11/04/2026
वकालत की दुनिया में अगर “ #डेयरडेविल” शब्द को किसी एक शख्सियत में ढालना हो, तो वो नाम बिना किसी हिचक के होगा — Ram Jethmalani।
कहानी सिर्फ उनकी कानूनी पकड़ की नहीं थी, बल्कि उस बेखौफ अंदाज़ की थी, जो अदालत की दीवारों में भी गूंजता था।
एक बार सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान माननीय जज साहब ने संविधान की एक व्याख्या की, जो जेठमलानी साहब को स्वीकार नहीं थी। अब आम वकील क्या करता? सिर हिलाता, “As Your Lordship pleases” कहकर आगे बढ़ जाता।
लेकिन यहाँ बात जेठमलानी की थी…
उन्होंने तुरंत टोक दिया।
जज साहब नाराज़ हुए। माहौल तन गया। अदालत में सन्नाटा छा गया।
और तभी उस सन्नाटे को चीरते हुए जेठमलानी साहब ने कहा—
“When I wear this uniform, you are not in liquid form.”
ये सिर्फ एक वाक्य नहीं था, ये उस आत्मविश्वास की पराकाष्ठा थी जो 65+ साल की प्रैक्टिस, संविधान की गहरी समझ, और अपने पेशे के प्रति अटूट विश्वास से आती है।
वो अदालत में सिर्फ केस नहीं लड़ते थे —
वो न्यायिक संवाद को जीवित रखते थे।
वो याद दिलाते थे कि कोर्टरूम में वकील सिर्फ “ submit” करने नहीं, बल्कि “चैलेंज” करने भी आता है — पूरे सम्मान के साथ, लेकिन बिना डर के।
आज के दौर में, जब कई बार वकालत “सेफ प्ले” का खेल बनती जा रही है, जेठमलानी साहब की ये शैली एक संदेश देती है—
कानून की असली ताकत किताबों में नहीं, उसे निर्भीकता से रखने वाले लोगों में होती है।
हाँ, ये भी सच है कि ऐसी बेबाकी हर किसी के बस की बात नहीं…
क्योंकि इसके पीछे सिर्फ हिम्मत नहीं, बल्कि गहरी तैयारी और असाधारण ज्ञान भी चाहिए।