Dinesh srivastava

Dinesh srivastava my dear friends

29/10/2024

बहुत जल्दी छतरपुर में दिनेश सर आप लोग की सेवा के लिए एक न्यू ब्रांच डाल रहे हैं जिन्हें भी छतरपुर में एडमिशन लेना हो 8368037001 मैं संपर्क करें

04/08/2024
'विश्वास' एक छोटा 'शब्द' है, उसको पढ़ो तो एक सेकंड लगता है, सोचो तो एक मिनट लगता है, समझो तो एक दिन लगता है, पर साबित कर...
14/07/2024

'विश्वास' एक छोटा 'शब्द' है, उसको पढ़ो तो एक सेकंड लगता है, सोचो तो एक मिनट लगता है, समझो तो एक दिन लगता है, पर साबित करने में 'ज़िन्दगी' लग जाती है.

प्रिया कक्षाओं के समन्वयक दिनेश श्रीवास्तव -8368037001सुप्रभात, बंदन ,अभिनंदन ।bआप पर प्रभुकृपा सदैव बनी रहे ।आपके स्वस्...
04/07/2024

प्रिया कक्षाओं के समन्वयक दिनेश श्रीवास्तव -8368037001
सुप्रभात, बंदन ,अभिनंदन ।b
आप पर प्रभुकृपा सदैव बनी रहे ।
आपके स्वस्थ,समृद्ध एवं आनंदमय जीवन के लिए अनंत शुभकामनाएं तथा सप्रेम नमन।

गुरु पूर्णिमा, ब्यास पूर्णिमा, मुड़िया पूर्णिमा की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं।।

यह तन विष की बेल है
गुरु अमृत की खान।
शीश दिए पे गुरु मिले,
तो भी सस्ता जान ।।

*🚩गुरुदेव वे हैं, जो साधना बताते हैं, साधना करवाते हैं एवं आनंद की अनुभूति प्रदान करते हैं । गुरु का ध्यान शिष्य के भौतिक सुख की ओर नहीं, अपितु केवल उसकी आध्यात्मिक उन्नति पर होता है । गुरु ही शिष्य को साधना करने के लिए प्रेरित करते हैं, चरण दर चरण साधना करवाते हैं, साधना में उत्पन्न होनेवाली बाधाओं को दूर करते हैं, साधना में टिकाए रखते हैं एवं पूर्णत्व की ओर ले जाते हैं । गुरु के संकल्प के बिना इतना बडा एवं कठिन शिवधनुष उठा पाना असंभव है । इसके विपरीत गुरुकी प्राप्ति हो जाए, तो यह कर पाना सुलभ हो जाता है । श्री गुरुगीता में ‘गुरु’ संज्ञा की उत्पत्ति का वर्णन इस प्रकार किया गया है-*
*गुकारस्त्वन्धकारश्च रुकारस्तेज उच्यते ।*
*अज्ञानग्रासकं ब्रह्म गुरुरेव न संशयः ।। – श्री गुरुगीता*
*अर्थ : ‘गु’ अर्थात अंधकार अथवा अज्ञान एवं ‘रु’ अर्थात तेज, प्रकाश अथवा ज्ञान । इस बात में कोई संदेह नहीं कि गुरु ही ब्रह्म हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं । इससे ज्ञात होगा कि साधक के जीवन में गुरु का महत्त्व अनन्य है । इसलिए गुरुप्राप्ति ही साधक का प्रथम ध्येय है । गुरुप्राप्ति से ही ईश्वरप्राप्ति होती है अथवा यूं कहें कि गुरुप्राप्ति होना ही ईश्वरप्राप्ति है, ईश्वरप्राप्ति अर्थात मोक्षप्राप्ति- मोक्षप्राप्ति अर्थात निरंतर आनंदावस्था । गुरु हमें इस अवस्था तक पहुंचाते हैं । शिष्य को जीवनमुक्त करनेवाले गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गुरुपूर्णिमा मनाई जाती है ।*

*🚩इस प्रकार हर शिष्य मन-ही-मन अपने दिव्य भावों के अनुसार अपने सद्गुरुदेव का पूजन करके गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व मना सकता है। करोड़ों जन्मों के माता-पिता, मित्र-सम्बंधी जो न दे सके, सद्गुरुदेव वह हँसते-हँसते दे देते हैं।*

आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो ।
ज्ञान, ध्यान, धैर्य और कर्म के प्रशस्त मार्ग पर मार्गक्रमण करने की सीख देनेवाले, अपने मार्गदर्शन से शिष्य का जीवन सफल बनानेवाले महनीय गुरूजनों को मेरा वंदन।आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं !

12/12/2023
12/12/2023

Any problem please call me 8368037001

12/12/2023

भुखे मर जाना लेकीन अध्यापक के साथ धोखा करके उसका रुपया मत हडप लेना वर्ना परिणाम इस जन्म तो क्या अगले जन्म तक भुगतने को तैयार रहना। यह कटु सत्य हे।

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17/10/2023

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