08/03/2026
"श्रद्धांजलि: अनंत यात्रा पर हमारे आराध्य"
अत्यंत भारी मन और अश्रुपूर्ण नेत्रों से सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे परम पूज्य गुरुदेव, अनंत श्री विभूषित स्वामी सनातन पुरी जी महाराज (शिवपुरी धाम, कोटा) अब हमारे बीच नहीं रहे।
"गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिटे न भेद।"
हमारे प्रिय गुरु महाराज सनातन पुरी जी अब साक्षात शिव में विलीन हो गए हैं। भौतिक रूप से वे विदा हो चुके हैं, लेकिन शिवपुरी धाम का कण-कण उनकी उपस्थिति का अहसास कराता रहेगा।
श्रद्धांजलि कविता (गुरु चरणों में)
भोर भई और मिटा उजाला, सूना हुआ ये धाम,
शिव की शरण में चले गए हैं, लेकर शिव का नाम।
पावन पदचापें थम गईं, मौन हुई वो वाणी,
आँखें नम हैं, मन व्याकुल है, रोती दुनिया फानी।
पाँच सौ पच्चीस ज्योतियों को, जिसने था चमकाया,
कोटा की इस पावन भू को, शिवलोक सा बनाया।
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में, हम वंदन बारम्बार करें,
दिखाना मार्ग हमें सदैव, यही हम करबद्ध गुहार करें।
साक्षात शिव में विलीन हुए, हे दिव्य ज्योति, हे ज्ञान पुंज,
महकता रहेगा सदा यहाँ, आपके तप का उपवन कुंज।
ॐ शांति!
मेरे जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश-पुंज का भौतिक साथ भले ही छूट गया हो, लेकिन उनकी शिक्षाएं और आशीर्वाद सदैव मेरे हृदय में जीवित रहेंगे।
कोटि-कोटि नमन गुरुदेव! आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा हमें सदैव मार्ग दिखाएगी। 🙏 ऊँ शांति 🙏