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22/09/2026

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अडल्ट्री के मामले में भरण-पोषण केस में कब फायदा मिल सकता है?अगर पत्नी के अडल्ट्री में रहने का आरोप है और भरण-पोषण का केस...
21/09/2026

अडल्ट्री के मामले में भरण-पोषण केस में कब फायदा मिल सकता है?
अगर पत्नी के अडल्ट्री में रहने का आरोप है और भरण-पोषण का केस चल रहा है, तो सिर्फ आरोप लगाने से पति को फायदा नहीं मिलेगा। ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत जरूरी हैं। वर्तमान BNSS की धारा 144(4) में पत्नी के living in adultery होने पर उस प्रावधान के तहत भरण-पोषण का अधिकार नहीं रहता, और धारा 144(5) के अनुसार पहले से दिया गया आदेश भी ऐसे तथ्य के प्रमाणित होने पर रद्द किया जा सकता है।

एक जरूरी बात यह भी है कि BNS की धारा 84 को केवल “अडल्ट्री की FIR” वाली धारा समझना सही नहीं है। धारा 84 उस स्थिति से संबंधित है जब कोई व्यक्ति किसी विवाहित महिला को यह जानते हुए बहकाकर/ले जाकर/रोककर रखता है कि वह किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और ऐसा करने का उद्देश्य अवैध यौन संबंध हो।

इसलिए केस में CDR, चैट, फोटो, लोकेशन या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हों तो उन्हें कानून के अनुसार प्राप्त और प्रमाणित करना महत्वपूर्ण है; केवल शक या निजी आरोप पर्याप्त नहीं होते।

कानून में सही धारा + सही प्रक्रिया + सही सबूत = कोर्ट के सामने मजबूत तथ्य।

Adv. Hans Chanda
Advocate – High Court & Supreme Court

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अब तो क़ानून की देवी की पट्टी भी हटा दी गयी अब तो दिखना चाहे अब क़ानून अंधा थोड़ी रहा है पतियों के खिलाफ कब तक महिलाओं के झ...
21/09/2026

अब तो क़ानून की देवी की पट्टी भी हटा दी गयी अब तो दिखना चाहे अब क़ानून अंधा थोड़ी रहा है पतियों के खिलाफ कब तक महिलाओं के झूठे मुकदमे चलते रहेंगे 🤔🤔

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और क्रूरता के मामलों में साफ किया है कि सिर्फ पति का रिश्तेदार होने के कारण किसी को आरोपी नहीं बना...
21/09/2026

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और क्रूरता के मामलों में साफ किया है कि सिर्फ पति का रिश्तेदार होने के कारण किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

अगर FIR में सास, ससुर, देवर, ननद या किसी अन्य रिश्तेदार के खिलाफ केवल सामान्य आरोप लगाए गए हैं और उनकी कोई विशिष्ट भूमिका, घटना, तारीख या कथित दहेज मांग नहीं बताई गई है, तो ऐसे आरोपों की अदालत में गंभीर कानूनी जांच जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। केवल परिवार का सदस्य होने के आधार पर किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमे में घसीटना उचित नहीं है।

केस: Arti Mehta & Ors. v. State of Madhya Pradesh & Anr.
Citation: 2026 INSC 533
फैसले की तारीख: 25 मई 2026
पीठ: Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh एवं Justice Sanjay Karol

इस फैसले का संदेश यही है कि दहेज कानून का उद्देश्य पीड़ित महिला को न्याय देना है, लेकिन निर्दोष परिवार के सदस्यों को बिना ठोस और विशिष्ट आरोप के आरोपी बनाना कानून का उद्देश्य नहीं हो सकता।

कानून का इस्तेमाल न्याय के लिए हो, बदले के लिए नहीं।

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दहेज केस पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और घरेलू प्रताड़ना से जुड़े मामलों में एक बार फिर साफ किया ...
21/09/2026

दहेज केस पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और घरेलू प्रताड़ना से जुड़े मामलों में एक बार फिर साफ किया है कि सिर्फ पति का रिश्तेदार होने के कारण किसी व्यक्ति को केस में नहीं फंसाया जा सकता।

अगर किसी रिश्तेदार के खिलाफ विशिष्ट घटना, तारीख, भूमिका और आरोप स्पष्ट नहीं हैं और केवल सामान्य आरोप लगाए गए हैं, तो अदालत ऐसे आरोपों की कानूनी जांच कर सकती है।

केस: Arti Mehta & Ors. v. State of Madhya Pradesh & Anr.
Citation: 2026 INSC 533
फैसला: 25 मई 2026
पीठ: Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh और Justice Sanjay Karol

मतलब साफ है—दहेज कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए है, लेकिन किसी निर्दोष रिश्तेदार को केवल नाम डालकर आरोपी बनाना कानून का उद्देश्य नहीं है।

हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ उपलब्ध सामग्री को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

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अरे बलिया वाले आनंद पांडेय तू खुद फर्जी पोंगा बनकर नफरती टिड्डा है जो बंद कमरे से कुते की तरह भोकता रहता है तेरी औकात न ...
21/09/2026

अरे बलिया वाले आनंद पांडेय तू खुद फर्जी पोंगा बनकर नफरती टिड्डा है जो बंद कमरे से कुते की तरह भोकता रहता है तेरी औकात न बाहर आकर तू बोले तेरे से बड़ा कौन फर्जी होगा भिखदान पर पलने वाले आनद पांडेय 😂

थोड़ा इतिहास बता दु तुझे संवैधानिक/कानूनी अर्थ में राजस्थान की मीणा (Mina/Meena) जनजाति को अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में 1950 के संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश से मान्यता मिली।
Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950 6 सितंबर 1950 को जारी हुआ था।
इसके Part XIII Rajasthan में मीणा को ST सूची में शामिल किया गया था।।

तो मीणा तो पूरी तरह संवैधानिक रूप से आदिवासी है बस तू फर्जी पोंगा है भिखदान पर पलने वाला ।

आज तक तू खुद दिखता न किसी आंदोलन में जंतर मंतर पर लठ राजपूतों को खिला रहा था तू होटल के कमरे बदलता भाग रहा था कही दिल्ली पुलिस लठ पकड़ के पूजा न कर दे तेरी गया था न आरक्षण हटाने हटवा दिया क्या 😂

मत भौका कर आनंद पांडेय तेरी पूरी कुंडली जानता हूं में में तुझे हमेशा पेलता रहता हूं तू ब्लॉक करके भागने वाला है मेरे पास से तू ब्लॉक करके भागा हुआ है😂😂

उनको जाति नहीं हटानी, न उनको जातिवाद खत्म करना है, न उनको मिला हुआ गरीब सुदामा वाला 10% EWS कोटा खत्म करना है। उसे EWS ब...
21/09/2026

उनको जाति नहीं हटानी, न उनको जातिवाद खत्म करना है, न उनको मिला हुआ गरीब सुदामा वाला 10% EWS कोटा खत्म करना है। उसे EWS बोलते हैं, लेकिन आरक्षण की बहस में सबसे पहले ST, SC और OBC के आरक्षण पर ही सवाल क्यों उठते हैं?

आरक्षण अगर सच में जातिवाद है, तो फिर ST, SC और OBC का आरक्षण जातिवाद और EWS का 10% आरक्षण क्या है? 😂

असल बात यह है कि भारत में आरक्षण अलग-अलग संवैधानिक प्रावधानों और अलग-अलग आधारों पर दिया गया है। ST, SC और OBC के आरक्षण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन तथा प्रतिनिधित्व से जुड़ी है, जबकि EWS का प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए किया गया है।

इसलिए आरक्षण पर बहस करनी है तो पूरी व्यवस्था पर करो, सिर्फ ST, SC और OBC को निशाना बनाकर नहीं।

और सबसे मजेदार बात देखो 😂
आरक्षण को जातिवाद के नाम पर हटाने की बात करते हैं, लेकिन जाति आधारित असमानता की ऐतिहासिक वजहों और सामाजिक प्रतिनिधित्व की समस्या पर बात नहीं करते।

पहले तय कर लो कि लड़ाई जातिवाद के खिलाफ है या सिर्फ दूसरों के आरक्षण के खिलाफ? 😂

Adv Hans Chanda

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कॉलेजियम सिस्टम खत्म हो, जज बनने का रास्ता सबके लिए बराबर होभारत की न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए य...
21/09/2026

कॉलेजियम सिस्टम खत्म हो, जज बनने का रास्ता सबके लिए बराबर हो
भारत की न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए यह सवाल लगातार चर्चा में रहना चाहिए कि उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी, जवाबदेह और समान अवसर देने वाली है।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति में कॉलेजियम व्यवस्था लागू है। इस व्यवस्था में वरिष्ठ न्यायाधीशों का कॉलेजियम उम्मीदवारों के नामों पर विचार करता है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NJAC व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करते हुए कॉलेजियम व्यवस्था को बरकरार रखा था।

लेकिन आज एक बड़ा सवाल यह है—

क्या जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिसमें देश के हर योग्य व्यक्ति को समान अवसर मिले?

अगर व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जाए तो नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ बातें स्पष्ट होनी चाहिए—

1. चयन के स्पष्ट और सार्वजनिक मानदंड हों।
2. योग्य उम्मीदवारों की पहचान के लिए व्यापक प्रक्रिया हो।
3. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही हो।
4. सामाजिक विविधता और न्यायपालिका में उचित प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दिया जाए।
5. SC, ST, OBC, महिला और अन्य वंचित वर्गों से आने वाले योग्य उम्मीदवारों के प्रतिनिधित्व के आंकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाएं।
6. चयन प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें किसी योग्य व्यक्ति को केवल सामाजिक या व्यक्तिगत नेटवर्क की कमी के कारण अवसर से वंचित न होना पड़े।

सवाल किसी व्यक्ति का नहीं, व्यवस्था का है

कॉलेजियम व्यवस्था के समर्थक न्यायपालिका की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि इसके आलोचक नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी की आवश्यकता पर सवाल उठाते हैं।

इसलिए बहस का केंद्र यह होना चाहिए कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी बनी रहे और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, विविधता तथा समान अवसर भी मजबूत हों।

जज बनने का अवसर केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए

देश में लाखों युवा कानून की पढ़ाई करते हैं, न्यायिक सेवा और वकालत में वर्षों मेहनत करते हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि योग्य उम्मीदवारों के लिए आगे बढ़ने की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और भरोसेमंद हो।

न्यायपालिका मजबूत तभी होगी जब न्याय के साथ-साथ न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी जनता का विश्वास मजबूत हो।
Adv. Hans Chanda

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लगता है चिराग पासवान को एक और मुकदमा करना पड़ेगा 😂लगता है इसको यह बात मोदी भगवान ने बताई होगी जानते तो होंगे सब इसको मोदी...
20/09/2026

लगता है चिराग पासवान को एक और मुकदमा करना पड़ेगा 😂लगता है इसको यह बात मोदी भगवान ने बताई होगी जानते तो होंगे सब इसको मोदी मंदिर का पहला पंडा जी हैं😂जो मोदी भगवान का मंदिर बनवा दिया बढ़िया 3 बार ओम मोदी नमः करने पर सब काम सफल हो जाते हैं 😂
ये सब क्या सुनने को मिल रहा है... 🤔
लगता है राजन सिंह बहुत बड़ी जानकारी रखता है। 😂

लगता है बलिया वाले आनंद पांड्य जी का संपर्क धीरेंद्र शास्त्री की तरह सीधा ही है भगवान जी से इनको बताकर रखे हैं सायद 😂
20/09/2026

लगता है बलिया वाले आनंद पांड्य जी का संपर्क धीरेंद्र शास्त्री की तरह सीधा ही है भगवान जी से इनको बताकर रखे हैं सायद 😂

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