Manoj Chaudhary Advocate Criminal Lawyer

Manoj Chaudhary Advocate Criminal Lawyer Advocate & Legal Consultant for Criminal & Matrimonial Cases.

06/01/2026

लोग कहते हैं कि वकील की फीस बहुत महँगी होती है,
लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि मुकदमा हारने की कीमत क्या होती है।
एक गलत दस्तावेज़, एक गलत बयान,
और बिना कानूनी सलाह लिया गया एक निर्णय
ज़िंदगी भर की परेशानी बन सकता है।
समझिए—कानूनी सलाह कोई खर्च नहीं होती,
कानूनी सलाह आपकी सुरक्षा होती है।
चाहे मामला संपत्ति का हो,
या आपराधिक केस का,
या केवल एक कानूनी नोटिस का उत्तर देना हो,
एक गलत कदम आपको वर्षों तक अदालत के चक्कर कटवा सकता है।
इसलिए समस्या आने के बाद नहीं,
समस्या आने से पहले कानूनी सलाह लेना ज़रूरी है।

20/10/2025

दीपक घर को प्रकाशमय करते है और सही व्यक्ति जीवन को।

अच्छे व्यक्ति बनें और लोगों का जीवन प्रकाशमय करें

शुभ दीपावली

मनोज चौधरी एडवोकेट
🙏

Big shout out to my newest top fans! 💎Kamal SalujaDrop a comment to welcome them to our community,  fans
27/09/2025

Big shout out to my newest top fans! 💎

Kamal Saluja

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24/09/2025

21/08/2025
बैंकों को 15 दिन में मृत्यु दावा का निराकरण (डेथ क्लेम सेटलमेंट) करना होगा,  देरी करने वाले बैंक पर लगेगा ₹5,000 रोज जुर...
19/08/2025

बैंकों को 15 दिन में मृत्यु दावा का निराकरण (डेथ क्लेम सेटलमेंट) करना होगा, देरी करने वाले बैंक पर लगेगा ₹5,000 रोज जुर्माना !

​भारतीय रिजर्व बैंक ने 'सेटलमेंट ऑफ क्लेम इन रेस्पेक्ट ऑफ डिसीस्ड कस्टमर ऑफ बैंक डायरेक्शन, 2025' जारी किया है।
1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इन दिशा निर्देशों के तहत मृत ग्राहकों के बैंक खातों और लॉकर से संबंधित दावों के निपटान की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया गया है।

इन दिशानिर्देशों के तहत, बैंकों को नॉमिनी वाले खातों के दावों का निपटान 15 दिनों के भीतर करना होगा और यदि कोई नॉमिनी नहीं है, तो 30 दिनों के भीतर करना होगा।
यदि बैंक इस समय सीमा में देरी करते हैं, तो उन्हें जमा राशि पर बैंक रेट के साथ 4% वार्षिक ब्याज और लॉकर या सेफ कस्टडी के मामले में ₹5,000 प्रतिदिन का जुर्माना देना होगा।

लाकर में रखी चीजों के हस्तांतरण के लिए बैंक को ग्राहकों के नॉमिनी/ वारिसों से पत्राचार करना होगा।
यदि मृतक ने जीवित रहते नामिनी नहीं बनाया है तो भी 15 लाख रु. तक के दावों की प्रक्रिया आसान होगी। इसके लिए सिर्फ उत्तराधिकारी को अनापत्ति प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
15 लाख रु. से अधिक के दावों के लिए ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जरूरी होगा।

वसीयत विवादित है तो प्रोबेट आफ विल, लेटर आफ एडमिनिस्ट्रेशन और कोर्ट डिग्री की जरूरत होगी।

डिपॉजिट संबंधी दावों के निपटान के लिए बैंक को प्रचलित दर ( वर्तमान में 5.75% ) + 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
लाकर और सेफ कस्टडी के दावों पर रोज ₹5,000 जुर्माना देना होगा।

* बैंक दावा फॉर्म और प्रक्रिया की जानकारी सभी शाखाओं में उपलब्ध कराएंगे।
बैंकों को अपनी वेबसाइट पर भी जानकारी देनी होगी।
आवेदन के बाद एक यूनिक नंबर जनरेट होगा। इससे क्लेम की डिजिटल ट्रैकिंग कर सकेंगे।
बैंकों को नॉमिनेशन और सरवाइवर क्लाज को बढ़ाना होगा।

* ​ये नियम 1 जनवरी, 2026 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य बैंक के मृतक खातेदारों के परिजनों के लिए दावा निपटान प्रक्रिया को आसान बनाना है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो।

fans

जय बाबा बर्फानी
19/07/2025

जय बाबा बर्फानी

⚡ सड़क दुर्घटना  में घायल होने वालों का जीवन बचाने के लिए मोदी सरकार की सराहनीय योजना लागू,घायल को अस्पताल पहुंचने वाले ...
23/05/2025

⚡ सड़क दुर्घटना में घायल होने वालों का जीवन बचाने के लिए मोदी सरकार की सराहनीय योजना लागू,
घायल को अस्पताल पहुंचने वाले को मिलेंगे ₹25,000,
घायल को भी एक हफ्ते तक मिलेगा डेढ़ लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज⚡

भारत सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की मदद करने और उन्हें 'गोल्डन ऑवर' (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) के भीतर आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए राहगीर योजना (जिसे कुछ राज्यों में 'राहवीर योजना' भी कहा जाता है) शुरू की है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना और मानवीय सहायता को बढ़ावा देना है।

राहगीर योजना की मुख्य बातें:

* आर्थिक प्रोत्साहन:
इस योजना के तहत, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले आम नागरिक या राहगीर को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
यह प्रोत्साहन लोगों को बिना किसी डर या झिझक के घायलों की मदद करने के लिए प्रेरित करेगा।

* गोल्डन ऑवर का महत्व:
योजना का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि घायल व्यक्ति को जल्दी से जल्दी यानी 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार मिल सके, जिससे जीवन बचने की संभावना बढ़ जाती है।

* कैशलेस उपचार:
5 मई, 2025 से भारत सरकार ने "सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए नकद-रहित उपचार योजना, 2025" को अधिसूचित किया है।
इसके तहत, दुर्घटना में घायल व्यक्ति को नामित अस्पतालों में ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।
यह सुविधा दुर्घटना के बाद 7 दिनों तक उपलब्ध होगी।

* पुलिस उत्पीड़न से मुक्ति:
इस योजना के तहत, घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को पुलिस द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा। उनका व्यक्तिगत विवरण नहीं लिया जाएगा और यदि स्वैच्छिक रूप से उल्लेख किया जाता है,
तो केवल एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा पूछताछ की जाएगी।

* पात्रता:
मदद करने वाला व्यक्ति घायल का परिवार या रिश्तेदार नहीं होना चाहिए। उसे घटना की जानकारी और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे, और वह स्वयं इस कार्य के लिए स्वेच्छा से आगे आया हो।

* सरकारी लक्ष्य:
भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या में 50% की कमी लाना है।

* आप राहगीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद कैसे कर सकते हैं:
* तुरंत कार्रवाई करें:
दुर्घटना स्थल पर घबराएं नहीं और तुरंत घायल व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएं।
* सुरक्षा सुनिश्चित करें:
अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास करें (यदि संभव हो और सुरक्षित हो)।
* आपातकालीन सेवाओं को सूचित करें:
तत्काल 108 एंबुलेंस और पुलिस (112) को फोन करें और दुर्घटना के बारे में विस्तृत जानकारी दें।
* अस्पताल पहुंचाएं:
घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द निकटतम अस्पताल पहुंचाएं।
यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको राहगीर योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के लिए पात्र माना जाएगा।
* आवश्यक जानकारी प्रदान करें: अस्पताल और पुलिस को दुर्घटना से संबंधित कोई भी जानकारी प्रदान करने में सहयोग करें।

* यह योजना सड़क सुरक्षा में सुधार और घायलों के जीवन की रक्षा के लिए मानवीय सहायता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
है।
* मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस योजना को लागू करने की मंजूरी दे दी है।

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