दर्द नै हंसाया करूं

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दर्द नै हंसाया करूं दर्द नै हंसाया करूं

महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे...पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से हौंसला मिलता ...
28/07/2022

महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे...पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से हौंसला मिलता था जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था...और वह था श्रवण के पिता का श्राप....!

दशरथ जब-जब दुःखी होते थे तो उन्हें श्रवण के पिता का दिया श्राप याद आ जाता था... (कालिदास ने रघुवंशम में इसका वर्णन किया है)

श्रवण के पिता ने ये श्राप दिया था कि ''जैसे मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के मर रहा हूँ वैसे ही तू भी तड़प-तड़प कर मरेगा.....'' !

दशरथ को पता था कि ये श्राप अवश्य फलीभूत होगा और इसका मतलब है कि मुझे इस जन्म में तो जरूर पुत्र प्राप्त होगा.... (तभी तो उसके शोक में मैं तड़प के मरूँगा)

यानि यह श्राप दशरथ के लिए संतान प्राप्ति का सौभाग्य लेकर आया....!

ऐसी ही एक घटना सुग्रीव के साथ भी हुई....!

वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि सुग्रीव जब माता सीता की खोज में वानर वीरों को पृथ्वी की अलग - अलग दिशाओं में भेज रहे थे.... तो उसके साथ-साथ उन्हें ये भी बता रहे थे कि किस दिशा में तुम्हें कौन सा स्थान या देश मिलेगा और किस दिशा में तुम्हें जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिये.... !

प्रभु श्रीराम सुग्रीव का ये भगौलिक ज्ञान देखकर हतप्रभ थे...

उन्होंने सुग्रीव से पूछा कि सुग्रीव तुमको ये सब कैसे पता...?

तो सुग्रीव ने उनसे कहा कि... ''मैं बाली के भय से जब मारा-मारा फिर रहा था तब पूरी पृथ्वी पर कहीं शरण न मिली... और इस चक्कर में मैंने पूरी पृथ्वी छान मारी और इसी दौरान मुझे सारे भूगोल का ज्ञान हो गया....'' !

अब अगर सुग्रीव पर ये संकट न आया होता तो उन्हें भूगोल का ज्ञान नहीं होता और माता जानकी को खोजना कितना कठिन हो जाता...!

इसीलिए कहा गया है :- "अनुकूलता भोजन है, प्रतिकूलता विटामिन है और चुनौतियाँ वरदान है और जो उनके अनुसार व्यवहार करें.... वही पुरुषार्थी है...."

ईश्वर की तरफ से मिलने वाला हर एक पुष्प अगर वरदान है.......तो हर एक काँटा भी वरदान ही समझें....!

मतलब.....अगर आज मिले सुख से आप खुश हो...तो कभी अगर कोई दुख , विपदा या अड़चन आ जाये.....तो घबरायें नहीं.... क्या पता वो अगले किसी सुख की तैयारी हो....एक दिन.......सदैव सकारात्मक रहें..!!

बस से उतरकर पिंटू ने अपनी जेब में हाथ डाला ही था कि चौंक गया , उसकी जेब कट चुकी थी ।जेब में था भी क्या ? कुल 350 रुपए और...
27/07/2022

बस से उतरकर पिंटू ने अपनी जेब में हाथ डाला ही था कि चौंक गया , उसकी जेब कट चुकी थी ।

जेब में था भी क्या ? कुल 350 रुपए और एक ख़त जो उसने अपनी माँ को लिखा था कि कुछ दिनों पहले ही उसकी नौकरी छूट गई है, अभी पैसे नहीं भेज सकता , फ़िलहाल वो नए काम की तलाश कर रहा है ।

सात दिनों से वह ख़त उसकी जेब में पड़ा था लेकिन गाँव में माँ को पोस्ट करने की उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी ।

आज उसके 350 रुपए जा चुके थे। यूँ 350 रुपए कोई बड़ी रकम नहीं होती , लेकिन जिसकी नौकरी छूट चुकी हो उसके लिए 350 रुपए 3500 सौ से कम नहीं होते !!

कुछ दिन गुजरे। माँ का खत मिला। पढ़ने से पहले ही पिंटू सहम गया। जरूर पैसे भेजने को लिखा होगा।

वो सोच में पड़ गया कि अब वो क्या करे , ख़त पढ़े या न पढ़े , उसके बाद माँ को क्या जबाब भेजे ।

कुछ देर बाद गहन सोच विचार कर बड़ी हिम्मत से उसने ख़त खोला ।

माँ ने लिखा था - "बेटा, तेरा हज़ार रुपए का भेजा हुआ मनीआर्डर मिल गया है। तू कितना अच्छा है रे ! पैसे भेजने में कभी भी लापरवाही नहीं बरतता.....सदा खुश रह ।"

पिंटू इसी उधेड़बुन में लग गया कि आखिर माँ को मनीआर्डर किसने भेजा होगा , उसका दिमाग बिलकुल सन्न था , लेकिन उसने मन ही मन पहले भगवान औऱ उसके बाद उस इंसान को धन्यवाद कहा जिसने मनीऑर्डर भेजा था ?

कुछ दिन बाद, एक और पत्र मिला । चंद लाइनें लिखी थी, आड़ी-तिरछी । बड़ी मुश्किल से वो उस खत को पढ़ पाया........ लिखा था......

- "भाई, 350 रुपए तुम्हारे और 650 रुपए अपनी ओर से मिलाकर मैंने तुम्हारी माँ को मनीआर्डर भेज दिया है। फ़िक्र न करना , माँ तो सबकी एक जैसी ही होती है न !! वह क्यों भूखी रहे ? तुम्हारा - जेबकतरा भाई........!!"

पिंटू की आँखें नम हो गई ।

# दर्द नै हंसाया करूं

दो पक्के दोस्त दारू पीने के बाद , सिगरेट ख़तम करके...रजनीगंधा की पुड़िया फाड़ते हुए... बहुत ही धीर गंभीर मुद्रा में एक दू...
26/07/2022

दो पक्के दोस्त दारू पीने के बाद , सिगरेट ख़तम करके...

रजनीगंधा की पुड़िया फाड़ते हुए...

बहुत ही धीर गंभीर मुद्रा में एक दूसरे से बात कर रहे थे कि...


मैगी मत खाया कर बे ...! मैदा होता है , बहुत नुक़सान करती है शरीर में...!

एक दिन एक चिड़िया एक चिड़ा से बोली-तुम मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे ?चिड़ा ने कहा-अगर क़भी उड़ जाऊं तो तुम मुझें पकड...
26/07/2022

एक दिन एक चिड़िया एक चिड़ा से बोली-तुम मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे ?

चिड़ा ने कहा-अगर क़भी उड़ जाऊं तो तुम मुझें पकड़ लेना.

चिड़िया-मैं तुम्हें भला कैसे पकड़ सकती हूँ , तुम्हारी उड़ान तो बहुत ज्यादा है।

यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला.... अब हम हमेशा साथ रहेंगे औऱ अब तुम्हें मुझसे बिछड़ने का डर भी नहीं सताएगा।

लेकिन एक दिन बहुत जोर की तूफान आने वाली थी।

दोनों सोंचने लगे कि अब क्या करें...??

हालात ऐसी कि चिड़ा उड़कर चिड़िये के साथ सुरक्षित स्थान पर जा भी नहीं सकता , क्योंकि उसके पंख नहीं थे।

बेचारगी में चिड़ा ने चिड़िया से कहा कि तुम अगर चाहो तो मुझें छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जा सकती हो... बाक़ी तुम्हारी मर्ज़ी..??

चिड़िया कुछ सोचकर बोली.. ठीक है, मैं जा रही हूं लेकिन तुम अपना ख़याल रखना औऱ वो इतना कह तूफ़ान आने से पहले उड़ गई....!

जब तूफान थमा और चिड़िया लौटकर वापस आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था और एक डाली पर लिखा था.. "" काश वो एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती तो शायद मैं तूफ़ान आने से पहले नहीं मरता !
...........

रिश्ते निभाने वाले क़भी हालात नहीं देखा करते........!

" कब से इक वादा वफ़ा होने की उम्मीद लिए...
ऐसी इक राह पे बैठा हूं जो चलती भी नहीं "..!!

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