11/06/2026
देश की #न्याय_व्यवस्था को अधिक तेज़, #पारदर्शी और #तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIC) ने “E-Prisons Early Release Processing Module” को लॉन्च किया है।
इस पहल पर हाल ही में #सुप्रीम_कोर्ट ने #संज्ञान लेते हुए न केवल इसकी सराहना की बल्कि संबंधित कार्यवाही को औपचारिक रूप से समाप्त भी कर दिया।
यह मामला #केस_टाइटल:- Surendra @ Sunda v. State of Uttar Pradesh से संबंधित था,
जिसमें उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समय से पहले #रिहाई की प्रक्रिया में हो रही #देरी का गंभीर मुद्दा उठाया गया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के साथ जस्टिस जे.के. माहेश्वरी, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल थे।
इससे पहले 13 अप्रैल 2026 को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने इस पूरे विषय पर #विस्तृत_निर्देश जारी किए थे,
जिसमें देशभर में एक समान और #ऑटोमेटेड_सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया था।
कोर्ट ने पाया कि विभिन्न राज्यों की #जेलों में सजा में छूट और समय से पहले रिहाई से जुड़े मामलों में लंबे समय तक #देरी हो रही
थी,
जिसका मुख्य कारण पारंपरिक फाइल-आधारित प्रक्रिया थी।
कई मामलों में योग्य कैदियों की अर्जियां वर्षों तक #लंबित पड़ी रहती थीं, जिससे न्याय में देरी हो रही थी।
इसी समस्या के समाधान के लिए #तकनीक आधारित प्रणाली विकसित करने का #निर्देश दिया गया था।
इसके बाद ने मौजूदा ्लेटफॉर्म के भीतर यह नया मॉड्यूल तैयार
किया,
जो अब ऐसे #कैदियों की पहचान करने, उनके मामलों को डिजिटल रूप से प्रोसेस करने और हर स्तर पर होने वाली देरी पर नज़र रखने में सक्षम है।
इसे शुरुआती तौर पर #आगरा_सेंट्रल_जेल और #लखनऊ जिला जेल में #पायलट_प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया
गया,
जिसके #सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसे #देशव्यापी स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कहा कि इस पूरी व्यवस्था के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ( ) और #जेल_प्रशासन के अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर निभाई जाएगी।
कोर्ट ने यह भी माना कि इस डिजिटल पहल से न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि #पारदर्शिता भी बढ़ेगी
और योग्य कैदियों को समय पर #न्याय मिल सकेगा।
इसी आधार पर अदालत ने मामले की कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद करने का आदेश दिया।
इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में योगदान देने वाले एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर और एडवोकेट रवि रघुनाथ की भी कोर्ट ने विशेष रूप से सराहना की, जिनके प्रयासों से यह पहल पायलट स्तर से आगे बढ़कर #राष्ट्रीय_स्तर तक पहुंच सकी।
देश की #न्याय_व्यवस्था को अधिक तेज़, #पारदर्शी और #तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIC) ने “E-Prisons Early Release Processing Module” को लॉन्च किया है।