को आधुनिक तकनीक से लेंस भी कर दिया जाए तो सेब बेचने के बाद उसी वक्त बाहरी राज्य की लोडिंग नही हो पाएगी क्योंकि तोलने में जरूरत से ज्यादा समय नष्ट हो जायेगा, सेब सड़ने का खतरा लगातार बना रहेगा, जिस कारण व्यापारी नुकसान से बचने के लिए सेब को ज्यादा कीमत पर नही लेगा, तोलने के लिए अतिरिक्त स्टाफ भी रखना पढ़ेगा, उस लेबर चार्जेज को जोड़ कर व्यापारी सेब को पहले ही कम कीमत पर लेगा, आप गणित चाहे जिस भी छोर से कर लो, आखिर गाज बागवानों पर ही गिरनी हैं ???
2. किलो के हिसाब से सेब बेचना अतर्थ्थ व्यापारियों को बागवानों के आर्थिक शोषण से मुक्त करना है, फैंसला स्वागत योग्य हैं किंतु इस का सीधा सा अभिप्राय हैं पेटी में सेब के अतिरिक्त वजन को कम करना, अगर ऐसा है सरकार को अगली साल टेलिस्कोपि कार्टन को प्रतिबंधित कर यूनिवर्सल कार्टन को लागू करना, सेब बोली में बिकेगा, अतिरिक्त वजन भी नही जायेगा, सेब तोलने में समय भी खर्च नहीं होगा, सेब बिकने के बाद फ्रेश माल उसी वक्त बाहरी राज्य की लोडिंग भी होगी जिस से व्यापारियों भी नुकसान से बच जायेगे,
3. अब एक और समस्या लगातार देखने को मिल रही हैं, 24 किलो के वजन से कार्टन के दो किलो को काट देना, अतर्थ खाली पेटी के पैसे बागवानों को नही मिलेगे, अगर हम अंतर्राष्ट्रीय नियम तथा भारतीय कानून के हिसाब से भी नियम को फॉलो करे तो पैकिंग का खर्च बागवानों को देना होगा, क्योंकि अगर अप मंडी से एक पेटी सेब लेते हैं, उस का वजन 24 किलो, व्यापारी आपको 24 किलो बिल भी देगा, अगर उस में सेब 22 किलो निकलता है तो नियमो के तहत उसका चालान भी होना सुनिश्चित है अगर कोई कोर्ट पहुंच जाता हैं तो, अगर अप सेब किलो के हिसाब से बेच रहे तो जरूरी नही कि अप महंगा कार्टन उपयोग करे, अप सस्ता कार्टन या पॉली बैग भी उपयोग कर सकते, आढती आपके सेब बेचने से इंकार नही कर सकता, किंतु इस विधि से सेब डैमेज होने का खतरा बना रहेगा, एक बार व्यापारी का सेब डैमेज हो गया तो दूसरी बार वह होने वाले नुकसान की कीमत जोड़ कर कीमत कम करेगा, अतारथ ढांक के तीन पात, फिर भी वही बात, आर्थिक शोषण उसी का होना तय हैं जो पूरे साल खेत में काम करेगा, जितनी आय बागवान को एक साल खून पसीना बहा कर अर्जित नही होगी, उतनी आय व्यापारी एक सप्ताह में एसी रूम में बैठ कर अर्जित कर लेगा,
इस लिए हित बागवानों का हो या फिर व्यापारियों का, नुकसान किसी का नही होना चाहिए, पूरी साल खून पसीना बहाने वालो का तो बिलकुल भी नही,
इस प्रकरण को राजनीतिक रूप में न ले, यूनिवर्सल कार्टन को लागू कर सभी स्मायाओं का समाधान करना सुनिश्चित करे, कार्टन निर्माण फैक्ट्री स्टोर की वजह से गत वर्ष टेलेस्कोपि कार्टन प्रतिबंधित करना संभव था इस लिए भविष्य में टेलीस्कोपि कार्टन को प्रतिबंधित कर यूनिवर्सल कार्टन को लागू कर बागवान, व्यापारी तथा सरकार के बीच उतापन विवाद स्वयं ही समाप्त हो जाएगा,
राजनीतिक विषय से दूर रह कर आओ हम सब मिल कर यूनिवर्सल कार्टन को लागू करने का प्रयत्न करे, जो सेब #वजन के हिसाब से नही बल्कि #कवालटी के हिसाब से बिके,
जय हिंद
इति...

 े_अपराध_का_पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम द्वारा : निर्मला घरमेइक, चेयरपर्सन, मानव सेवा कोटखाई,+++++++++++++++ पाक से भाभी आई,...
17/07/2023

े_अपराध_का_पोस्टमार्टम
पोस्टमार्टम द्वारा : निर्मला घरमेइक, चेयरपर्सन, मानव सेवा कोटखाई,
+++++++++++++++
पाक से भाभी आई, भाभी आई, मिठाई बांटों, और पूरे मुहल्ले में जश्न का माहौल,
इसे आप प्रकृति का नियम भी कह सकते है या फिर वैश्विक सत्तर पर मानव द्वारा निर्धारित अटूट नियम, यह कि जिस देश की मिट्टी पर किसी भी व्यक्ति जन्म होता हैं उसे अपने देश की वेश भूषा, खान पान, रहन सहन, बोलचाल, संस्कृति, अपने देश की माटी, अपने देश के झंडे पर गर्व होता हैं, अगर उस व्यक्ति का कोई पारिवारिक सदस्य पुलिस में हो तो देश भक्ति का सवरूप और भी निखर जाता हैं, अगर उस व्यक्ति का पारिवारिक सदस्य सेना में हो तो अपने देश पर मर मिटने का जनून ही अंतिम इच्छा होती हैं,
अब चिंता के पल यह कि, विवेचना वाले तथ्य यह कि हमारी भाभी को चार बच्चे होने के बाद अपनी जन्म की माटी पर गर्व नही रह गया है, वह भी पबजी खेलते खेलते जिस भाभी के पारिवारिक सदस्य पुलिस में भी है और सेना में भी है, उस भाभी को किसी और देश के नागरिक से नही बल्कि अपने दुश्मन देश के नागरिक से प्यार हो जाता हैं, वह भी ऑनलाइन गेम खेलते वक्त, वह भी उस व्यक्ति से जिस की शक्ल भाभी की शक्ल से, शादी विवाह के विषय में जो मैच किया जाता हैं जीरो हैं, अमीर वर्ग नही बल्कि उस गरीब वर्ग के युवक से प्यार हो जाता हैं जो अपने परिवार का अच्छे से पेट पालने में भी सक्षम नही ?, वह भी उस दुश्मन देश के नागरिक से जो नागरिक देश की राजधानी के समीप रहता हैं, ऊपर से धर्म भी मैच नही करता, और अब सब से रोचक तथ्य यह कि जिस को भी आजतक किसी से प्यार हुआ हैं वह प्यार का खुलेआम इजहार करता है, उस देश का बीजा लिया जाता हैं, उस देश में पहुंचने पर खुलेआम सरकार के सामने लिखित में सभी तथ्य को स्पष्ट कर प्यार का इजहार किया जाता हैं, हमारी प्रिय भाभी ने ऐसा कुछ भी नही किया हैं, भारी भरकम पैसे खर्च चोरी छिपे, भारतीय लिबास साड़ी में कई देशों की यात्रा कर चोरी छिपे हमारे देश पहुंच गई, वह भी अपनी कोख से जन्मे चार बच्चों के साथ, इस से विचलित करने वाले तथ्य यह कि इन बच्चों के भारत की जमी पर कदम पढ़ते ही भारत माता की जय के उद्घोष के रूप में नारे भी लगा दिए,
भाभी शब्द का प्रयोग इस लिए कि हम सभ्य देश के नागरिक है, ऊपर से महिलाओ का सम्मान हमारी रघघों में बसा हुआ हैं, हमारे भाई को पसंद आ गई तो समझो हम ने भी स्वीकार कर लिया,
अब महत्वपूर्ण यह कि जब भी हम किसी को विशेष उद्देश्य से शिकार बनाते है तो उस न समझ व्यक्ति की तलाश की जाती है जिसे क, का, कु का ज्ञान न हो, जो व्यक्ति गधे के सम्मान हो, हम अपने भाई को गधा की संज्ञा नही देंगे, एक तो गधे का अपमान होगा क्यों कि यहां पर गधे की अक्ल भाई से ज्यादा लग रही है, और दूसरा हमारे देश की सभ्यता और हमारे संगठन की आदर्शवादिता के कारण सभी तथ्यों को मध्य नजर रखते हुए हमारे उच्चारण में भाई को गधा कहना उचित न होगा, गाय शब्द का उपयोग सही रहेगा, क्योंकि गाय एक ऐसा सरल शब्द हैं जो सादगी का प्रतिक हैं, यहां पर हमारा भाई ही नही बल्कि पूरा मोहल्ला ही गाय की गौ शाला ही निकल गई, भाभी आई और भाभी की सुंदरता पर भाभी के नैन मट्टके का पूरा गांव ही दीवाना हो गया, पूरे मोहले में खुशी का माहोल, मिठाई बांटी गई, उस से भी विचलित करने वाले तथ्य यह कि भाई के पिता अतर्थ हमारे ताऊ ने तो यह बयान दे दिया कि बहु को रानी बना के रखेगे, जिस परिवार की मासिक आय मजदूरी कर केवल दस हजार है वह चार बच्चों सहित पबजी क्वीन को रानी बना देंगे या फिर हमारी भाभी हमारे भाई को राजा बना देगी ?
अंत में को भाभी अपने देश की न हुई, अपने पति की न हुई क्या वह हमारे देश की होगी ? कभी नही, अगर हमारे देश की आदर्शवादिता ने किसी महिला विशेष को भाभी का दर्जा दे भी दिया तो इस का मतलब यह भी नही कि हमारी जांच एजेंसियां इतनी बेखुफ है कि पांचवी फेल हमारी आदरणीय भाभी की ड्रामेबाजी पर यकीन कर लेगी और अंत में जांच पूरी होने पर यही होगा कि गाय के सभाव वाले जेसे हमारे भाई को जेल की चक्की पीसनी पढ़ेगी, उस चक्की से जो आटा पीस कर बाहर आएगा उसे बोरी में भरने के लिए हमारी सक्रिय जांच एजेंसियां न जाने कितने लोगो को जेल की सलाखों के पीछे डालती हैं? यह भविष्य ही बताएगा किंतु इतना तय हैं कि जेल के अंदर उस आटे से रोटी तो हमारी भाभी ही बनाएगी क्योंकि हमारे समाज में महिलाए ही ज्यादातर रोटियां बनाती हैं, वह भी इतनी पतली कि जिससे करवा चौथ का चांद भी दिख जाए, और गोल इतनी की पृथ्वी से भी गोल गोल, अब देखना यह कि पाक की सभ्यता पली पोसी भाभी रोटियां गोल बनती हैं या फिर चतुर्भुज की तरह ?? अगर गोल गोल रोटियां बन भी न पाए तो हमारी जांच एजेंसियां इतनी प्रतिभा की धनी कि भाभी को जेल में एक महीने में ही गोल गोल रोटियां बनाना सिखा देंगी, उन रोटियों को सर्व साधारण के सामने भी प्रदर्शित किया जायेगा कि ताकि भविष्य में सर्व साधारण इसी हरकत करने से डरेगा कि गोल गोल रोटियां बनाने में जेल में कितनी मशक्कत करनी पड़ती, इसी खोफ से लोग गोल गोल रोटियां बनाने के लिए, विशेषकर महिलाए कोई कुकिंग क्लासेज ज्वाइन करेगी न कि पबजी ???
इति.….

 #गरीब_सहायता_सर्वोपरीआप भी खतरों के खिलाड़ी तो मानव सेवा कोटखाई को ज्वाइन करें, व्हाट्सएप ज्वाइनिंग हेल्पलाइन 94184 677...
16/01/2023

#गरीब_सहायता_सर्वोपरी
आप भी खतरों के खिलाड़ी तो मानव सेवा कोटखाई को ज्वाइन करें, व्हाट्सएप ज्वाइनिंग हेल्पलाइन 94184 67733, अप किसी संस्था, युवक मंडल, महिला मंडल से जुड़े या कार्य करने निडरता तो मिलेगी प्राथमिकता, हम देंगे आई कार्ड, निशुल्क सदस्यता,
प्लीज हमारा पेज फॉलो, लाइक और शेयर करे,
मानव सेवा कोटखाई vs क्राइम
https://www.facebook.com/msshimachalpradesh?mibextid=ZbWKwL
एवम
मानव सेवा कोटखाई
https://www.facebook.com/profile.php?id=100066440900498&mibextid=ZbWKwL

Address

शिमला
Kotkhai
171202

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Manav Seva Kotkhai V/S Crime posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Manav Seva Kotkhai V/S Crime:

Share