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25/08/2026

फर्जी दस्तावेज के जरिए मिली सरकारी नौकरी पर नियुक्ति का कोई पक्का अधिकार नहीं:-
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

25/08/2026

सिर्फ़ घरेलू हिंसा का केस पेंडिंग होने की वजह से पति को विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता:-
मद्रास हाईकोर्ट

25/08/2026

हत्या जैसे गंभीर अपराध में जमानत देते समय ठोस और न्यायसंगत कारण बताना जरूरी:-
सुप्रीम कोर्ट

25/08/2026

तलाक के समझौते में छोड़े गए पैसों के दावे को DV Act की कार्यवाही में दोबारा नहीं उठाया जा सकता:-
सुप्रीम कोर्ट

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में धोखाधड़ी से संबंधित रकम आ जाना मात्र अपन...
25/08/2026

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में धोखाधड़ी से संबंधित रकम आ जाना मात्र अपने आप में उसे अपराधी नहीं बना देता किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए यह देखना आवश्यक है कि उसे रकम के अवैध स्रोत की जानकारी थी या उसने जानबूझकर उस रकम के लेन-देन में कोई भूमिका निभाई थी।
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सहमति से वयस्कों का संबंध निजी निर्णय, लिव-इन रिश्ते में माता-पिता का अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाई को...
25/08/2026

सहमति से वयस्कों का संबंध निजी निर्णय, लिव-इन रिश्ते में माता-पिता का अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दो वयस्क यदि अपनी स्वतंत्र इच्छा और सहमति से साथ रह रहे हैं, तो उनके निजी संबंधों में माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों का अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति अपने जीवन के महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय स्वयं लेने के लिए स्वतंत्र हैं। केवल इस आधार पर कि परिवार उनके संबंध को स्वीकार नहीं करता, उन्हें अलग होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

लिव-इन संबंध में रहने वाले दो वयस्कों की स्वतंत्र इच्छा, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना आवश्यक है। परिवार की असहमति अपने आप में ऐसा आधार नहीं बन जाती जिससे किसी बालिग व्यक्ति की पसंद और स्वतंत्र निर्णय पर रोक लगाई जा सके।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर लिव-इन संबंध को स्वतः विवाह का दर्जा प्राप्त हो जाता है। विवाह और लिव-इन संबंध की कानूनी स्थिति अलग-अलग है, लेकिन वयस्कों की सहमति से बने निजी संबंधों में कानून के दायरे से बाहर जाकर दबाव या हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्कों के अपने जीवन के संबंध में निर्णय लेने के अधिकार को महत्वपूर्ण संरक्षण प्रदान करता है।
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25/08/2026

विवादित तथ्य और स्वामित्व का प्रश्न होने पर केवल स्वीकारोक्ति के आधार पर फैसला नहीं दिया जा सकता:-
दिल्ली हाईकोर्ट

25/08/2026

वाद और काउंटर-क्लेम पर एक साथ दिए गए फैसले के विरुद्ध एक ही अपील पर्याप्त:-
सुप्रीम कोर्ट

25/08/2026

हमारी सेवाएँ-

हमसे आप प्राप्त कर सकते हैं

1-सभी प्रकार के कानूनी दस्तावेज़ (Legal Drafting)

2-कानूनी नोटिस का प्रारूप (Legal Notice Drafting)

3-नोटिस का जवाब / जवाबदेही पत्र (Reply / Representation)

4-आरटीआई (RTI) आवेदन तैयार करना और लगाना

5-एफआईआर हेतु आवेदन / प्रार्थना पत्र

6-पुलिस अधीक्षक (SP) एवं अन्य अधिकारियों को शिकायत पत्र

7-न्यायालय में याचिकाओं (Petitions) की ड्राफ्टिंग

8-जमानत आवेदन (Bail Application) ड्राफ्टिंग

9-गुजारा भत्ता (Maintenance) से संबंधित आवेदन एवं कानूनी मार्गदर्शन

10-तलाक संबंधी दस्तावेज़ एवं कानूनी प्रक्रिया संबंधी सहायता

11-दहेज प्रताड़ना मामलों से संबंधित दस्तावेज़ एवं कानूनी मार्गदर्शन

12-घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) से संबंधित सहायता

13-हिंदू विवाह अधिनियम से संबंधित कानूनी दस्तावेज़ एवं मार्गदर्शन

14-चेक बाउंस (धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम) मामलों से संबंधित सहायता

15-संपत्ति एवं पारिवारिक विवादों से संबंधित दस्तावेज़

16-शपथपत्र (Affidavit), घोषणा-पत्र एवं अन्य विधिक प्रारूप

17-न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों (High Court / Supreme Court Judgments) की प्रमाणिक PDF प्रति एवं व्याख्या

18-कोर्ट मैरिज एवं विवाह पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज़ों की ड्राफ्टिंग

19-विभिन्न कानूनी विषयों पर शोध (Legal Research)

20-केस से संबंधित महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Case Laws) उपलब्ध कराना

21-मुकदमे की कानूनी रणनीति पर दस्तावेज़ आधारित मार्गदर्शन

22-अपील, पुनरीक्षण एवं अन्य कानूनी कार्यवाहियों हेतु दस्तावेज़ तैयार करना

23-विभिन्न विभागों हेतु आवेदन, प्रत्यावेदन एवं अभ्यावेदन तैयार करना

24-कानूनी सलाह एवं समाधान

सभी सेवाएँ उपलब्ध तथ्यों एवं लागू विधि के अनुसार पेशेवर ढंग से तैयार की जाती हैं प्रत्येक सेवा का शुल्क उसके स्वरूप एवं कार्य की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग निर्धारित है।

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✍️कानूनी सलाहकार

मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे हाईकोर्ट ने 2021 के कानून की पांच धाराएं रद्द कींमकान मालिक और किरायेदा...
25/08/2026

मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे हाईकोर्ट ने 2021 के कानून की पांच धाराएं रद्द कीं

मकान मालिक और किरायेदारों के बीच किराया बढ़ाने को लेकर लंबे समय से विवाद सामने आते रहे हैं ऐसे ही मामले में हाईकोर्ट ने किरायेदारी से जुड़े वर्ष 2021 के कानून की पांच धाराओं को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
#किरायेदार #मकानमालिक #हाईकोर्ट #किरायेदारीकानून

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