22/06/2025
पत्नी द्वारा पति की शारीरिक कमजोरी पर की गई टिप्पणी तलाक का आधार: हाईकोर्ट का अहम फैसला
ओडिशा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी अपने पति की शारीरिक दुर्बलता को लेकर बार-बार अपमानजनक टिप्पणियां करती है, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी और यह तलाक के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।
🔴 मामला क्या था?
इस केस में प्रतिवादी पति शारीरिक रूप से विकलांग थे। दोनों का विवाह जून 2016 में हुआ था। विवाह के बाद पत्नी पति की शारीरिक कमजोरी पर बार-बार अपमानजनक टिप्पणियां करती थी, जिससे पति मानसिक रूप से बहुत आहत हुआ।
कोर्ट ने कहा कि एक पति-पत्नी के रिश्ते में सम्मान और सहयोग की उम्मीद की जाती है। यदि पति शारीरिक रूप से दुर्बल है, तो पत्नी को उसका सहारा बनना चाहिए, न कि उसका अपमान करना चाहिए। यदि पत्नी इस प्रकार की टिप्पणियां कर मानसिक पीड़ा पहुंचाती है, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी।
🏛️ कोर्ट का फैसला:
जस्टिस विष्णु प्रसाद राजू और जस्टिस चिरांजन दास की बेंच ने इस टिप्पणी को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसी बातें वैवाहिक रिश्तों को तोड़ सकती हैं।
पत्नी की अपील को खारिज कर फैमिली कोर्ट का तलाक का फैसला बरकरार रखा गया।
✨ संदेश:
पति-पत्नी के रिश्ते में एक-दूसरे का सम्मान और सहयोग सबसे जरूरी होता है। शारीरिक दुर्बलता या विकलांगता का मजाक बनाना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि कानून की नजर में भी अपराध के समान माना जा सकता है।