28/06/2026
या लव मैरिज हमारे संस्कारों के खिलाफ है? बिल्कुल नहीं! हमारे इतिहास और ग्रंथों में अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने को 'गंधर्व विवाह' कहा गया है।
मनुस्मृति (3.32) से लेकर ऋग्वेद के मंत्रों तक, हमारे ऋषियों-मुनियों ने आपसी प्रेम और 'स्वयंवर' यानी निजी पसंद को सबसे उत्तम और सुखी विवाह माना है।
महाभारत में दुष्यंत और शकुंतला का उदाहरण इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। अगर आज का समाज भी इस प्राचीन और प्रगतिशील सोच को अपना ले, तो किसी भी बच्चे को दबाव में आकर गलत कदम नहीं उठाना पड़ेगा। इस जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए वीडियो को ज़रूर शेयर करें!
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