16/03/2022
मेरे प्यारे बंधु ,आज सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्म का दर्पण आम जनमानस को प्रेषित किया जा रहा है जो राष्ट्र की नजर में सत्य है ,क्योंकि सत्य शब्द का प्रयोग शासन ,प्रशासन , न्याय और भ्रष्ट व्यक्ति भी अधिक प्रयोग करना चाहता है, लेकिन दूसरों से ,जब किसी व्यक्ति को सक्षम अधिकार प्राप्त हो जाता है ,तो उसे उसी तरह से संचालित करता है ,जैसा पहले से होता आ रहा है जबकि कुछ व्यक्ति उससे हटकर या अलग ढंग से कार्य करने के इच्छुक हैं या कार्य करना चाहते हैं उसे भी लोक प्रशंसा करने के बजाए आलोचना या बाधाउत्पन्न करते हैं ,मैं अनुभव किया हूं न्याय व्यवस्था में 70 परसेंट पीठासीन अधिकारी अक्षम है और अधिवक्ता गण 80 परसेंट परसेंट कुशल नहीं है. जबकि उच्च न्यायालय में बैठेपीठासीन अधिकारी या न्यायमूर्ति अपने मातहत से भी अक्षम है क्योंकि उच्च न्यायालय में केवल तीन व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, दोनों पक्षों के अधिवक्ता एवं एक न्यायमूर्ति की आवश्यकता होती है जो केवल मातहत अधिकारी द्वारा दिए गए निर्णय समालोचना करना होता है फिर भी यथाशीघ्र नहीं कर पाते रहो इसलिए पीठासीन अधिकारी सहित अधिवक्ता गढ़ का भी परीक्षा पद्धति प्रत्येक वर्ष या सुविधानुसार आयोजित किया जाना चाहिए ताकि गुणवत्ता एवं उत्साह को बढ़ाया जा सके. आपका अभय