22/03/2026
पैसा देना अपराध नहीं है।
पैसा मांगना भी अपराध नहीं है।
आप किसी को #पैसा उधार देते हैं … समय आता है वापस मांगने का… उधार लेने वाला व्यक्ति कहता है “पैसा मत मांगो… नहीं तो मैं #सुसाइड कर लूंगा।”
अब तक ऐसे मामलों में सबसे बड़ा डर यही रहता था कि अगर सामने वाला सच में कुछ कर ले, तो उधार देने वाला ही फंस जाएगा — धारा 306 IPC (अब BNS में समकक्ष 108 प्रावधान) के तहत।
लेकिन अब इस भ्रम पर #सुप्रीम_कोर्ट ने साफ लाइन खींच दी है।
हाल ही में . (आदेश दिनांक 10.03.2026 SLP (Crl.) No(s). 4644/2025) में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही—
अगर आपने किसी को वैध रूप से लोन दिया है या आपसे किसी प्रकार से कोई रकम किसी निवेश के लिए ली है
और आप सिर्फ उसका पैसा वापस मांग रहे हैं
और सामने वाला व्यक्ति खुद अपनी मर्जी से सुसाइड कर लेता है, भले ही वह आपके खिलाफ सुसाइड नोट छोड़ जाए
तो मात्र पैसे की मांग करना “abetment of suicide” नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने साफ कहा कि
“उकसाना (instigation)” और “कानूनी हक मांगना” दो अलग चीजें हैं।
अगर कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत तनाव, दबाव या परिस्थिति में ऐसा कदम उठाता है, तो उसका पूरा दोष उधार देने वाले पर नहीं डाला जा सकता।
इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने तक को #खारिज कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि—
हर सुसाइड नोट अपने आप में सच्चाई का प्रमाण नहीं होता, और हर आरोप कानूनन अपराध नहीं बनता।
सीधी बात:
पैसा देना अपराध नहीं है।
पैसा मांगना भी अपराध नहीं है।
और किसी के गलत निर्णय की जिम्मेदारी आपको सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि आपने अपना हक मांगा।