Dr Vivek Singh

Dr Vivek Singh Dr Vivek Singh is an advocate at the Supreme Court of India. In the last 25-years, Dr Singh resolved

गांव, गरीब और किसानों के मसीहा, भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को शत् शत् नमन।वे न केवल राजनेता थे वरन् एक व...
29/05/2026

गांव, गरीब और किसानों के मसीहा, भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को शत् शत् नमन।
वे न केवल राजनेता थे वरन् एक विचारक, लेखक और ग्रामीण अर्थनीति के महान विद्वान् थे। वे अपनी सरलता, ईमानदारी, प्रशासनिक क्षमता, न्यायप्रियता तथा श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के लिए जाने जाते थे।

01/05/2026

आज का दिन विशेष है वैसे तो परमात्मा का बनाया प्रत्येक दिवस विशेष ही है लेकिन आज वैशाख पूर्णिमा का दिन वास्तव में विशेष ही है।
महाराजा सिद्धोधन और महारानी महामाया के संयोग से एक विलक्षण बालक का जन्म हुआ जिसका नाम सिद्धार्थ रखा गया। राजकुमार सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनने की कहानी सभी ने बार बार पढ़ रखी है।
अगर आप गौतम बुद्ध और बौद्ध समुदाय के बारे में कुछ जानना चाहते है तो सबसे पहले त्रिपिटक को पढ़िए, जो मूल रूप से तो पाली भाषा में लिखी गई है लेकिन अब हिंदी सहित अनेकों भाषाओं में उपलब्ध है। यह बौद्ध समुदाय का मुख्य ग्रन्थ है, जिसमें बुध के प्रवचन, शिक्षाएं एवं बौद्ध समुदाय के नियम दिए गए है।
"अप दीपों भव" महात्मा बुध का मुख्य संदेश है।जिसका अर्थ है अपना दीपक स्वयं बनो। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बुद्ध का जन्म अर्थात पृथ्वी पर अवतरण, ज्ञान अर्थात बुद्धत्व और मृत्यु अर्थात परिनिर्वाण तीनों एक ही दिन पूर्णिमा को हुए थे।
बुद्ध ने सबसे अधिक जोर ध्यान पर दिया। उनका सबसे प्रसिद्ध ध्यान सांसों के ऊपर है जिसे विपयसना के नाम से जाना जाता है।
मैने आज से करीब 20 वर्ष पूर्व सन् 2006 में पहली बार विपयसना का एक सप्ताह का ध्यान सत्र किया था। इस सत्र में एक बिल्डिंग में एक सप्ताह मौन रहना था। ध्यान के लिए बने हाल में पद्मासन अथवा सुखासन में सुबह से शाम तक मौन बैठना था। सहायक हमारे लिए पानी वगैरह जो चाहिए हमारे पास रख देते थे। उठने से लेकर सोने तक किसी से कोई बात नहीं, केवल मौन और लगातार सांसों पर ध्यान, उन्हें अंदर जाते और बाहर आते अनुभव करना। आप करके देखिए ये कार्य मुश्किल है या आसान? अभ्यास से आसान लगने लगता है।
बुद्ध के प्रवचनों के बारे इतनी बाते है खास तौर पर उनके परम शिष्य आनंद और बुद्ध के बीच वार्तालाप और शंका समाधान के बारे में हुई बाते कि शाम हो जाएगी, लेकिन बाते समाप्त नहीं होगी। परिनिर्वाण से पहले का संदेश जो उन्होंने बौद्ध समुदाय के अनुयायियों के लिए विशेषतौर पर दिया था, बड़ा महत्वपूर्ण है। उसके बारे में फिर कभी विस्तार से बात करेंगे॥

आज 01 मई को श्रमिक दिवस भी है। आज के दिन अर्थात एक मई को ही श्रमिक दिवस क्यों मनाया जाता है? सन् 1886 में अमेरिका के शहर शिकागो में फैक्ट्री श्रमिकों ने अपने अधिकारों के लिए हिंसक आंदोलन कर दिया था, जिसमें पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने पर अनेक मजदूर मारे गए थे। उनकी याद में तीन साल बाद सन 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस ने एक सम्मेलन किया, जिसमें मांग रखी गईं कि श्रमिक से एक दिन में आठ घंटे से अधिक काम न लिया जाय और सफ्ताह में एक दिन का अवकाश रखा जाए। तब से मजदूरों को न्याय दिलाने और समानता के अधिकार के लिए 01 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। भारत में पहली बार 1923 में श्रमिक दिवस की शुरुआत हुई। आज हमारे काम के घंटे निश्चित है और साप्ताहिक अवकाश है आओ हम उन श्रमिकों की शहादत को याद करे, उन्हें नमन करे जिनके कारण आज हमारे लिए कार्य अवधि एवं कार्य दिवस निश्चित किए गए है।

अब जम्मू कश्मीर की और चलते है क्या आपने कश्मीरी पंडित सर्वानंद कौल का नाम सुना है? आओ सर्वानंद कौल के बारे मे जानते है। सर्वानंद कौल को घाटी में सभी ‘प्रेमी’ कहकर पुकारते थे।
66 साल के कौल को आतंकियों ने उनके 27 साल के बेटे के साथ मार डाला था। उनकी पेड़ से टँगी लाश मिली थी। तिलक करने की जगह को छील कर चमड़ी हटा दी गई थी।
पूरे शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान थे। हड्डियाँ तोड़ दी गई थी। पिता पुत्र की आँखें निकाल ली गई थी। दोनों को फँदे से लटकाने के बाद मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए गोली भी मारी गई थी।पिता पुत्र की लाश आज ही के दिन अर्थात 01 मई 1990 को मिली थी। अब कश्मीरी पंडित इस तारीख को शहीदी दिवस या शहादत दिवस के रूप में मनाते हैं।
सर्वानंद कौल उन कश्मीरी हिंदुओं में से थे, जिन्हें 19 जनवरी 1990 की तारीख भी नहीं डरा पाई थी। जब सब हिंदू जान बचाकर भाग रहे थे, तब उन्होंने कश्मीर में ही रहने का फैसला किया।
परंतु उस दिन बाक़ी बचे कश्मीरी पंडितों ने भी घाटी को छोड़ दिया।
कश्मीरी शहीद दिवस पर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि 🙏

29/04/2026
अहम से ॐ की यात्रा ही जीवन की सबसे कठिन यात्रा है। स्वयं को कर्ता मान बैठना ही जीवन का सबसे बड़ा वहम और अहम भी है। मैं स...
11/04/2026

अहम से ॐ की यात्रा ही जीवन की सबसे कठिन यात्रा है। स्वयं को कर्ता मान बैठना ही जीवन का सबसे बड़ा वहम और अहम भी है। मैं से मुक्त हो जाना जीवन में बहुत बड़ी अशांति एवं कष्टों से मुक्त हो जाना भी है। मैं के कारण ही जीवन में बहुत सारी समस्याएं जन्म लेती हैं एवं जीवन अशांत हो जाता है।

समस्त हिंसा और अशांति के मूल में भी मैं का ही भाव छुपा है। जीवन में जहाँ जहाँ मैं भाव आपके आगे आयेगा वहाँ वहाँ आप पाओगे कि प्रसन्नता आपके जीवन से धीरे धीरे पीछे हट रही है। यदि मन में अहमता की दीवार न हो तो जीवन स्वतः आनंदपूर्ण बन जाता है। मैं का भाव हृदय की उदारता को नष्ट कर देता है।

जहाँ मैं है वहीं से अहम की यात्रा का प्रारंभ भी है। जीवन का वास्तविक सौंदर्य तो उदारता, विनम्रता, प्रेम और संवेदनशीलता में ही खिलता है। मैं अर्थात स्वयं में सिमट कर रह जाना, असीमता, अनंतता के आकाश से वंचित रह जाना। एक बात सदैव याद रखें कि मैं की मुक्ति में ही जीवन की अधिकतर समस्याओं की मुक्ति है। मैं नहीं, वह महान प्रभु सब कर रहे हैं, यही कृतज्ञता ही जीवन का अहोभाव है। इसी अहोभाव में जीने वाला व्यक्ति ही एक दिन प्रभु के श्रीचरणों का अधिकारी बन जाता है।

अहमता रहित जीवन का अगर कोई उदाहरण है तो नारी है। वह वास्तविक सृजनकर्ता है। नवजीवन को धारण करती है, उसको जन्म देती है, पालन पोषण करती है। लेकिन समाज उसी संतान को पिता की पहचान दे देता है, वो खुशी खुशी इसे स्वीकार भी कर लेती है। आज राष्ट्रीय मातृत्व सुरक्षित दिवस है। सुरक्षित मातृत्व महिला का अधिकार है और उससे संबंधित व्यक्तियों का कर्तव्य। हर जच्चा बच्चा सुरक्षित रहे, उसकी उचित देखभाल हो, उचित पोषण मिले, ये परिवार एवं शासन का कर्तव्य है।

आज तक के इतिहास में अब तक का सबसे शक्तिशाली महाबली किसी को कहा जाए तो एक ही नाम है, जिसके कोई समक्ष तो क्या, नजदीक भी नह...
02/04/2026

आज तक के इतिहास में अब तक का सबसे शक्तिशाली महाबली किसी को कहा जाए तो एक ही नाम है, जिसके कोई समक्ष तो क्या, नजदीक भी नहीं ठहरता। कहते हैं प्रतिभा पर संकल्प भारी पड़ जाता है लेकिन जहां तक मेरा अनुभव है समर्पण संकल्प से भी कहीं ज्यादा बढ़कर है और बात समर्पण की हो तो हनुमान जी के समकक्ष दूसरा कोई नाम सुनने में नहीं आता। हनुमान जी को सोचते ही एक वानर (यानि वन में रहने वाला नर) छवि हमारे मन मे उभरती है, हमारा दुर्भाग्य कि हनुमान जी के बारे में हमे वह नहीं बताया गया, जो बताना चाहिए था।

क्या आपने कभी सोचा है की जिसकी हमने वानर छवि बना दी है वह महान वैज्ञानिक था। जिसे हम मात्र वानर समझकर पूजते हैं, वह असल में ब्रह्मांड का सबसे उन्नत, सुपर ह्यूमन हैं? जिसकी तकनीक आज के क्वांटम फिजिक्स से भी कोसों आगे थी? जिसे दुनिया केवल एक पूंछ वाला वानर समझती रही, वह असल में ऋग्वेद का प्रकांड विद्वान और अंतरिक्ष की दूरियों को पलक झपकते नापने वाला एक कॉस्मिक वारियर हैं।

जब ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमानजी प्रथम बार प्रभु श्री राम से मिले, तो उन्होंने एक ब्राह्मण का वेश धरकर शास्त्र सम्मत संवाद किया। उनके व्याकरण और शुद्ध उच्चारण को सुनकर श्री राम भी चकित रह गए थे।

आइए अब हनुमानजी का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं। होमिनेड्स और क्वांटम भौतिकी से समझते हैं।

मानव विकास के क्रम में होमो सेपियन्स के साथ साथ होमिनेड्स की ऐसी प्रजातियां भी मौजूद थीं जो शारीरिक बल में मनुष्य से दस गुना शक्तिशाली थीं। हनुमानजी उसी उन्नत और दिव्य प्रजाति के प्रतिनिधि थे, जिनके पास पूंछ जैसे अवशेषी अंग थे, लेकिन मस्तिष्क की क्षमता असीमित थी।

हनुमानजी की अष्ट सिद्धियां वास्तव में पदार्थ और ऊर्जा पर पूर्ण नियंत्रण हैं। अणिमा सिद्धि परमाणु स्तर पर संकुचित होने की क्षमता है, जबकि महिमा ब्रह्मांडीय विस्तार का विज्ञान है। यह क्वांटम फिजिक्स के मास डेंसिटी और स्पेस टाइम के सिद्धांतों को चुनौती देने वाली सर्वोच्च तकनीक है।
उनका शरीर वज्र के समान था। उनके शरीर की कोशिकाओं का घनत्व सामान्य जैविक ढांचे से भिन्न था, जो उन्हें वायु की गति से उड़ने और गुरुत्वाकर्षण को बेअसर करने की शक्ति प्रदान करती थी।

ब्रह्मांड के सबसे बड़े योद्धा हनुमानजी केवल एक विद्वान नहीं, बल्कि रणक्षेत्र के वह काल हैं जिनके सामने मृत्यु भी थरथराती है। उनका व्यक्तित्व अतुलितबलधामं है । लंका दहन से लेकर रावण की सभा तक, उनका पराक्रम किसी सेना का मोहताज नहीं था। वे स्वयं में एक समर्थ सेना थे। उनकी गर्जना मात्र से शत्रुओं के हृदय विदीर्ण हो जाते थे। ब्रह्मांड का कोई भी अस्त्र चाहे वह ब्रह्मास्त्र हो या इंद्र का वज्र, उनकी चेतना को परास्त नहीं कर सका। वे काल के भी नियंता हैं क्योंकि वे चिरंजीवी हैं। समुद्र लांघना उनकी शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि उनके संकल्प की विजय थी।

हनुमानजी का वानर स्वरूप एक दिव्य आवरण है, जिसके भीतर अनंत ब्रह्मांडीय ज्ञान और अदम्य शक्ति का महासागर हिलोरे लेता है। वे पशु, मनुष्य और देवता के बीच का वह सेतु हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यदि चेतना जागृत हो, तो शारीरिक सीमाएं अर्थहीन हो जाती हैं। वे एक सुपर-ह्यूमन नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्म की क्रियात्मक शक्ति हैं। अंततः हनुमानजी का वानर स्वरूप उस विराट चेतना का केवल एक आवरण है, जिसे हमारी सीमित आंखें देख पाती हैं। वे पशुता से देवत्व की यात्रा के वह चरम बिंदु हैं, जहाँ पहुँचकर बुद्धि वेदांत बन जाती है और शक्ति सेवा में रूपांतरित हो जाती है। वे उस आदि ऊर्जा के जीवंत प्रमाण हैं, जो सूर्य को निगलने का साहस भी रखती है और प्रभु के चरणों में मस्तक झुकाने की विनम्रता भी। वे अतीत की कथा नहीं, बल्कि भविष्य के उस सुपर ह्यूमन का ब्लूप्रिंट हैं, जिसे विज्ञान आज खोजने की कोशिश कर रहा है।

जब तक इस ब्रह्मांड में प्राणों का संचार है, तब तक वायुपुत्र की गर्जना हर उस हृदय में गूँजती रहेगी, जो साहस और ज्ञान की खोज में है। वे वानर नहीं थे, वे तो स्वयं ब्रह्म की वह क्रियाशील शक्ति थे, जिसने धरा पर उतरकर यह सिद्ध किया कि यदि भीतर राम अर्थात परम चेतना जागृत हों, तो एक जीव भी काल के कपाल पर विजय की पटकथा लिख सकता है। वे केवल वानर कुल के प्रतीक नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के वह पार्टिकल हैं, जिनमें साक्षात परमात्मा की गति और शक्ति बसती है।

हनुमान जी की अलौकिक दिव्य शक्तियां अटूट भक्ति, समर्पण और संयम का प्रतीक हैं, जो अतुलित बल, ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करती हैं। वे रुद्र अवतार हैं, जो अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता हैं, जो भक्तों के भय, रोग और बाधाओं को दूर कर जीवन में साहस और बुद्धि प्रदान करते हैं।

हनुमान जी की सुपर ह्यूमन शक्तियों का महत्व अटूट भक्ति और शक्ति का मिलन है। हनुमान जी की शक्ति का मुख्य स्रोत उनकी श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति है। यह दर्शाता है कि सच्चा समर्पण ही सर्वोच्च शक्ति का आधार है।हनुमान जी अष्ट सिद्धियों जो अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व है, के दाता हैं। अष्ट सिद्धियां उन्हें अलौकिक क्षमताएं प्रदान करती हैं।

हनुमान जी संकटमोचन और अभयदाता है, वे भय और नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं, जिससे भक्तों को मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है। हनुमान जी बुद्धि और बल के संतुलन की अद्भुत मिसाल है, वे न केवल शारीरिक रूप से शक्तिशाली हैं, बल्कि ज्ञान गुण सागर के रूप में बुद्धि और संवाद कौशल में भी निपुण हैं। वे मानव जीवन के आदर्श है। हनुमान जी का चरित्र हमें विनम्रता, साहस और निष्काम सेवा का पाठ पढ़ाता है।

हनुमान जी का जीवन यह याद दिलाता है कि भक्ति और संयम के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता से परे जाकर अद्भुत कार्य कर सकता है।

हनुमान जी में जो सबसे बड़ी महानता दिखाई पड़ती है वह है भगवान श्रीराम के प्रति उनका निःस्वार्थ समर्पण, दास्य भाव और अखंड भक्ति। वे असीम शक्ति और बुद्धि के स्वामी होने के बावजूद, स्वयं को सदैव श्रीराम का दास मानते है।

आप एवं आपके परिवार को हनुमान जन्मोत्सव की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। श्रीराम भक्त हनुमान जी की कृपा आप और आपके परिवार पर बनी रहे।

रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, तपस्या और संयम  का अद्वितीय उदाहरण है, जो हर युग...
26/03/2026

रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, तपस्या और संयम का अद्वितीय उदाहरण है, जो हर युग में मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।

मर्यादा और कर्तव्य के सर्वोच्च मानकों को स्थापित कर पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने प्राचीन भारतीय संस्कृति को अद्वितीय आयाम दिए।

आइए, हम सभी प्रभु श्रीराम का नमन कर, एक सशक्त, समरस और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें।

आज बलिदान दिवस पर हम शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को विनम्र नमन करते हैं।उनका बलिदान केवल स्मरण करने की चीज़ ...
23/03/2026

आज बलिदान दिवस पर हम शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को विनम्र नमन करते हैं।उनका बलिदान केवल स्मरण करने की चीज़ नहीं, बल्कि समझने की पुकार है।

आज देशभक्ति का अर्थ केवल प्राणों का बलिदान नहीं है, आज देश को हमारे समय, ऊर्जा, श्रम, ईमानदारी और जागरूक भागीदारी के योगदान की आवश्यकता है।
जो लोग भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के नाम पर केवल उकसाते हैं, उनसे सावधान रहना होगा। हमें उनके नाम पर आवेश नहीं, बल्कि उनकी जैसी हिम्मत, स्पष्टता, त्याग, संवेदनशीलता और समझ पैदा करनी है।

आज आवश्यकता व्यवस्था को अंधे क्रोध में उखाड़ने की नहीं, बल्कि उसे जगाने, सुधारने, जवाबदेह बनाने और समाज के पक्ष में मोड़ने की है।
समाज के बीच सच्चा बलिदान यही है कि हम अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएँ, सवाल पूछें, संवाद करें, श्रमदान करें, और न्यायपूर्ण, सहभागी और जागृत व्यवस्था के निर्माण में जुटें।

शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही है,
हम उनके साहस को अपने चरित्र में,
और उनके सपनों को अपने कर्म में उतारें।
इंकलाब का अर्थ केवल तोड़ना नहीं, सही अर्थों में समाज और व्यवस्था को बेहतर बनाना भी है।

आज चैत्र प्रतिपदा है विक्रम संवत का प्रथम दिवस। विक्रम संवत चंद्रमा की गति पर आधारित है। विक्रम संवत् की शुरुआत महान चंद...
19/03/2026

आज चैत्र प्रतिपदा है विक्रम संवत का प्रथम दिवस। विक्रम संवत चंद्रमा की गति पर आधारित है। विक्रम संवत् की शुरुआत महान चंद्र वंशी सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। सनातन नव वर्ष की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं। इसी के साथ साथ आज से नवरात्र प्रारंभ हो रहे है, इसमें माता के विभिन्न रूपों की पूजा, अर्चना एवं आराधना की जाती है। जगत माता का आपको एवं आपके परिवार को आशीर्वाद प्राप्त हो।

आज रंगोत्सव है होली जैसा पर्व पृथ्वी पर कोई दूसरा नहीं मिलेगा। इसमें रंग है, आनंद उत्सव है, मदहोशी है, मस्ती है, नृत्य ह...
04/03/2026

आज रंगोत्सव है होली जैसा पर्व पृथ्वी पर कोई दूसरा नहीं मिलेगा। इसमें रंग है, आनंद उत्सव है, मदहोशी है, मस्ती है, नृत्य है। होली उल्लास का एक महोत्सव है।
एक गहन स्मरण हमारे भीतर जगता रहे कि इस जगत में सबसे बड़ी विजय नास्तिकता के ऊपर आस्तिकता की है। सदा याद रहे कि आखिर विजय आस्तिकता की ही होती है।
हिंदू को वैराग्य समझ लिया गया है। जो जितना त्याग करे, भूखा रहे, वस्त्र के नाम पर बस अंगवस्त्र या गमछा पहने, भूमि का शयन करे आदि। लेकिन धर्म उदासी नहीं है सजीव है, जीवंत है, उत्सव है और होली इसका प्रतीक है।
इस दिन सरलता की अहंकार पर विजय हुई। इस दिन विध्वंस पर सृजन जीता। इस दिन शक्तिशाली दिखाई पड़नें वाले पर निर्बल सा दिखाई पड़ने वाला बालक जीत गया। इस दिन भक्ति जीत गई।
अगर आप ध्यान से पृथ्वी को महसूस करेंगे तो आपको रंग बिरंगे फूल दिखाई देंगे, उनकी खुशबू आपको अपनी और खींचेगी, झरनों की गड़गड़ाहट, नदियों की कल कल, पक्षियों की चहचहाट, भौरों की गुंजन, ये सब प्रकृति का जैसे संगीत और नृत्य साथ साथ चल रहा हो।
देखो फूलों में कितना रंग, कितने इंद्रधनुषों में उसका फैलाव है, कितनी हरियाली है, कैसा चारो तरफ परमात्मा का गीत चल रहा है, पहाडों में, पत्थरों मे, पक्षियो में, पृथ्वी पर, आकाश में सब तरफ उसका महोत्सव है इसी का तो प्रतीक है होली, यही तो परमात्मा का रंगोत्सव है।
इसे अगर हम गौर से देखेंगे तो हम पायेंगे ऐसे ही हो जाना उससे मिलने का रास्ता है। गीत गाते, कीर्तन करते, कोई नाचते पहुंचता है, कोई ध्यान समाधि के माध्यम से पहूंचता है।
आओ ध्यान संग होली मनाने के अनूठे अनुभव के साक्षी बने। यही जीवन की सार्थकता है। यही जीवन का आनंद है यही भक्ति का सार है। उससे मिलन के लिए उस जैसा हो जाना है और वो महान ईश्वर तो आनन्दमय है होली जैसा।
आपको रंगोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ ॥

भरतपुर रियासत के राजा  #मानसिंह जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन 🙏।राजा मानसिंह जी ने  #भरतपुर_रियासत_के_झण्डे की खातिर अपने ...
21/02/2026

भरतपुर रियासत के राजा #मानसिंह जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन 🙏।
राजा मानसिंह जी ने #भरतपुर_रियासत_के_झण्डे की खातिर अपने प्राण त्याग दिए थे परन्तु कभी भी सम्मान के साथ समझौता नहीं किया था।

राजा मान सिंह (5 दिसंबर 1921 - 21 फरवरी 1985 ) एक भारतीय राजनीतिज्ञ और जाट रियासत भरतपुर राज्य के प्रमुख थे। वे 1952 से 1984 तक डीग विधानसभा क्षेत्र से सात बार स्वतंत्र विधायक रहे। ये महाराजा किशन सिंह जी के पुत्र थे।
राजा मानसिंह जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन व विन्रम श्रद्धांजलि 🙏 💐।

Address

D-116, Block D, Defence Colony
Delhi
110024

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr Vivek Singh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Dr Vivek Singh:

Share