Adv Arjun Chandna

Adv Arjun Chandna A human for the Nation First, RssThinker,Social Activist, blogger & Investigate person.. Sujan Singh Gurjar (Farmer)
•Mother-Mrs.

Advocate- Arjun singh gurjar(Adv arjun chandna)
(an introduction)
•Name- Arjun Singh Gurjar (Chandna)
•Father- Mr. Geeta Bai Gurjar
•Date of Birth-07-07-1996
•Birthplace- Village Garda, Panchayat Asalpur, post-borkheri(gujran),block Aklera326039.
•work Place - Jhalawar (Rajasthan-india),

Dedicated to public service through journalism for 10 years.(Newspaper - Correspondent in Rajasthan Patrika fr

om 2011 - Assistant Editor in Dainik Bhaskar till 2021)

•Academic Life-
•Graduate in Arts stream from Kota University (BA),
• Master of Arts (MA),&
• Bachelor of Laws (LL.B),
• Graduate in Journalism, from Vardhman Kota Open University (BJMC),

•Social life-
•Trained volunteers of Rashtriya Swayamsevak Sangh(RSS), Sangh age-20 years, (since childhood), former pracharak- (Dungarpur-Chittor prant), liability event, ghatnayak to 2005 from block secretary (karyvaah) till 2022.and social worker.

•Currently working-
•Advocate in Aklera (Jhalawar))

01/08/2026

"सुनीता विलियम्स के चौंकाने वाले खुलासे"

अंतरिक्ष में नौ महीने बिताने के बाद अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने पत्रकारों से जो बातें कही हैं, वे इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा लग रहा था कि अंतरिक्ष में फँस जाना शायद ईश्वर की इच्छा थी। जब मुझे अंतरिक्ष में लगभग 20 दिन हो गए थे, तब मैं मानो मृत्यु का सामना कर रही थी। भोजन और पानी का भंडार कम होता जा रहा था। मुझे लगा कि अब आगे कैसे जीवित रहूँगी? तभी मुझे सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि के व्रत की याद आई। उसी दिन से मैं शाम को थोड़ा-सा भोजन और पानी तथा सुबह केवल थोड़ा-सा पानी लेने लगी। इस तरह एक महीना बीत गया और मैं स्वस्थ तथा प्रसन्न रही। मुझे लगा कि मैं कुछ और समय तक भी टिक सकती हूँ।

मृत्यु की प्रतीक्षा करते हुए मैंने कंप्यूटर खोला और सोचा कि बाइबिल पढ़ूँ। मैं उसे पहले भी कई बार पढ़ चुकी थी, इसलिए एक पृष्ठ पढ़ने के बाद ही मेरा मन उचट गया। फिर मुझे रामायण और भगवद्गीता पढ़ने की इच्छा हुई। मैंने उनका अंग्रेज़ी अनुवाद डाउनलोड किया और पढ़ना शुरू किया। 10–15 पृष्ठ पढ़ने के बाद मैं आश्चर्यचकित रह गई। उसमें भ्रूण विज्ञान, गहरे समुद्र और आकाश के बारे में जो वर्णन था, वह अद्भुत लगा। मुझे लगा कि यह बात पूरी दुनिया को बतानी चाहिए।

अंतरिक्ष से देखने पर सूर्य ऐसा दिखाई देता है जैसे वह किसी कीचड़ भरे तालाब में बैठा हो। कभी-कभी मुझे ऊपर से कुछ आवाज़ें सुनाई देती थीं, मानो कोई मंत्रोच्चार हो रहा हो, और मुझे लगता था कि वे संस्कृत या हिंदी में हैं। मेरे साथी बैरी विलमोर ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मैं प्रतिदिन रामायण और भगवद्गीता पढ़ रही हूँ। इसके बाद मैंने दोनों ग्रंथों का गहराई से अध्ययन करने का निश्चय किया। वह मेरे लिए एक अनोखा अनुभव था। मैंने तुरंत एलन मस्क को फ़ोन करके इसके बारे में बताया।

कुछ दिनों बाद हम बहुत भयभीत हो गए क्योंकि हमारे अंतरिक्ष स्टेशन की ओर बहुत बड़े उल्कापिंड तेजी से आ रहे थे। हमारे पास कोई उपाय नहीं था, इसलिए हमने ईश्वर से प्रार्थना की। तभी चमत्कारिक रूप से कुछ छोटे-छोटे गोलाकार प्रकाश कण (मानो तारे) नीचे आए और उन सभी उल्कापिंडों को नष्ट कर दिया। यह दृश्य हमारे लिए आश्चर्यजनक था। नासा ने इस घटना पर आगे शोध करने का आश्वासन दिया।

आठ महीनों में मैंने संपूर्ण रामायण और भगवद्गीता पढ़ ली। मुझे महसूस होने लगा कि अब मैं पृथ्वी पर लौट सकती हूँ। मेरे भीतर एक अद्भुत आत्मविश्वास जाग गया।

अप्रैल महीने में सूर्यास्त के समय मुझे सिंह जैसे एक जीव के साथ माता जी और त्रिशूल धारण किए हुए एक आकृति पृथ्वी की ओर उतरती हुई दिखाई दी। वह आकृति पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद अदृश्य हो गई। मैं और बैरी विलमोर उसका निरीक्षण करते रहे। ऐसा लगा कि वह आकाश के किसी विशेष स्तर से नीचे आई थी। इससे मुझे लगा कि आकाश के एक से अधिक स्तर होते हैं। बाद में मुझे न्यूयॉर्क टाइम्स में एक रिपोर्ट दिखाई दी, जिसमें हडसन नदी पर चंद्राकार आकृति दिखाई देने और 2 मार्च से सनातनी उपवास शुरू होने का उल्लेख था। बाद में हमें लगा कि पृथ्वी पर उपवास समाप्त करने का समय आ गया था। मुझे विश्वास है कि वे ईश्वर के आशीर्वाद से आए देवदूत थे।

अब मुझे लगता है कि सनातन धर्म की भगवद्गीता सत्य है। अब मेरा शोध वेदों के विज्ञान, भ्रूण विज्ञान, गहरे समुद्र के विज्ञान और खगोल विज्ञान पर आधारित होगा। नासा में वेदों की अलौकिक शक्तियों पर शोध करने के लिए एक नए विभाग की स्थापना का प्रस्ताव भी दिया गया है।

यह मध्य प्रदेश के खंडवा में तैनात अपर सत्र न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी हैं। यह उन लोगों में से हैं जिन्हें हम सबको प्...
04/07/2026

यह मध्य प्रदेश के खंडवा में तैनात अपर सत्र न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी हैं। यह उन लोगों में से हैं जिन्हें हम सबको प्यार करना चाहिए।

जज साहब ने आलीशान सरकारी बंगला, वीआईपी कार और अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया है। वे एक छोटे से कमरे में रहते हैं, अपना खाना खुद बनाते हैं और रोजाना पैदल ही कोर्ट जाते हैं।

जज अक्षय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को आवेदन देकर अपनी सैलरी आधी करने की मांग भी की है। निजी संपत्ति के नाम पर उनके पास सिर्फ अपनी मां द्वारा दिया गया एक मोबाइल फोन है। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया है। तबादले पर उन्होंने विभाग से कहा है कि उन्हें देश में कहीं भी भेजा जाए, वे न्यूनतम सरकारी सुविधाएं ही लेंगे।

बचपन में अपनी मां को संपत्ति विवाद के दौरान अदालत के चक्कर लगाते देखकर उन्होंने जज बनने का निर्णय लिया था। इसी कारण वे अपनी अदालत में आने वाले मुकदमों, खासकर जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा बेहद तेजी से करते हैं ताकि आम लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

AIBE परीक्षा के बिना वकालत नहीं: जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर का महत्वपूर्ण आदेश:भारतीय न्याय व्यवस्था में अधिवक्ता क...
26/06/2026

AIBE परीक्षा के बिना वकालत नहीं: जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर का महत्वपूर्ण आदेश:

भारतीय न्याय व्यवस्था में अधिवक्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी व्यक्ति को न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए केवल बार काउंसिल में नामांकन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन भी करना होता है। हाल ही में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर (राजस्थान) द्वारा पारित एक आदेश ने इस विषय को पुनः चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

प्रकरण की पृष्ठभूमि

दिनांक 25 नवम्बर 2025 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत की गई। शिकायतकर्ता अधिवक्ता श्री मनोज जैन ने आरोप लगाया कि श्री दिनेश कुमार रांका स्वयं को अधिवक्ता बताते हुए न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे हैं, जबकि उन्होंने अभी तक ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) उत्तीर्ण नहीं किया है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के साथ-साथ उपलब्ध अभिलेखों एवं दस्तावेजों का परीक्षण किया।

न्यायालय के समक्ष आए तथ्य

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित व्यक्ति का नाम बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में नामांकित अवश्य है, किन्तु उन्होंने ऑल इंडिया बार परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि बार काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा 3 मार्च 2025 से ऐसे अधिवक्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई और प्रैक्टिस पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं, जिन्होंने AIBE उत्तीर्ण नहीं की है।

न्यायालय का निर्णय

तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि संबंधित व्यक्ति:

1. AIBE परीक्षा उत्तीर्ण करने तक किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में उपस्थित नहीं होंगे।
2. किसी भी मामले में अधिवक्ता की हैसियत से कार्य नहीं करेंगे।
3. स्वयं को अधिवक्ता के रूप में प्रचारित या प्रस्तुत नहीं करेंगे।
4. न्यायालय परिसर में अधिवक्ता के रूप में बैठकर व्यवसायिक गतिविधियाँ संचालित नहीं करेंगे।

इसके साथ ही शिकायत का निस्तारण कर आदेश की प्रति दोनों पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

AIBE का महत्व

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय परीक्षा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिवक्ता के रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति विधि के मूलभूत सिद्धांतों और व्यावसायिक मानकों का पर्याप्त ज्ञान रखता हो।

AIBE उत्तीर्ण करने के बाद ही अधिवक्ता को “Certificate of Practice” प्राप्त होता है, जो उसे स्वतंत्र रूप से वकालत करने का अधिकार प्रदान करता है। इसलिए केवल नामांकन (Enrollment) किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक प्रैक्टिस करने का अधिकार नहीं देता।

कानूनी पेशे के लिए संदेश

ब्यावर न्यायालय का यह आदेश अधिवक्ता समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं राज्य बार काउंसिल के नियमों का पालन अनिवार्य है। यह निर्णय न केवल पेशे की गरिमा बनाए रखने में सहायक है, बल्कि न्यायालयों में योग्य एवं अधिकृत अधिवक्ताओं की उपस्थिति भी सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष

विधि व्यवसाय केवल एक पेशा नहीं बल्कि न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग है। इसलिए अधिवक्ताओं द्वारा सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया जाना आवश्यक है। ब्यावर न्यायालय का यह आदेश स्पष्ट करता है कि AIBE उत्तीर्ण किए बिना अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करना नियमों के अनुरूप नहीं है और ऐसी स्थिति में न्यायालय आवश्यक प्रतिबंधात्मक आदेश पारित कर सकता है।

(यह लेख केवल शैक्षणिक एवं विधिक जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है।)
Adv Arjun Chandna

 #रिमांड क्या होता है? #अपराधिक मामलों में Remand (रिमांड) का मतलब होता है —  #किसी आरोपी को जाँच या न्यायिक प्रक्रिया क...
26/05/2026

#रिमांड क्या होता है?
#अपराधिक मामलों में Remand (रिमांड) का मतलब होता है — #किसी आरोपी को जाँच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत के आदेश से पुलिस या जेल की अभिरक्षा में भेजना।
#जब पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है और 24 घंटे के भीतर जाँच पूरी नहीं हो पाती, तब उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके रिमांड मांगी जाती है।
रिमांड के मुख्य प्रकार
1. Remand (पुलिस रिमांड)
इसमें आरोपी पुलिस की हिरासत में रहता है।
पुलिस उससे पूछताछ, बरामदगी, साक्ष्य जुटाने आदि का कार्य करती है।
मुख्य बातें
#मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है।
प्रारम्भिक 15 दिनों के भीतर ही दी जा सकती है।
आरोपी को पुलिस #थाने/कस्टडी में रखा जाता है।
2. Remand (न्यायिक रिमांड)
इसमें आरोपी को #जेल भेज दिया जाता है और वह #न्यायिक अभिरक्षा में रहता है।
#मुख्य बातें
आरोपी जेल में रहता है, पुलिस हिरासत में नहीं।
पुलिस पूछताछ सीधे नहीं कर सकती।
#गंभीर अपराधों में अक्सर न्यायिक रिमांड दी जाती है।
BNSS में प्रावधान
पहले यह प्रावधान की धारा 167 में था, अब

के स्थान पर में धारा 187 लागू होती है।
रिमांड की अवधि
#प्रारम्भिक कुल पुलिस रिमांड सामान्यतः 15 दिन तक।
उसके बाद न्यायिक रिमांड।
#जाँच पूरी करने की अधिकतम अवधि:
सामान्य अपराध: 60 दिन
#गंभीर अपराध (10 वर्ष/आजीवन/मृत्युदंड): 90 दिन
यदि समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को “डिफॉल्ट बेल” का अधिकार मिल सकता है।
#सरल उदाहरण
मान लीजिए चोरी के मामले में पुलिस ने किसी व्यक्ति को पकड़ा और अभी सामान बरामद करना बाकी है, तो पुलिस अदालत से Remand मांग सकती है।
लेकिन यदि पूछताछ पूरी हो गई और केवल मुकदमा चलना बाकी है, तो आरोपी को Remand में जेल भेजा जाता है।



✍️⚖️🧑‍🎓

"एक निमंत्रण है, तो दूसरा सख्त आदेश! क्या आप जानते हैं समन और वारंट का असली फर्क?" ारंट  #कानूनी_ज्ञान     #कानून_की_बात...
25/05/2026

"एक निमंत्रण है, तो दूसरा सख्त आदेश! क्या आप जानते हैं समन और वारंट का असली फर्क?"
ारंट

#कानूनी_ज्ञान



#कानून_की_बात

10/02/2026

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सरकार से वीडीए/क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाने और उन्हें एक अलग परिसंपत्ति वर्ग के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया है, साथ ही स्पष्ट नियमन और नीतिगत स्पष्टता की मांग की है।

Address

Jhalawar
326001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Adv Arjun Chandna posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Adv Arjun Chandna:

Shortcuts

Share