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03/06/2025
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Legal, Tax & Compliance Management

21/11/2024

👉भूमि खरीदते😍 समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? आईये जानते हैं :😳

-भूमि आप जिस व्यक्ति से खरीद रहे हों, वह व्यक्ति उस भूमि का 'वास्तविक मालिक' है भी या नहीं ?

'वास्तविक मालिक' का अर्थ एक ऐसा व्यक्ति जो केवल राजस्व-रिकॉर्ड (जमाबंदी) में ही मालिक के रूप में दर्ज न हो बल्कि कानून के अंतर्गत भी भूमि के मालिक की हैसियत रखता हो। जमाबंदी में मालिक के रूप में दर्ज होने मात्र से ही यह पूरी तरह से सिद्ध नहीं होता कि वह व्यक्ति ही भूमि का 'वास्तविक मालिक' है। कई बार गैर-कानूनी सम्पति हस्तांतरण, गलत इंतकाल, त्रुटि व फ़्रॉड आदि के चलते एक ऐसा व्यक्ति भी राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी ) में मालिक के रूप में दर्ज हो गया होता है जो उस भूमि का 'वास्तविक मालिक' होता ही नहीं। बाद में कानूनी विवाद के चलते ऐसे व्यक्ति के नाम को जमाबंदी से हटाया जा सकता है ।ऐसे व्यक्ति से भूमि खरीदने का तात्पर्य अपनी गूढ़ कमाई को गंवाना और अपने आप को वर्षों के कानूनी झंझटों में फंसाना है।

भूमि के 'वास्तविक मालिक' बारे जाँच हेतु एक कानूनी रूप से सक्षम व्यक्ति को चाहिए कि वह उस भूमि से संबंधित पिछले कम से कम 15-20 वर्षों का इतिहास जाँच कर लें। वह भूमि इन 15-20 वर्षों में किस किस की मलकियत में रही है और कैसे कैसे इन वर्षों में भूमि के मालिक बदले हैं ? भूमि बेचने वाला वर्तमान मालिक, उस भूमि का मालिक कैसे बना है ? वह कानूनी दृष्टि से सही से मालिक बना है कि नहीं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि वर्तमान में वह व्यक्ति या पिछले 15-20 वर्षों में उससे पहले के व्यक्ति (जिनसे वर्तमान में बेचने वाला मालिक बना है ) गैर-कानूनी तरीके से मालिक बने थे ? अन्य शब्दों में, ज़ब तक बेचने वाले व्यक्ति के पास भूमि का 'Perfect Title' ना हो, उससे भूमि खरीदना हानिकारक हो सकता है। इस प्रकार की जाँच को पटवारी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड से और तहसील में उस भूमि से संबंधित विभिन्न प्रकार के पंजीकृत डीड्स (Registered deeds) की गहनता से जाँच करके किया जा सकता है।
हालांकि इस प्रकार की किसी भी तरह की हानि को cover करने के लिए आप बैनामा (Sale Deed) में एक विशेष क्लॉज़ (Clause) भी डाल सकते हैं जिसमें ऐसा प्रावधान हो कि भविष्य में इस प्रकार की हानि की संभावना पर बेचने वाला आपकी क्षतिपूर्ति करे। स्मरण रहे कि एक ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसके पास भूमि का perfect title न हो (फिर चाहे वह जमाबंदी में मालिक के रूप में दर्ज भी क्यों न हो ) द्वारा आपके नाम बैनामा (Sale deed) तहसील जाकर रजिस्टर करवाने से आप भूमि के मालिक नहीं बन जाते। ऐसे बैनामे को कोर्ट से रद्द करवाया जा सकता है।

-क्या जिस भूमि को आप खरीद रहे हो उसका खसरा नंबर वही है जो आपको बताया जा रहा है या बैनामे (Sale Deed) में लिखा जा रहा है ?

खसरा नंबर राजस्व विभाग द्वारा उस भूमि को पहचान हेतु दिया गया एक नंबर होता है और एक गांव के सभी खसरा नम्बरों से मिलकर लठ्ठा/मोमी/मुसावी (Map ) बना होता है। वह भूमि किस खसरा नंबर के अंतर्गत आती है इसे केवल राजस्व के कर्मचारी ही सटीकता के साथ बता सकते हैं इसलिए भूमि खरीदने का निर्णय लेने से पहले संबंधित पटवारी/कानूनगो से अवश्य सम्पर्क करें। इन कर्मचारियों से सम्पर्क करने पर आपको उस भूमि से संबंधित अन्य बहुत सी महत्वपूर्ण बातें भी पता चलती हैं जिनका भूमि खरीदने के निर्णय पर बहुत बड़ा प्रभाव रहता है। अतः पूर्ण रूप से सुनिश्चित कर लें कि जो भूमि आपको मौका पर दिखाई जा रही है वही भूमि कागज़ों में आपको बेची जा रही है। साथ में उस उस भूमि की सीमाएँ मैप के हिसाब से मौका पर कहाँ कहाँ तक हैं, इसकी पुष्टि भी मौका पर करनी अत्यंत आवश्यक है।

कई बार यह देखने में आया है कि खरीदने वाले को मौका पर भूमि कोई और दिखाई जाती है और असल में कागज़ो में बेची गयी भूमि कहीं और स्थित होती है। यह गलती से भी होता है और फ़्रॉड के रूप में जानबूझ कर भी किया जाता है। कई मामलों में तो असामाजिक तत्वों द्वारा इस तरह के फ़्रॉड में लोगों को फंसाकर सरकारी भूमि तक बेच दी जाती है जिसमें खरीदने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसी सरकारी भूमि खरीदने के बाद घर आदि बना दिया जाता है और भविष्य में ज़ब यह सच्चाई सामने आती है तो वह ताउम्र के लिए एक बहुत ही गंभीर विवाद में फंस जाते हैं। इसलिए इस पहलू पर विशेष ध्यान दें।

-जो भूमि आप खरीद रहे हैं वह कहीं सांझा/मुशतरका खाते की तो नहीं है ? यदि हां, तो क्या आपने सांझा भूमि से संबंधित भूमि खरीदने से संबंधित आवश्यक सावधानी बरती है ?

भूमि की मलकियत/स्वामित्व दर्शाने हेतु राजस्व रिकॉर्ड/जमाबंदी में कई खाते बने होते हैं जिनमें एक या अधिक खसरा नम्बर हो सकते हैं। खाते दो प्रकार के होते हैं, पहले-व्यक्तिगत खाते (वाहिद खाते) जिसमें खसरा नंबर या खसरा नंबरों का एक ही व्यक्ति मालिक होता है, दूसरे-सांझे खाते (मुश्तरका/मुश्त्रीका) जिसमें खसरा नंबर या खसरा नंबरों के एक से अधिक व्यक्ति, साथ में हिस्सानुसार मालिक (Co-sharer) होते हैं। कोशिश करें कि आप पहले प्रकार के खाते से भूमि खरीदें क्योंकि ऐसे खाते से मालिक आपको पूरे खाते की भूमि में से विशेष भूमि (Specific land) बेच सकता है जिसके लिए आप ततीमा भी कटवा सकते हो। ऐसी भूमि खरीदने का कानूनी प्रभाव यह है कि खरीदी गयी भूमि के आप अकेले मालिक बनते हो।
इसके विपरीत, यदि दूसरे प्रकार के खाते से भूमि खरीद रहे हों तो ध्यान रखें कि आप क्योंकि उस मुशतरका खाते के सभी मालिकों से भूमि नहीं खरीद रहे होते हो इसलिए आपको उस पूरी खाते में दर्ज भूमि का हिस्सा ही बेचा जा सकता है ना कि वह विशेष भूमि (Specific land)जो आपको मौका पर दिखाई जा रही है। इस का कानूनी प्रभाव यह है कि आप भी ऐसी भूमि खरीदने के बाद उस साँझा/मुशतरका खाते में सह-मालिक (Co-sharer) बन जाओगे और हो सकता है कि जो भूमि आपको मौका पर दिखाई गयी हो उसके बारे में भविष्य में साँझा मालिकों के साथ आपका विवाद हो जाये और वह साँझा मालिक उस भूमि पर आपके घर बनाने आदि की प्रक्रिया के विरुद्ध अदालत से स्टे ऑर्डर ले आये। इस प्रकार के विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया में जब पूरे खाता की भूमि, 'साँझा खाते' को 'व्यक्तिगत खाते' बनाने हेतु, तकसीम (Partition) की जाएगी तो हो सकता है कि आपको उस भूमि से, जो आपको बेचने के समय दिखाई गई हो, अलग भूमि कहीं आबंटित हो जो उपयोगी ही न हो या उस कीमत के लायक न हो जो आपने चुकाई हो।

-क्या भूमि खरीदने के बारे में कहीं कोई कानूनी रोक तो नहीं है ?

कई प्रकार की भूमि को खरीदने में कानूनी रोक लागू हो सकती है। जैसे: जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के अलावा कोई भी व्यक्ति भूमि नहीं खरीद सकता।
कांगड़ा ज़िला के पालमपुर-बैजनाथ में 'चाय बगीचा' किस्म की भूमि को बेचा नहीं जा सकता।
सरकार द्वारा विभिन्न स्किमों में लोगों को दी गयी भूमि को भी एक निश्चित समय तक बेचा नहीं जा सकता।
ऐसे क्षेत्रों (ख़ासकर शहरी क्षेत्रों) में जहां 'हि. प्र. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1977' लागू होता हो वहां बिना डायरेक्टर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, की पूर्वानुमति के भूमि को कुछ दशाओं में खरीदा नहीं जा सकता। बिना अनुमति के खरीदी भूमि पर भविष्य में आपको उस भूमि पर घर आदि बनाने के लिए टाउन एंड कंट्री डिपार्टमेंट परमिशन ही नहीं देगा और आप भूमि का इस्तेमाल ही नहीं कर पाएंगे ।
इस प्रकार की भूमि पर कानूनी रोक के बावजूद भूमि खरीदने से आपको हानि हो सकती है।

-जो भूमि आप खरीद रहे हैं उसमें आप तुरंत कब्ज़ा कर रहे हैं या नहीं ?

भूमि खरीदने की प्रक्रिया में सम्भवतः सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप खरीदी हुई भूमि पर कब्ज़ा कर रहे हैं या नहीं। यदि आपने भूमि घर आदि बनाने के लिए ली है तो कोशिश करें कि भूमि खरीदने के बाद आप यह कार्य शीघ्र शुरू कर दें। कम से कम बाड़बंदी (Fencing) अवश्य कर लें। बिना कब्ज़े के भूमि खरीदना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के समान हो सकता है जबकि साँझा भूमि में हिस्सा खरीदने के बाद घर आदि बना देने से वह विशेष भूमि काफ़ी हद तक सुरक्षित हो जाती है जोकि अन्यथा तकसीम आदि होने पर उपरोक्त के अनुसार, साँझा खाते में कहीं दूसरी जगह भी मिल सकती है।

-इसके अतिरिक्त बहुत सी अन्य बातें हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए। जैसे:

*खरीदी गयी भूमि तक पहुँच हेतु सड़क या रास्ता।

*खरीदी गयी भूमि पर बिजली पानी आदि की उपलब्धता।

*डील करने के बाद, पैसे देने से पहले 'बयाना' (Agreement) बनाकर उसको attest करवाना या तहसील में रजिस्टर करना।

*यदि भूमि मुख़्तयार (Power of attorney) के माध्यम से बेची जा रही हो तो Power of Attorney की जाँच करके यह सुनिश्चित करना कि जिसके नाम Power of attorney हो उसके पास भूमि को बेचने की power हो तथा यह कि भूमि का मालिक जीवित हो और उसने वह Power of attorney रद्द न कर दिया हो। केवल पंजीकृत Power of attorney ही भूमि बेचने हेतु वैध होती है न कि attested या notarised.

*सेल डीड तहसील में रजिस्टर करवाते समय अर्जिनवीस/वकील को वह राशि जिसके बदले आपने भूमि क्रय की हो, लिखने को कहें। आमतौर पर यह राशि छुपाई जाती है ताकि स्टाम्प ड्यूटी व पंजीकरण शुल्क के रूप में कम खर्चा वहन करना पड़े। Hindu Succession Act, 1956 की धारा 22 के अंतर्गत वास्तविक राशि बताना लाभप्रद होता है।

*सेल डीड या उससे पहले बयाना (Agreement) को ड्राफ्ट करते समय विशेष ध्यान दें। उसमें आपकी डील/सहमति से संबंधित सभी प्रकार की चीज़ों का वर्णन हो और दोनों पक्षों के कानूनी दायित्व स्पष्टता से लिखें गए हों। जल्दबाज़ी में सेल डीड/बयाना न बनाएं।

*भूमि बेचने वाले व्यक्ति की पहचान कर लें। कहीं किसी की भूमि को कोई और व्यक्ति आपको फ़्रॉड करके न बेच दे। इसके अतिरिक्त भूमि बेचने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ हो। नाबालिग, मानसिक रूप से विक्षिप्त (चाहे वृद्ध होने के चलते) से भूमि कभी भी न खरीदें।

धन्यवाद।


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18/08/2024

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