03/07/2024
कैंची धाम ......
.....गया था, तब मंदिर में मेरे अलावा सिर्फ तीन लोग थे। इतनी शांति और इतनी ऊर्जा महसूस हुई कि सुबह गए तो शाम को ही लौटे।
इन छह सालों में आज हालत ऐसी हो चुकी है कि मंदिर में बैठना तो दूर की बात है, आप कैंची धाम में पैर भी नहीं रख सकते हैं। क्योंकि इंस्टाग्राम पर दर्जनों वीडियोज ये बता रहें हैं कि भाइयो- बहनों कैंची धाम जाइये, एप्पल और फेसबुक वहीं बने हैं..! आप भी बन जाएंगे।
हालात ये है कि हनीमून मनाने नैनीताल गए लोग भी कैंची धाम चले जा रहें हैं, "बाबू आइफोन लेकर क्या करोगी, जहां आईफोन बना है न, डायरेक्ट वहीं लेकर चलता हूँ।"
खैर...!
नीम करौरी बाबा......
जिस कोसी के किनारे को बाबा ने कभी साधना स्थली बनाई होगी, वहाँ बैठकर आज लोग बियर पी रहें हैं और नदी में उतरकर अश्लील हरकते करते हुए फ़ोटो खींचवा रहें हैं।
मेरे जैसे लोग, जो कई सालों से इस आश्रम को देख रहें हैं, उनसे ये सब देखा नही जाता। महाराज जी अगर आज जिंदा होते तो कैंची धाम बन्द करके कहीं और चल गए होते।"
भारत में धार्मिक पर्यटन अपने सबसे बड़े उफान पर है। पहाड़ की लोकल इकोनॉमी बूस्ट हो रही है। लोकल लोगो के पास पैसे आ रहें हैं, पलायन रुकेगा, रोजगार मिलेगा।
लेकिन हनुमान दास जी का भक्त मन, मेरे इन तमाम बाजारवादी तर्कों से तुष्ट न हुआ। वो कहते रहे कि भैया ये लोग भक्त नहीं हैं। ये चमत्कार की आस में आए हुए लोग हैं। इनको ध्यान और पूजा से मतलब नही है। मंदिर से बाहर निकलते ही ये भक्त नही रहते, उद्दंड हो जातें हैं।
लोगों का यहां आना बुरी बात नही है, बुरी बात है यहां की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा और इसकी पहचान को नष्ट करना। आप लिखिए कि लोग आएं लेकिन इसकी ऊर्जा को नष्ट न करें। ये हल्ला-गुल्ला करने की जगह नही है, ये आंख बंद करके राम-राम करने और जय हनुमान जी करने की जगह है।
मेरे तो कुछ जानने वाले लोग अपना-अपना काम-धाम छोड़कर पर्ची निकलवाने बाबा बागेश्वर धाम जा चुके हैं।
अब बागेश्वर धाम जाकर उनकी अर्जी तो नही लगी, न ही पर्ची निकली। लेकिन उसी बागेश्वरधाम में आज कई लोग पर्ची निकालने वाले बाबा बन चुके हैं, क्योंकि धीरेंद्र बाबा के पास चार्टर प्लेन से नीचे उतरने का समय नही है।
लेकिन कहना गलत न होगा कि उनके यहां जो भी इकट्ठा हुई भीड़ है..उसे रामकथा और भागवद कथा नहीं सुनना है, उसे अर्जी लगवानी है, बिगड़ा काम बनवाना है।
ये बिगड़ा काम बनाने वाली वही भीड़ है जो चमत्कारों के सहारे जीवन गुजार रही है। वो बागेश्वरधाम नही जाएगी तो किसी चर्च में चली जाएगी।
किसी राम रहीम, आशाराम, किसी भोले बाबा के आश्रमो में रहीम आरती और आशुमल चालीसा गाएगी।
लेकिन कहीं न कहीं जरूर जाएगी....
इस भीड़ को आर्थिक, मानसिक, शारीरिक समस्या से तुरंत मुक्ति चहिये। एक झटके में छुटकारा चाहिए।
तभी तो इस भीड़ को सैंडल पहनकर भोले बाबा अपनी पैरों की धूल बेच देता है। कोई बाबा अपने खेतो में बैगन और मूली उगाकर एक-एक मूली लाखो में खरीदने पर बाध्य कर देता है। ये भीड़ मरती है, लुटती, पीटती है लेकिन बाबा के पास जाती जरूर है।
वो देखती है कि फलाना नेता भी बाबा के चरण में पड़े हुए हैं। फलाना आईएएस अफसर तो चरणामृत पीता है तो हम क्या चीज हैं।
लेकिन उसे समझ नहीं आता कि नेता तो इनके यहां वोट के लिए जाएंगे। अधिकारी जुगाड़ के लिए जाएंगे। बागेश्वर धाम की जरूरत भाजपा और कांग्रेस को होगी , भोले बाबा की जरूरत मायावती और अखिलेश यादव को रहेगी।
लेकिन आपको क्या जरूरत है भाई साहब ?
आपको जरूरत है, मानसिक इलाज़ की।
पूजा पाठ करना है तो सबसे पहले गीता उठाइये... और पढ़िए कि कर्म से बड़ी कोई पूजा नही है, गीता से बड़ा कोई गुरु नही है, न ही कृष्ण से बड़ा कोई उपदेशक है।