17/09/2025
DDP #6-170925
भारतीय उपबंध अधिनियम, 1882 (Indian Easements Act, 1882)
का हकदार।
✅ संक्षेप में:
यह अधिनियम दो भागों में बँटा है –
1. उपबंध (Easement) – किसी दूसरे की भूमि पर अधिकार (जैसे रास्ता, पानी, रोशनी)।
2. लाइसेंस (License) – केवल अनुमति, जिससे कोई अधिकार स्थायी रूप से उत्पन्न नहीं होता।
भाग 1 – उपबंध (Easements)
धारा 1–2: प्रारंभिक
धारा 1 – अधिनियम का नाम, विस्तार और लागू होने की तिथि।
धारा 2 – परिभाषाएँ:
उपबंध (Easement) – किसी व्यक्ति को दूसरे की भूमि पर अपनी भूमि के लाभ हेतु अधिकार (जैसे रास्ता, हवा, रोशनी, पानी)।
प्रधान संपत्ति (Dominant Heritage) – वह भूमि जिसे लाभ मिलता है।
अधीन संपत्ति (Servient Heritage) – वह भूमि जिस पर अधिकार चलता है
धारा 4–7: उपबंध का स्वरूप
धारा 4 – उपबंध का अर्थ = किसी और की भूमि में कुछ करने या रोकने का अधिकार।
धारा 5 – यह अधिकार अधीन संपत्ति के मालिक के अधिकारों को सीमित करता है।
धारा 6 – उपबंध सकारात्मक (कुछ करने देना) या नकारात्म (कुछ रोकना) हो सकता है।
धारा 7 – उपबंध में हवा, रोशनी, पानी, सहारा, रास्ता आदि के अधिकार शामिल।
धारा 8–13: कौन उपबंध लगा सकता है
धारा 8 – जिसे संपत्ति का हस्तांतरणीय अधिकार है, वह उपबंध लगा सकता है।
धारा 9 – पट्टेदार (lessee) सीमित हद तक उपबंध लगा सकता है।
धारा 10 – उपबंध अधिकार दाता के अधिकार से अधिक नहीं हो सकता।
धारा 11–12 – उपबंध स्थायी, अस्थायी, सशर्त या निरशर्त हो सकता है।
धारा 13 – मकान मालिक–किरायेदार, बंधकदाता–बंधकग्राही के बीच भी उपबंध बन सकता है।
धारा 14–23: उपबंध की विशेषताएँ
धारा 14 – उपबंध संपत्ति की प्रकृति के अनुरूप होना चाहिए।
धारा 15 – उपबंध प्रस्क्रिप्शन (Prescription) से भी बनता है = 20 साल की निर्बाध उपयोग (सरकारी भूमि पर 30 साल)।
धारा 16–20 – उपबंध स्पष्ट/अस्पष्ट, सतत/असतत, पूर्ण/सीमित, समय या प्रयोजन हेतु हो सकता है।
धारा 21–23 – उपबंध जगह, मौसम या तरीके के अनुसार सीमित हो सकता है।
धारा 24–28: अधिकार और कर्तव्य
धारा 24 – प्रधान मालिक उपबंध का उचित उपयोग करेगा।
धारा 25 – प्रधान मालिक अनावश्यक भार नहीं बढ़ाएगा।
धारा 26 – अधीन मालिक उपबंध में बाधा नहीं डाल सकता।
धारा 27 – अधीन मालिक अपनी भूमि का उपयोग कर सकता है जब तक उपबंध प्रभावित न हो।
धारा 28 – उपबंध का विस्तार उद्देश्य और प