People's Union for Civil Liberties, Rajasthan

People's Union for Civil Liberties, Rajasthan Rajasthan Office of PUCL

28/11/2024

PEOPLE’S UNION FOR CIVIL LIBERTIES, RAJASTHAN

अजमेर, 28 नवम्बर, 2024

प्रेस विज्ञप्ति

सस्ती लोकप्रियता के लिए अजमेर का सांप्रदायिक सौहार्द न बिगाड़े

अजमेर की दरगाह में सभी की है आस्था

पूजा स्थल अधिनियम, 1991 और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की पालना सुनिश्चित करें|

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने अजमेर की दरगाह को लेकर किए जा रहे भ्रामक दावों तथा प्रचार की कड़ी निंदा की है तथा धार्मिक स्थलों के संबंध में विधि द्वारा स्थापित कानूनों की पालना सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

पी यू सी एल द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अजमेर सांप्रदायिक सौहार्द की नगरी है और पूरे विश्व में यहां ख्वाजा साहब की दरगाह,ब्रह्मा मंदिर, जैन तीर्थ, चर्च और पारसी मंदिर स्थापित हैं। अजमेर के कुल बारह सौ वर्ष के इतिहास में आठ सौ वर्ष से यहां दरगाह विद्यमान है । दरगाह में सभी धर्मों की आस्था का लंबा इतिहास रहा है और सदियों से सभी धर्मों के लाखों मतावलंबी यहां आते हैं। दरगाह के निर्माण और विकास में मुस्लिम शासक ही नहीं हिन्दू राजाओं का भी व्यापक योगदान रहा है।

यह दुर्भाग्यजनक है कि अजमेर के इतिहास,परंपरा और सौहार्द को नहीं जानने वाला व्यक्ति दरगाह के नीचे मंदिर होने का दावा कर देश में सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।यह खेदजनक है कि अब अजमेर की एक स्तम्भ को उखाड़ा जा रहा है | अजमेर में कभी ऐसा दावा किसी भी धार्मिक स्थल के लिए नहीं हुआ है। दरगाह तो सांप्रदायिक सद्भाव के संदेश का उदाहरण है कि यहां से गुजरने वाले जैन जुलूस,झूलेलाल की झांकियों और आर एस एस के पथ संचालन पर पुष्प वर्षा की जाती है।

पीपुल्स यूनियन फिर सिविल लिबर्टीज ने कहा है कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण: पूजा स्थल अधिनियम, 1991 स्पष्ट रूप से पूजा स्थल को एक धार्मिक चरित्र से दूसरे में बदलने पर रोक लगाता है। अधिनियम की धारा 4 में यह अनिवार्य किया गया है कि - “पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को जिस रूप में था, उसे बनाए रखा जाएगा।”

इसी संदर्भ में एम. सिद्दीक (राम जन्मभूमि मंदिर) बनाम सुरेश दास (2019) में, सर्वोच्च न्यायालय ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने और भारत की बहुलवादी विरासत की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अधिनियम संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को दर्शाता है और राजनीतिक या धार्मिक लाभ के लिए ऐतिहासिक दावों के दुरुपयोग को रोकता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि अजमेर की दरगाह के प्रबंधन के संबंध भारत सरकार द्वारा दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 लागू है।यह अधिनियम सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को समर्पित अजमेर शरीफ दरगाह को मुस्लिम धार्मिक स्थल के रूपस्पष्ट रूप से चिन्हित करता है। अतः दरगाह के मंदिर होने का दावा भारत सरकार के कानून के विरुद्ध है।

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज का मानना है कि अल्प संख्यक समुदायों में सुरक्षा की भावना उत्पन्न करना सरकार का मूल दायित्वों में से एक है तथा देश के धर्म निरपेक्ष चरित्र का रक्षा करने का भार भी सरकार का है। केंद्र तथा राज्य सरकार को इस तरह के बेबुनियाद दावे कर समाज में वैमनस्यता उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध स्वयं प्रसंज्ञान लेकर, पार्टी बन कार्रवाई करनी चाहिए। संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय से भी अपेक्षा की है कि वे निचली अदालतों को निर्देशित करे कि 1991 के अधिनियम के विपरीत जाकर दावे स्वीकार नहीं करें।

कविता’ श्रीवास्तव (राष्ट्रीय अध्यक्ष) भंवर मेघवंशी (राजस्थान अध्यक्ष) 9571047777, अनंत भटनागर (राजस्थान महा-सचिव) : 9828052017

48, Van Vihar, Tonk Road, Jaipur 302018, [email protected]

25/11/2024

पीपुल्स यूनियन फिर सिविल लिबर्टीज,राजस्थान

राजस्थान सरकार ने सांगानेर ओपन कैंप के क्षेत्र में कटौती के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में सुहास चकमा बनाम भारत संघ और अन्य मामले, 1082/2020 में दायर अवमानना याचिका में बिना शर्त माफी मांगी

सर्वोच्च न्यायालय ने जयपुर में सांगानेर ओपन कैंप के मामले में रजिस्ट्रार को अपना कमिश्नर नियुक्त किया

पीयूसीएल की अपील है कि मुख्यमंत्री सांगानेर के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटित करें और प्रसिद्ध खुली जेल को अछूता रहने दें।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सांगानेर में 300 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए जेडीए द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान सरकार को आवंटित ,सांगानेर ओपन कैंप भूमि आवंटित किए जाने के मामले में आज, 25 नवंबर, 2024 को सुनवाई हुई। इससे पहले 17 मई, 2024 को अदालत ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था जिसमें कहा गया था कि "..खुले शिविरों, संस्थानों या जेलों के क्षेत्र में, जहां भी वे कार्य कर रहे हैं, कटौती का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।" इसके बावजूद राजस्थान सरकार ने जेडीए द्वारा एक अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग को भूमि आवंटन के मामले को बढ़ाया था, और निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जीओआर को खुली जेल की मौजूदा सेल्स को हटाने के लिए केंद्रीय जेल अधिकारियों के साथ समन्वय करने का भी निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता प्रसून गोस्वामी ने चल रहे सुहास चकमा केस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य केस, 1082/2020 में अवमानना याचिका दायर की थी, जिसमें यह आदेश पारित किया गया था। आज सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में हुई. याचिकाकर्ता प्रसून गोस्वामी द्वारा दायर अवमानना याचिका में, राजस्थान सरकार ने माफी मांगी कि यदि कोई निर्णय इस माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्देशों के अनुरूप नहीं है, तो वे बिना शर्त माफी मांगते हैं और आगे वचन देते हैं कि वे निर्देशों का पालन करेंगे।
अदालत को दिए गए अपने आश्वासन में सरकार ने यह भी जोर देकर रकहा कि "वह इस माननीय अदालत द्वारा समय-समय पर जारी किए गए ऐसे सभी निर्देशों का पालन करेगा"। (संलग्नक देखें राजस्थान राज्य द्वारा अवमानना याचिका का उत्तर)।

राजस्थान सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल ने एक नक्शा प्रस्तुत किया, जिसमें ओपन जेल के लिए क्या छोड़ा जाएगा इसका विस्तार दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि खुली जेल के लिए 17,800 वर्ग मीटर से विस्तार करते हुए अतिरिक्त 14,940 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी, जो सैटेलाइट अस्पताल के लिए वर्तमान खुली जेल की जमीन से 2.2 हेक्टेयर जमीन ले लिए जाने के बाद छोड़ी जा रही थी। राजस्थान सरकार ने एक वचन दिया कि जब तक कैदियों के लिए घरों का पूर्ण स्थानांतरण नहीं हो जाता तब तक अस्पताल का कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे तीन सौ बिस्तरों वाले अस्पताल के खिलाफ नहीं हैं लेकिन खुली जेल के मौजूदा क्षेत्र को कम करना कैदियों के हित में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को अदालत का कमिश्नर नियुक्त किया और कहा कि रजिस्ट्रार सप्ताहांत में आएंगे और जमीनी स्तर पर स्थिति की जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट अदालत को देंगे। सुनवाई की अगली तारीख 16 दिसंबर, 2024 रखी गई है।

पीयूसीएल का मानना है कि खुली जेल की तथाकथित खाली जगहें, जो अस्पताल को दी जा रही थीं, वास्तव में ओपन कैंप जेल के निवासी और बाहरी समुदाय के बीच की साझा भूमि थी । वह ऐसा स्थान थी जहां शिविर के निवासी और बाहरी लोग बच्चों के खेल के मैदानों, स्कूल, आंगनवाड़ी और एक साथ रहने के माध्यम से संवाद करते थे। इन अंतःक्रियाओं के माध्यम से ही कैदी होने का कलंक कम करने और तथा उनके समाज में पुनः एकीकरण का रास्ता विकसित होता है। खुली जेल को केवल आवासिय बैरकों में सीमित करके और सामुदायिक भूमिको छीन लेने से यह जगह शहरी स्लम बना दिया जाएगा। यह आम नागरिक समुदाय और बंदियों के साथ मेल-मिलाप के माध्यम से कैदी के समाज में पुनर्स्थापना और पुनर्वास के लिए सुधार गृह के मूलभूत सिद्धांत के खिलाफ है।

पीयूसीएल चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान सरकार को आवंटित की जा रही खुली भूमि की बहाली के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट देने के लिए तैयार है। पीयूसीएल एक बार फिर मुख्यमंत्री राजस्थान श्री भजनलाल शर्मा से अपील करते हुए कहता है कि वे प्रदेश की सभी जनता के साथ साथ कैदियों के भी मुख्यमंत्री हैं और उनका पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आम जनता का।अतः सांगानेर जो कि उनका निर्वाचन क्षेत्र हैं में 300 बेड के अस्पताल के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटित की जानी चाहिए तथा खुली जेल की जमीन को अछूता रखा जाना चाहिए।

कविता श्रीवास्तव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीयूसीएल), 9351562965 भंवर मेघवंशी (पीयूसीएल, राजस्थान, अध्यक्ष), 9571047777

राजस्थान पत्रिका दिनांक 20 नवम्बर 2024 पेज न. 6
20/11/2024

राजस्थान पत्रिका दिनांक 20 नवम्बर 2024 पेज न. 6

पीयूसीएल जयपुर इकाई सम्मेलन 27 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुआ।
27/10/2024

पीयूसीएल जयपुर इकाई सम्मेलन 27 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुआ।

25/10/2024
जवाहर कला केंद्र जयपुर
06/10/2024

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विशाखा संस्थान कि बालिकाओं के साथ पीयूसीएल राज्य कार्यालय में संवाद कार्य्रकमदिनांक 1 अक्तूबर 2024 को प्रात: 10.30 बजे व...
01/10/2024

विशाखा संस्थान कि बालिकाओं के साथ पीयूसीएल राज्य कार्यालय में संवाद कार्य्रकम

दिनांक 1 अक्तूबर 2024 को प्रात: 10.30 बजे विशाखा संस्थान उदयपुर के सलुम्बर व बगरू से आई लगभग 40 किशोरी बालिकाओ के साथ पीयूसीएल राज्य कार्यालय जयपुर पर संविधान पर पीयूसीएल कि राष्ट्रिय अध्यक्ष सुश्री कविता श्रीवास्तव व बेघर स्वास्थ्य पर भंवर लाल कुमावत (पप्पू) संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ |

संवाद में मानवाधिकार मुद्दों और संविधान कि रुपरेखा कई उदहारण सही कई पहलुओं को शामिल करते हुए *पीयूसीएल राष्ट्रिय अध्यक्षा सुश्री कविता श्रीवास्तव जी* ने बह्खुबी ढंग से समझाया और चर्चा कि गई | संविधान व भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित के बारे में संविधान कि जानकारी, संविधान के अधिकार और कर्तव्य, जैसे कि मौलिक अधिकार, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकार।, संविधान की भूमिका और उसके महत्व पर चर्चा करना, कानूनी जागरूकता और न्याय तक कैसे पहुँचना प्रक्रिया के वारे में जानकारी दी गई |

*भंवर लाल कुमावत (पप्पू)* ने भारत ज्ञान विज्ञान समिति जयपुर द्वारा बेघर स्वास्थ्य, बेघर हक, पहचान, बेघर लोगों के स्वास्थ्य की चुनौतियों और जरूरतों, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, और प्राथमिक चिकित्सा के बारे में, संक्रामक बीमारियों, स्वच्छता और व्यक्तिगत देखभाल के महत्व पर जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उपयोगिता, बेघर स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में अपने अनुभव साझा किए।

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