Adv. Dhanraj Girdharpura

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Adv. Dhanraj Girdharpura !सत्य परेशान हों सकता है! !पराजित नहीं!
!! सत्यमेव जयते !!

22/07/2026


बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अधिवक्ताओं के लिए वैधानिक नामांकन शुल्क को ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव अधिवक्ता संशोधन विधेयक, 2026 के मसौदे में शामिल है। नए शुल्क को दो भागों में बांटा गया है: राज्य बार काउंसिल के लिए ₹18,000 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए ₹4,500। यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है और 31 जुलाई, 2026 तक इस पर सार्वजनिक परामर्श जारी रहेगा।

 #सुप्रीम  #कोर्ट का  #अहम  #फैसला,  #भाई  #बहनों की  #अनुमति के  #बिना  #बाहरी लोगों को नहीं  #बेच सकेंगे  #कृषि  #भूमि...
18/07/2026

#सुप्रीम #कोर्ट का #अहम #फैसला, #भाई #बहनों की #अनुमति के #बिना #बाहरी लोगों को नहीं #बेच सकेंगे #कृषि #भूमि। पहला हक उनको खरीदने का है, अगर वो नहीं खरीदते है तो सबकी सहमति के बाद ही बाहरी व्यक्ति को बेच सकेंगे खेत।

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि विरासत में मिली कृषि (खेत) भूमि पर भी 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' (Hindu Succession Act) की धारा 22 लागू होती है।

इसका मतलब है कि यदि कोई क्लास-1 वारिस (बेटा, बेटी, पत्नी, या माँ) अपनी विरासत की कृषि भूमि का हिस्सा किसी बाहरी व्यक्ति को बेचना चाहता है, तो उसे पहले परिवार के अन्य क्लास-1 सदस्यों को इसे खरीदने का मौका देना अनिवार्य होगा।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य परिवार के भीतर ही विरासत में मिली संपत्ति और कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है।

```Wish you a Very Happy Birthday Bhai. God bless you with a beautiful and successful life.```
15/07/2026

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दुष्कर्म के आरोपी युवक पर 4 साल तक झूठा केस दर्ज करा-कर जेल में रखने पर 30 वर्ष की महिला संगीन अपराध की दोषी पाई गई। एमप...
31/05/2026

दुष्कर्म के आरोपी युवक पर 4 साल तक झूठा केस दर्ज करा-कर जेल में रखने पर 30 वर्ष की महिला संगीन अपराध की दोषी पाई गई।
एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोषी महिला को दुष्कर्म के झूठे केस में 10 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही निर्दोष पीड़ित युवक को 4 वर्ष तक जेल में रहने के कारण मानसिक एवं शारीरिक कष्टों के लिए 4 लाख रुपये देने का आदेश भी दिया गया।
#झूठा_केस #कानून_का_दुरुपयोग #सत्यमेव_जयते #न्याय
कोर्ट सुनवाई के दौरान केस झूठा पाने के बाद दोषी महिला को संगीन अपराध की दोषी पाया। कोर्ट ने बताया है कि संगीन अपराध में दोषी पाए जाने पर महिला को 10 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
साथ ही निर्दोष युवक को 4 वर्ष तक जेल में रहने के कारण मानसिक एवं शारीरिक कष्टों के लिए 4 लाख रुपये देने का आदेश भी दिया।
पुलिस ने निर्दोष युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के दौरान पता चला कि पीड़िता अपने पति से अलग रहती है और उसका युवक से कोई संबंध नहीं है। झूठा मुकदमा दर्ज कराने के कारण निर्दोष युवक को 4 वर्षों तक जेल में रहना पड़ा।

इस फैसले से झूठे दुष्कर्म केस दर्ज कराकर निर्दोष लोगों को फंसाने वालों को कड़ा संदेश मिलेगा और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास और मजबूती बढ़ेगी।


मेरठ की एक अदालत ने एक 30 वर्षीय महिला को एक व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने के आरोप में 10 साल की कैद और 2 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया।

अदालत ने महिला को उस व्यक्ति को चार साल की गलत कैद के कारण हुई मानसिक और शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में4 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

⚖️ राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत सुनवाई ...
26/05/2026

⚖️ राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत सुनवाई करने वाली अदालतें उन आरोपों के आधार पर मुआवजा नहीं दे सकतीं, जो पहले से किसी आपराधिक अदालत में विचाराधीन हों और जिन पर अंतिम निर्णय अभी तक नहीं आया हो।

यह मामला माननीय न्यायमूर्ति Farzand Ali की पीठ के समक्ष विचाराधीन था, जिसमें निचली अदालत द्वारा पत्नी को मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के आधार पर 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। बाद में अपीलीय अदालत ने भरण-पोषण की राशि में तो कमी कर दी, लेकिन मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा, जिसे पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि जब क्रूरता और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप पहले से ही सक्षम आपराधिक अदालत में लंबित हों, तो DV Act के तहत कार्यवाही कर रही अदालतों द्वारा उन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष देना उचित नहीं है। ऐसा करना न केवल पूर्व निर्णय जैसा होगा, बल्कि इससे दोनों पक्षों के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम का उद्देश्य किसी आपराधिक मुकदमे का विकल्प बनना नहीं है, बल्कि पीड़ित महिला को तत्काल नागरिक राहत उपलब्ध कराना है, जिसमें भरण-पोषण, आवास, सुरक्षा और आर्थिक सहायता शामिल है ताकि वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। जब तक आपराधिक अदालत में आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक DV Act के तहत मुआवजा देने जैसे आदेश विवादित निष्कर्षों पर आधारित नहीं हो सकते।

इसी आधार पर Rajasthan High Court ने निचली अदालत द्वारा दिए गए 2 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को रद्द कर दिया।

``` #राजस्थान के स्कूलों में  #राजस्थानी  #भाषा पढ़ाई जाएगी;  #सुप्रीम कोर्ट ने इसे चरणबद्ध तरीके से पढ़ाने के निर्देश द...
12/05/2026

``` #राजस्थान के स्कूलों में #राजस्थानी #भाषा पढ़ाई जाएगी; #सुप्रीम कोर्ट ने इसे चरणबद्ध तरीके से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं।```

DMK is my Political enemy and BJP is my Ideological enemy!डीएमके मेरी राजनीतिक शत्रु हैऔर भाजपा मेरी वैचारिक शत्रु है!  ...
06/05/2026

DMK is my Political enemy and BJP is my Ideological enemy!

डीएमके मेरी राजनीतिक शत्रु है
और भाजपा मेरी वैचारिक शत्रु है!

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05/05/2026

#भर्ती2021 #रद्द #ही #रहेगी- #हाइकोर्ट #ने #फैसले #पर #लगाई #मुहर, #पानी #में #दूध #मिल #जाए #तो #दोनों #को #अलग #नहीं #किया #जा #सकता : * #सुप्रीम #कोर्ट

'जो भी भ्रष्टाचारी और गुंडे हैं, वे जेल जाएंगे': शुभेंदु अधिकारी
04/05/2026

'जो भी भ्रष्टाचारी और गुंडे हैं, वे जेल जाएंगे': शुभेंदु अधिकारी

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