16/02/2026
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर नई गाइडलाइन्स
📌 Case: Zeba Khan vs State of U.P., 2026
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत (Bail) देने के संबंध में बहुत महत्वपूर्ण और सख्त सिद्धांत तय किए हैं, जिन्हें अब देश की सभी हाई कोर्ट और निचली अदालतों को अनिवार्य रूप से मानना होगा।
🔹 मनमाने तरीके से दी गई जमानत रद्द हो सकती है अगर कोर्ट ने महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया है तो बेल टिक नहीं पाएगी।
🔹 जमानत देते समय ये देखना जरूरी है:
✔ अपराध की गंभीरता
✔ आरोपी का क्रिमिनल इतिहास
✔ गवाहों को प्रभावित करने की संभावना
✔ फरार होने का खतरा
✔ समाज पर प्रभाव
🔹 क्रिमिनल बैकग्राउंड छुपाकर बेल ली → बेल रद्द
🔹 जिस दस्तावेज पर ही फर्जी होने का आरोप है, उसी के आधार पर बेल नहीं
🔹 Parity, लंबी कस्टडी या चार्जशीट फाइल होना अकेला आधार नहीं
🔹 जिस दस्तावेज पर ही फर्जी होने का आरोप है, उसी के आधार पर बेल नहीं
🔹 Parity, लंबी कस्टडी या चार्जशीट फाइल होना अकेला आधार नहीं
🔹 Reasoned और speaking order देना अनिवार्य
📌 सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि 👉 Personal liberty महत्वपूर्ण है, लेकिन न्याय व्यवस्था और समाज का हित उससे ऊपर है।
✅ यह फैसला जमानत कानून (Bail Jurisprudence) में एक माइलस्टोन है और हर कोर्ट पर बाध्यकारी है।