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हरियाणा सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के डेटा में पाई जा रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागों को सख्त नि...
11/03/2026

हरियाणा सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के डेटा में पाई जा रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कहा है कि सिक्योरिटी ऑफ सर्विस (Security of Service) पोर्टल पर दर्ज कर्मचारियों की जानकारी में मौजूद त्रुटियों और लंबित मामलों को जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि पात्र कर्मचारियों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ समय पर मिल सकें।

मानव संसाधन विभाग की ओर से जारी निर्देशों में बताया गया है कि पहले भी विभागों को डेटा अपडेट करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कई जगहों पर अभी तक सुधार नहीं किया गया है। इसके कारण OTP जनरेशन समेत कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के अधिकारियों और जिलों के उपायुक्तों को इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए कहा है।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि हरियाणा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 और नियम-2025 के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ डेटा में गड़बड़ी के कारण प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सभी विभागों को तुरंत रिकॉर्ड में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी विभाग की ओर से लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

ये प्रमुख गड़बड़ियां सामने आईं

कई कर्मचारियों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज हैं या बदल चुके हैं।

पोर्टल पर कुछ कर्मचारियों का पद या डेजिग्नेशन दिखाई नहीं दे रहा।

DDO और विभागाध्यक्षों के मोबाइल नंबर भी गलत दर्ज पाए गए हैं।

कई सरकारी संस्थानों के DDO पोर्टल पर सक्रिय नहीं हैं।

कुछ मामलों में DDO कोड में बदलाव या सुधार की जरूरत बताई गई है।

सरकार ने दिए ये निर्देश

सभी विभाग पोर्टल पर लंबित डेटा तुरंत अपडेट करें।

कर्मचारियों की सही जानकारी और मोबाइल नंबर दर्ज किए जाएं।

DDO और विभागाध्यक्षों का रिकॉर्ड भी सही किया जाए।

तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर कर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाए।

क्यों जरूरी है डेटा अपडेट

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा कानून के तहत मिलने वाले लाभों के लिए सही डेटा होना जरूरी है। इसके अलावा OTP और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी सही मोबाइल नंबर पर निर्भर करती है। अगर पोर्टल पर जानकारी गलत होगी तो पात्र कर्मचारियों को लाभ मिलने में देरी हो सकती है।

  में 30 हजार  #कर्मियों का डाटा अपडेट नहीं, गलत मोबाइल नंबरों से अटकी प्रक्रिया।
11/03/2026

में 30 हजार #कर्मियों का डाटा अपडेट नहीं, गलत मोबाइल नंबरों से अटकी प्रक्रिया।

06/03/2026

हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट
हरियाणा सरकार के मानव संसाधन विभाग द्वारा 6 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि कॉन्ट्रैक्ट/कच्चे कर्मचारियों के डेटा को तुरंत अपडेट किया जाए और Security of Service Portal पर आ रही समस्याओं को दूर किया जाए।
सरकार के संज्ञान में आया है कि अभी भी Part-I और Part-II के कई कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का डेटा अधूरा है और कई तकनीकी समस्याएँ सामने आ रही हैं। इनमें मुख्य रूप से मोबाइल नंबर गलत होना, OTP नहीं आना, पोर्टल पर पोस्ट/डिज़िग्नेशन अपडेट न होना, DDO कोड में गलती होना और परिवार पहचान पत्र (Family ID) की गलत जानकारी जैसी समस्याएँ शामिल हैं।
सरकार ने इन सभी विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागों के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HoDs) और अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने विभागों में कार्यरत सभी योग्य कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सूची को सही तरीके से अपडेट करें और आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ संबंधित विभागों को भेजें।
निर्देशों के अनुसार:
• Part-I के योग्य कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड और कर्मचारी आईडी HKRNL को भेजा जाएगा।
• Part-II के कर्मचारियों का डेटा Treasury & Accounts Department को भेजा जाएगा।
• सभी कर्मचारियों का पूरा सर्विस रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी सही करके पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act 2024 और 2025 के नियमों के तहत पात्र कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ सही समय पर मिल सकें।
इस पत्र के माध्यम से सभी विभागों को यह भी कहा गया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए और जल्द से जल्द सभी योग्य कर्मचारियों का डेटा अपडेट किया जाए ताकि पोर्टल सुचारू रूप से काम कर सके और कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
यह कदम हजारों कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से पोर्टल में OTP, मोबाइल नंबर और डेटा अपडेट जैसी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही थीं।

हरियाणा सरकार द्वारा जॉब सिक्योरिटी पोर्टल पर आवेदन की अंतिम तारीख 15 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है।
19/02/2026

हरियाणा सरकार द्वारा जॉब सिक्योरिटी पोर्टल पर आवेदन की अंतिम तारीख 15 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है।

आखिर सर्विस सिक्योरिटी पोर्टल बारे सरकार गंभीर हुई, अफसरों की जिम्मेवारी तय की 😊👍💯🔥💥
16/02/2026

आखिर सर्विस सिक्योरिटी पोर्टल बारे सरकार गंभीर हुई, अफसरों की जिम्मेवारी तय की 😊👍💯🔥💥

जॉब सिक्योरिटी पोर्टल पर ओटीपी जनरेट नहीं होने पर हरियाणा सरकार ने लिया संज्ञान   पेज को फॉलो लाइक एवं शेयर अवश्य करें।
14/02/2026

जॉब सिक्योरिटी पोर्टल पर ओटीपी जनरेट नहीं होने पर हरियाणा सरकार ने लिया संज्ञान

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हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद ठेका कर्मचारियों को नियमित करना सरकार के लिए एक चुनौती।
13/02/2026

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद ठेका कर्मचारियों को नियमित करना सरकार के लिए एक चुनौती।

हरियाणा सरकार द्वारा जॉब सिक्योरिटी पोर्टल संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी योग्य अनुबंधित ...
13/02/2026

हरियाणा सरकार द्वारा जॉब सिक्योरिटी पोर्टल संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी योग्य अनुबंधित कर्मचारी जॉब सिक्योरिटी से वंचित ना रहे।

*💠गेस्ट टीचर्स के DA में बढ़ोतरी ✊💐*
11/02/2026

*💠गेस्ट टीचर्स के DA में बढ़ोतरी ✊💐*

 #फैमिली 🆔 में इनकम अपडेट ना कराने वाले    #कर्मचारियों को लग सकता है झटका             #फैमिली  #इनकम 😊👍💼📝
07/02/2026

#फैमिली 🆔 में इनकम अपडेट ना कराने वाले #कर्मचारियों को लग सकता है झटका
#फैमिली #इनकम 😊👍💼📝

  पोर्टल पर डायरेक्ट रोल के कर्मचारियों को पोर्ट करने की सहमति ओर टेम्परेरी ID बनाने के संबंध में पत्र जारी।
05/02/2026

पोर्टल पर डायरेक्ट रोल के कर्मचारियों को पोर्ट करने की सहमति ओर टेम्परेरी ID बनाने के संबंध में पत्र जारी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसलाकच्चे कर्मचारियों के हक में बड़ा मोड़: 1996 नीति का अध्याय बंद, 2003–2011 ब...
05/02/2026

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
कच्चे कर्मचारियों के हक में बड़ा मोड़: 1996 नीति का अध्याय बंद, 2003–2011 बनीं नया आधार
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 31 दिसंबर 2025 को कच्चे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। यह निर्णय केवल कुछ याचिकाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा सरकार की दशकों पुरानी रोजगार नीतियों, प्रशासनिक रवैये और “कल्याणकारी राज्य” की अवधारणा पर सीधी टिप्पणी है। हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब कच्चे कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुख्य आधार 2003 और 2011 की नीतियां होंगी, जबकि 1996 की नीति नए मामलों के लिए तकनीकी रूप से अप्रासंगिक हो चुकी है।
यह फैसला जोगिंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य (CWP-31304-2025) और उससे जुड़े मामलों—मनोज कुमार बनाम हरियाणा राज्य तथा शमीम अंसारी बनाम UHBVN—में सुनाया गया। न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल की एकल पीठ ने राज्य सरकार के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके जरिए दैनिक वेतनभोगी, संविदात्मक और तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण से इनकार किया गया था।
क्या कहा हाई कोर्ट ने
कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो कर्मचारी पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें पात्रता की तिथि से लागू नीति के अनुसार नियमित किया जाए। साथ ही, उन्हें एरियर का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ किया जाए। यह भुगतान 8 सप्ताह के भीतर करना होगा, जबकि सभी लंबित दावों का निपटारा 6 महीने में किया जाए।
1996 की नीति पर विराम
हरियाणा की 7 और 18 मार्च 1996 की नियमितीकरण नीतियों को लेकर वर्षों से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हाई कोर्ट ने इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि उमा देवी (2006) के फैसले के बाद 1996 की नीति को प्रभावी रूप से पुनर्जीवित नहीं किया गया।
अर्थात, जो कर्मचारी अब सीधे 1996 की नीति के आधार पर दावा करेंगे, उनके मामले देरी और लाचेस के सिद्धांत के तहत खारिज हो सकते हैं। हालांकि, जिन मामलों में पात्रता पहले बन चुकी थी और जो लंबे समय से लंबित थे, वहां कोर्ट ने “पात्रता की तिथि से लाभ” देने की बात कही है।
2003 और 2011 की नीतियां बनीं मजबूत आधार
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमितीकरण के दावों का मूल्यांकन अब मुख्य रूप से इन नीतियों के तहत होगा—
2003 नीति (1 अक्टूबर 2003): उन कर्मचारियों के लिए राहत, जो 1996 से चूक गए थे लेकिन 2003 तक सेवा में थे।
2011 नीति (29 जुलाई 2011): लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक और वैध रास्ता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई कर्मचारी किसी नीति में फिट नहीं बैठता, लेकिन 10 वर्ष या उससे अधिक सेवा दे चुका है, तो उसे वन-टाइम मेजर के तहत नियमित किया जाना चाहिए।
“परमानेंट टेंपोरेरीनेस” पर सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने राज्य सरकार के रवैये को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दशकों तक कर्मचारियों से काम लेकर उन्हें कच्चा रखना “स्थायी अस्थाइयेपन” है, जो असंवैधानिक है।
कोर्ट ने कहा—राज्य कोई निजी कंपनी नहीं है जो “हायर एंड फायर” की नीति अपनाए। राज्य सार्वजनिक शक्ति का ट्रस्टी है और उस पर कर्मचारियों के प्रति नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।
फैसले में राजधर्म और भगवद्गीता के लोकसंग्रह का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रशासन को केवल सुविधा नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। 25–30 साल तक किसी को कच्चा रखना अन्याय और क्रूरता के समान है।
‘स्वीकृत पद नहीं हैं’ का बहाना खारिज
राज्य सरकार का यह तर्क कि “स्वीकृत पद नहीं हैं,” हाई कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के निहाल सिंह बनाम पंजाब राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा—
यदि दशकों तक काम लिया गया है, तो यह माना जाएगा कि काम की जरूरत थी। ऐसे में राज्य को पद सृजित करने होंगे।
विभागों में असर दिखना शुरू
बिजली विभाग (UHBVN/DHBVN): जोगिंदर सिंह और शमीम अंसारी केस का हवाला देते हुए आंतरिक स्तर पर फाइलें खंगालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
वन विभाग: 20–30 साल से दिहाड़ी पर काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत। कोर्ट ने इसे अनुचित श्रम अभ्यास करार दिया।
शिक्षा और परिवहन विभाग: ग्रुप C और D के हजारों कर्मचारी अब 2003 और 2011 की नीतियों के तहत पक्के होने के हकदार होंगे।
निष्कर्ष
जोगिंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य का यह फैसला हरियाणा की सेवा न्यायशास्त्र में मील का पत्थर है। हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 1996 की नीति अब नए दावों के लिए आधार नहीं रहेगी, जबकि 2003 और 2011 की नीतियां कच्चे कर्मचारियों के लिए नया रास्ता खोलेंगी।
एरियर और 6 प्रतिशत ब्याज के आदेश ने सरकार को यह संदेश भी दे दिया है कि वर्षों की लापरवाही अब महंगी पड़ेगी। यह फैसला हजारों कच्चे कर्मचारियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है।

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