Criminal n Civil Advocate at Kishanganj

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20/04/2021

Section : 18

Maintenance of wife-

(1) Subject to the provisions of this section, a Hindu wife, whether married before or after the commencement of this Act, shall be entitled to be maintained by her husband during her lifetime.

(2) A Hindu wife shall be entitled to live separately from her husband without forfeiting her claim to maintenance-

(a) if he is guilty of desertion, that is to say, of abandoning her without reasonable cause and without her consent or against her wish, or of wilfully neglecting her;

(b) if he has treated her with such cruelty as to cause a reasonable apprehension in her mind that it will be harmful or injurious to live with her husband;

(c) if he is suffering from a virulent form of leprosy;

(d) if he has any other wife living;

(e) if he keeps a concubine in the same house in which his wife is living or habitually resides with a concubine elsewhere;

(f) if he has ceased to be a Hindu by conversion to another religion;

(g) if there is any other cause justifying her living separately.

(3) A Hindu wife shall not be entitled to separate residence and maintenance from her husband if she is unchaste or ceases to be a Hindu by conversion to another religion.

Adv Rakesh Mishra

29/01/2021

Padma Awards 2021

This year the President has approved conferment of 119 Padma Awards.

Important ones are listed below.

Padma Vibhushan

Second-highest civilian award of the Republic of India, after the Bharat Ratna

Shinzo Abe (Japan) – Public Affairs

S P Balasubramaniam (Posthumous) – Art

Belle Monappa Hegde – Medicine

Maulana Wahiduddin Khan – Others: Spiritualism

Padma Bhushan

Third-highest civilian award in the Republic of India, preceded by the Bharat Ratna and the Padma Vibhushan and followed by the Padma Shri

Krishnan Nair Shantakumari Chithra – Art

Tarun Gogoi (Posthumous) – Public Affairs

Chandrashekhar Kambara – Literature and Education

Sumitra Mahajan – Public Affairs

Kalbe Sadiq (Posthumous) – Others: Spiritualism

17/09/2020

*पुलिस का खात्मा और खारिजी क्या है तथा पुलिस के खात्मा और खारिजी में मूलभूत अंतर क्या है?*

* प्रकरण में खात्मा*:-
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जब किसी मामले की FIR थाने में दर्ज हो जाती है और मामले के अन्वेषण के दौरान अन्वेषणकर्ता अधिकारी(विवेचक) को मामले में इतना पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलता है जितने में मामले का न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जा सके तो ऐसे मामले में पुलिस खात्मा लगाती है।
खात्मा का उल्लेख दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 169 में एवं मध्य प्रदेश पुलिस रेगुलेशन एक्ट के नियम 728 में है कि जब साक्ष्य अपर्याप्त हो तो अभियुक्त का छोड़ा जाना है।पुलिस के लगाए हुए खात्मे को संबंधित प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के यहां प्रस्तुत किया जाता है और मजिस्ट्रेट की न्यायालय से संबंधित मामले के फरियादी/पीड़ित को सम्मन दिया जाता है और उसके बयान न्यायालय में होने के पश्चात ही खात्मे में अंतिम मंजूरी होती है।जब तक न्यायालय से खात्मे को मंजूरी नहीं मिलती है तब तक खात्मा पूर्ण नहीं होता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार न्यायालय खात्मे को अंतिम मंजूरी तब तक नहीं दे सकती है जब तक की वह फरियादी या पीड़ित को सुन न ले। इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने बताया है कि-
Issuing notice to informant by Magistrate on receipt of final report must : On receiving final report from investigating officer, it is mandatory duty of Magistrate to issue notice to the informant (or the injured person or the victim of the offence) to make his submissions against the final report. See :
(i) Bhagwant Singh Vs. Commissioner of Police, AIR 1985 SC 1285 (Three-Judge Bench)
(ii) Sanjay Bansal Vs. Jawajarla Vats, AIR 2008 SC 207

*प्रकरण में खारिजी*:-
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जब किसी मामले में FIR ही झूठी हो अर्थात जिस घटना की रिपोर्ट फरियादी या पीड़ित व्यक्ति ने संबंधित पुलिस थाने में किया है वह प्रथम दृष्टया ही झूठी हो तो उस मामले में पुलिस खारिजी लगाती है।जैसे उदाहरण स्वरुप किसी व्यक्ति ने थाने में रिपोर्ट किया की आमुख व्यक्ति ने मेरे साथ मारपीट कर मेरा सामान लूट लिया है और जिस व्यक्ति के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई गई वह पहले से ही जेल में बंद है रिपोर्टकर्ता के साथ कोई घटना ही नहीं हुई तो ऐसे मामलों में पुलिस खारिजी लगाती है। खारिजी का उल्लेख दंड प्रक्रिया संहिता में कहीं नहीं है बल्कि इसका उल्लेख मध्य प्रदेश पुलिस रेगुलेशन एक्ट के नियम 787 में है।खारिजी रिपोर्ट जिले के वरिष्ठतम मजिस्ट्रेट चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी) के यहां ही केवल प्रस्तुत किया जाता है।

*खात्मा और खारिजी में मूलभूत अंतर*
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१- खात्मा मामले में साक्ष्य के अपर्याप्त होने पर लगाया जाता है जबकि खारिजी मामले की झूठी रिपोर्ट साबित होने पर लगाया जाता है।

२- खात्मे को संबंधित किसी प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के यहां प्रस्तुत किया जा सकता है किंतु खारिजी को सुनने का अधिकार जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को ही है।

३- खात्मा रिपोर्ट की न्यायालय से अंतिम मंजूरी के पूर्व न्यायालय को फरियादी या पीड़ित व्यक्ति को सुना जाना आवश्यक है किंतु खारिजी में न्यायालय को फरियादी या पीड़ित व्यक्ति को सुना जाना आवश्यक नहीं है।

४- खात्मा वाले मामलों में पुलिस फरियादी या पीड़ित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 182 व 211 के अंतर्गत मिथ्या रिपोर्ट करने एवं मिथ्या साक्ष्य देने का का आरोप लगाकर प्रथक से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत नहीं कर सकती है जबकि खारिजी के मामलों में पुलिस भारतीय दंड संहिता की धारा 182 व 211 के अंतर्गत रिपोर्टकर्ता के विरुद्ध में प्रथक से संबंधित न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर सकती है।

५- खात्मा के मामलों में प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट की न्यायालय के आदेश के विरुद्ध संबंधित पीड़ित व्यक्ति अपील प्रस्तुत कर सकता है जबकि खारिजी में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील न होकर रिवीजन(निगरानी) होती है।

जब किसी मामले में विवेचना के दौरान साक्ष्य पर्याप्त होते हैं तो उस मामले को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 170 के अनुसार संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाता है और अन्वेषण समाप्त हो जाने पर पुलिस अधिकारी उस मामले को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(2) के अनुसार न्यायालय में चालान(अंतिम रिपोर्ट)प्रस्तुत कर देता है।
वास्तव में दंड प्रक्रिया संहिता में न तो कहीं भी पुलिस के "चालान" शब्द का और न ही "अंतिम प्रतिवेदन" का उल्लेख है किंतु अन्वेषण समाप्ति के पश्चात दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के अनुसार वह अन्वेषण रिपोर्ट संबंधित न्यायालय में पुलिस के द्वारा प्रस्तुत कर दी जाती है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस संदर्भ में बताया है कि-
Meaning of "charge-sheet" & "final report" u/s 173(2) CrPC : Neither charge-sheet nor final report has been defined in the CrPC. Charge-sheet or final report, whatever may be the nomenclature, only means a report u/s 173 CrPC which has to be filed by the police on completion of investigation. See:-
Srinivas Gundluri Vs. SEPCO Electric Power Corporation, (2010) 8 SCC 206

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16/09/2020
21/07/2020

All friends, wellwishers and Specially resident of Kishanganj.

हमारे किशनगंज में कोरोना विस्फोट हो चुका है, और प्रशाशन बार बार जनता को इसके लिए दोषी मानकर alert जारी करती है, जुर्माना लगाती है। ये सही भी है।
परन्तु, किशनगंज सदर अस्पताल पर कब कोई दिशा निर्देश आएगा? किशनगंज सदर अस्पताल पर कब जुर्माना लगेगा?

किशनगंज सदर अस्पताल में कोरोना testing की प्रक्रिया हद से ज्यादा slow है। सुबह 8 बजे से लोग line लगाकर reception पर पुर्जा कटाते हैं। उस line में कौन positive है और कौन negative, ये कोई नही जानता है। इसके बावजूद अस्पताल की ओर से कोई line management नहीं है।

पुर्जा कटने के बाद 2 बजे तक लोग hospital में ही इधर उधर बिना social distancing के घूमते रहते हैं। इस बीच में किसी serious patient को भी entertain नहीं किया जाता है। पूछने पर बताया जाता है कि 2 बजे साहब आएंगे, फिर आपकी जाँच शुरू होगी।

2 बजे साहब आते हैं, और PPE Kit सिर्फ एक व्यक्ति पहनते हैं और सभी व्यक्ति की जाँच आरम्भ होती है।
इसमें ध्यान देने वाली बात ये है कि सभी व्यक्तियों को Open Place में ही एक ही gloves पहनकर जाँच होती है। बीच में कभी भी ग्लव्स को sanitize तक नहीं किया जाता है।

ऐसी परिस्थिति में, अगर किसी positive व्यक्ति की जाँच का swab दूसरे किसी negative व्यक्ति या जाँच कर रहे technician के हाथ पर आ जाता है, तो वहाँ उपस्थित सभी लोगों की जान खतरे में आ जाती है। परंतु किशनगंज सदर अस्पताल में इन सभी चीजों की अनदेखी खुलेआम की जा रही है।

इसके बाद बारी आती है reports की -

Negative व्यक्ति की रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति को नहीं दी जा रही है। सिर्फ किसी किसी व्यक्ति को एक msg आ जाता है कि आपकी report नेगेटिव है।

Positive व्यक्ति को एक फ़ोन आता है, और mahesh bathna में admit होने के लिए कहा जाता है। यदि वो व्यक्ति agree करता है, तो एक ambulance आकर उनको लेकर चली जाती है।

परंतु अगर वह व्यक्ति Home Isolation की बात करता है, तो उसके यहाँ किसी Doctor की बात तो छोड़िये, एक compounder तक नहीं जाता है। Patient को कहा जाता है कि hospital आकर अपना undertaking submit कीजिये।

ऐसी परिस्थिति में एक Corona Positive व्यक्ति पूरे बाजार होते हुए hospital आकर रिपोर्ट submit करेगा तो क्या वो Community Spread का भागीदारी नहीं होगा ?

Corona Positive व्यक्ति के बार बार request करने पर भी ना ही उसे उसकी कोई Report दी जाती है और ना ही उसे किसी प्रकार का कोई Schedule या medical treatment हेतु कुछ भी बताया जाता है।
जो भी serious patient होते हैं, उनकी भी कोई देख रेख की व्यवस्था किशनगंज सदर अस्पताल में नहीं की जाती है।

ऐसी परिस्थिति में Corona के Community Spread के लिए कौन जिम्मेवार है?

Hospital या Public?????

Public से तो मास्क न पहनने के कारण आप जुर्माना भी वसूल रहे हैं और अपनी कोठी भर रहे हैं।

परन्तु ऐसे ऐसे हजारो विसंगतियां के कारण किशनगंज सदर अस्पताल अथवा पूरे भारत में हजारों Hospitals Corona के Community Spread के जिम्मेवार हैं।
यदि प्रशाशन के द्वारा अब भी नहीं चेता गया, यदि अब भी नहीं इन hospitals के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई तो भारत से कभी भी कोरोना समाप्त नहीं होगा।
😥😞😞😥
🙏🙏🙏
Adv Rakesh Kumar Mishra
Kishanganj.

25/11/2019

Deals in Criminal cases, Civil cases, Family disputes, N.I. Acts.
Panel Lawyer of Krishan sanskriti Nidhi Limited, Kishanganj
Panel Lawyer of Policy Bazar
Panel lawyer of Gau Gyan Foundation

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