29/08/2025
🎓⚖️ वकील स्ट्राइक पर क्यों बैठे हैं? ⚖️🎓
दिल्ली की सभी जिला न्यायालयों में पिछले तीन दिनों से अधिवक्ता साथियों ने कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया है। यह कदम किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि जनहित में उठाया गया है।
👉 दिल्ली के माननीय LG द्वारा एक ऐसा नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसके अनुसार अब पुलिसकर्मियों को कोर्ट में पेश होकर गवाही देने की आवश्यकता नहीं होगी। वे थाने में किसी “डिज़िग्नेटिड स्थान” पर बैठकर अपनी गवाही दे सकेंगे।
⚖️ कानून की मूल भावना
सभी को याद होगा कि CrPC की धारा 161 या BNSS की धारा 180 के तहत पुलिस के समक्ष दिया गया बयान/सबूत कोर्ट में admissible नहीं होता।
हमारे संविधान निर्माताओं की स्पष्ट मंशा थी कि पुलिस की गवाही केवल अदालत की निगरानी में ही होनी चाहिए ताकि सत्य, निष्पक्षता और न्याय कायम रह सके।
⚖️ इस नोटिफिकेशन का खतरा
यदि पुलिसकर्मी थाने में बैठकर ही गवाही देंगे, तो वह गवाही beyond doubts नहीं मानी जा सकती।
➡️ निर्दोष भी दोषी सिद्ध हो सकता है।
➡️ Criminal Justice System को गहरी चोट पहुँचेगी।
➡️ यह बिल्कुल वैसा होगा जैसे मौखिक परीक्षा में किताब खोलकर बैठे रहना – अदालत के प्रश्नों से बच निकलना आसान हो जाएगा।
⚖️ वकीलों का संघर्ष जनता के लिए
यह हड़ताल पुलिस के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ है, जिसे बदलने की कोशिश सरकार कर रही है। पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच संघर्ष का भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि यह आंदोलन जनता के अधिकारों की रक्षा हेतु है।
👉 वकील अपनी रोज़ी-रोटी दाँव पर लगाकर भी जनता के लिए खड़े हैं।
👉 अदालत परिसर के बाहर चक्का जाम कर जनता को यह संदेश दिया गया कि यह असुविधा केवल उनके ही हितों की रक्षा के लिए है।
⚖️ कुछ कड़वे सच
हमारे अधिकतर वकील साथी स्ट्राइक में पूरा योगदान दे रहे हैं। लेकिन कुछ लोग केवल अपनी रोटी सेकने या शोहरत पाने के लिए अचानक से नायक फ़िल्म के हीरो की तरह सामने आ रहे हैं। असली संघर्ष करने वाले साथियों को इससे विचलित नहीं होना चाहिए।
✊ यह लड़ाई अधिवक्ताओं की नहीं, बल्कि जनता के न्यायिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।